700 करोड़ की फल-सब्जियां खेतों में सड़ गईं, टनों फसल बरबाद, प्रदेशभर के सब्जी-फल उत्पादक किसान लाकडाउन में फंसे

700 करोड़ की फल-सब्जियां खेतों में सड़ गईं, टनों फसल बरबाद, प्रदेशभर के सब्जी-फल उत्पादक किसान लाकडाउन में फंसे
  • अनिल द्विवेदी


रायपुर. लॉकडाउन के कारण राज्य में सब्जियां और फलों की खेती बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. हाल यह हैं कि केला, खीरा, लौकी, टमाटर की टनों फसल लगभग बरबाद हो चुकी है. हल्दी और अदरक भी खेतों में जाम है. फसल तोड़ाई के लिए ना तो मजदूर मिल रहे हैं और ना ही बिक्री के लिए बाजार जबकि पंजाब, हरियाणा, यूपी जैसे राज्यों ने सब्जी—फल उत्पादक किसानों को लॉकडाउन से मुक्त रखा है लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने यह छूट नही दी नतीजन हजारों कैरेट सब्जी और फल सड़ गये हैं. सबसे बुरी स्थिति उन किसानों की है जो ऋण लेकर खेती करते हैं.

जयंत भाई टांक छत्तीसगढ़ के प्रमुख सब्जी और फल के बड़े उत्पादक हैं. खुद भी किसान हैं. उनके मुताबिक लाकडाउन में कम से कम 700 से 800 करोड़ का नुकसान हुआ है. अन्य राज्य हरियाणा, यूपी, पंजाब ने लॉकडाउन के दौरान सब्जी और फल निर्माता किसानों को छूट दे रखी है नतीजन वहां सब्जियों का बाजार और किसान दोनों सुखी हैं. जबकि छत्तीसगढ़ में यह उद्योग भी लॉकडाउन में है. सब्जी निर्माताओं का यह भी कहना है कि मार्च, अप्रैल और मई गुजरने के बाद अब आने वाले समय में बरसात की तैयारियां भी करनी है लेकिन यही नुकसान पूरा नही होगा तो बरसात के समय सब्जियों की तैयारी कैसे करेंगे.

श्री टॉक बताते हैं कि अकेले उनके ही खेत से 15 हजार कैरेट सब्जियां बरबाद हो गईं क्योंकि लेवाल ही नही थे. विशेषज्ञ बताते हैं कि टमाटर तो खेतों में ही सड़ गया. केला माह फरवरी मार्च तक बाजार में आना शुरू होना था लेकिन कोरोना के चलते वह भी खेतों में ही पड़ा है. इसी तरह अमरूद, मिर्च की फसल भी बरबाद हो गई है. सरकार को चाहिए था कि या तो वह खुद इन फसलों को खरीदती या लॉकडाउन में छूट दे देती लेकिन दोनों ही विकल्प काम नही आए. नतीजन अब किसानों के साथ साथ राज्य को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.

इसी तरह बस्तर संभाग के कोंडागांव, जगदलपुर तथा आसपास के इलाकों के किसान लॉकडाउन से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. उनकी फसल चौपट हो रही है, ना तो मजदूर मिल रहे हैं और ना ही बाजार खुला है. ऐसे में व्यवसायियों से ऋृण लेकर फसल उगाने वाले किसान चिंतित हैं कि अगली फसल कैसे ली जाएगी. हाल यह हैं कि मिर्ची, साग सब्जी, अदरक, हल्दी, मसाले, औषधीय व सुगंधी फसलों को मुफत में बांट रहे हैं किसान. ऐसे ही किसानों की पीड़ा की व्यथा—कथा उजागर की डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने.

सुभाष मंडल बस्तर संभाग के कोंडागांव जिले के एक साधारण और बेहद मेहनती किसान हैं, खुद की कोई जमीन नहीं है। दूसरे किसानों की खाली पड़ी जमीने किराए पर लेकर साग सब्जियों की खेती करते हैं। अपना भी परिवार पालते हैं, जमीन मालिक को किराया भी देते हैं तथा आसपास के पचासों मजदूरों के घर का चूल्हा भी जलाते हैं। पिछले कई सालों से मेहनत करके सब्जियां तथा विशेषकर मिर्ची की खेती करते आ रहे हैं। बैंक इन्हें कर्जा देते नहीं, क्योंकि उनके नाम पर कोई खेती, जमीन जायदाद भी नहीं है और ना ही कोई ऐसी परिसंपत्ति है जिसे बैंक में बंधक रखकर वह बैंक से कर्जा ले सकें.