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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की बेबाकी

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की बेबाकी



कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में शुमार छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण की मौजूदा स्थिति को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का पूरी बेबाकी से यह स्वीकार करना कि इस बार पिछली बार की तुलना में कुछ ढिलाई, लापरवाही हुई है। कुछ हद तक रायपुर में क्रिकेट मैच का आयोजन इसके लिए जिम्मेदार है। होली के समय कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से छत्तीसगढ़ के मजदूरों का घर लौटना और उनकी आवाजाही भी बहुत हद तक इसके लिए जिम्मेदार है। सामान्यत: सरकारें अपनी गलतियों, नाकामियों से पल्ला झाड़कर बहुत बार विपक्ष पर या जनता द्वारा बरती गई लापरवाही पर दोष मढ़कर पल्ला झाड़ लेती हैं। किन्तु छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी छवि के अनुरूप निर्भीकता, बेबाकी और साफगोई से अपनी बात कही है। मीडिया से जुड़े संपादकों से बात करते हुए कोरोना संक्रमण की बिगड़ती स्थिति को स्वीकार किया और उनके सुझावों को ना केवल स्वीकार किया बल्कि उन पर तुंरत अमल के आदेश भी दिये।
मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि वर्तमान समय में कोरोना संक्रमण में आई हुई तेजी चिंताजनक है। राज्य सरकार द्वारा कोरोना संक्रमण की रोकथाम और मरीजों के इलाज के लिए सभी आवश्यक उपाय और प्रबंध किए जा रहे हैं। सामाजिक संगठनों का भी इसमें सहयोग लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आपदा का समय है, इसलिए निजी अस्पतालों को मरीजों के इलाज में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। मीडिया प्रतिनिधियों ने बताया की बहुत से निजी अस्पताल इलाज के नाम पर लूटमार कर रहे हैं।
बढ़ते संक्रमण के बीच केंद्र और राज्य की सरकारों के बीच दलगत राजनीति जारी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने शुरुआत में कोरोना की को-वैक्सीन लगाने से इंकार करने को छत्तीसगढ़ में महामारी बढऩे के लिए जिम्मेदार ठहराया है। जवाब में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने केंद्रीय मंत्री पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। डॉ. हर्षवर्धन ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा, छत्तीसगढ़ सरकार ने डीजीजीआई द्वारा आपातकालन उपयोग प्राधिकरण दिए जाने के बावजूद को-वैक्सीन का उपयोग करने से इंकार कर दिया। राज्य सरकार अपने कार्यों से लोगों की जान संकट में ही नहीं डाल रही, बल्कि दुनिया में गलत संदेश भी दे रही है। जवाब में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने दस्तावेजों के साथ हमला कर दिया। उन्होंने लिखा कि छत्तीसगढ़ में 10 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है। जो राष्ट्रीय कवरेज से काफी ज्यादा है। एक दिन में 3 लाख लोगों को यानी राज्य की 1 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या को वैक्सीन दी गई। छत्तीसगढ़ की जनता को गुमराह नहीं करना चाहिए।
रायपुर में क्रिकेट मैच और असम में चुनाव प्रचार को लेकर सोशल मीडिया पर बहुत से मीम बने। स्टेडियम में क्रिकेट मैच में बल्लेबाजी करते भूपेश बघेल की बाल से चारों ओर कोरोना के वायरस का फैलाव दिखाया गया, वहीं दूसरी ओर उन्हें डांस करते दिखाया गया। छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने अपने ट्वीटर पर एक वीडियो शेयर किया। इसमें एक तरफ प्रदेश में कोरोना संक्रमितों का अंतिम संस्कार और दूसरी तरफ असम में सीएम भूपेश बघेल का डांस करते हुए विजुअल है। इसको लेकर डॉ. रमन सिंह ने लिखा था कि छत्तीसगढ़ सब याद रखेगा। भूपेश बघेल जी। देश जब कोरोना से लडऩे की तैयारी कर रहा था, आप रोड सेफ्टी क्रिकेट मैच कराकर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे थे। पूरे देश में वैक्सीनेशन हो रहा था, आप राजनीति कर रहे थे। लोग अस्पतालों में बेड और दवाई के लिए रो रहे हैं, आप असम में नाच रहे हैं।
भाजपा के नेताओं ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर अपने बयानों के जरिये बहुत से हमले किये। छत्तीसगढ़ में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए भाजपा के प्रतिनिधि मंडल ने मुख्य सचिव अमिताभ जैन से मुलाकात कर कहा है कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही है, इसलिए खाली पड़े बेड की सूची जारी करें। होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों को गाइड करने के लिए डॉक्टरों की टीम बनाएं, कोविड सेंटर बढ़ाने के लिए खाली पड़े हॉस्टल का उपयोग किया जाए। प्राइवेट अस्पताल में होने वाले इलाज का शुल्क सरकार तय करे, जैसे वेटिंलेटर में कोई मरीज है तो उसे कितनी राशि देना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर मशीनें पड़ी है, लेकिन उनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं, यदि ऐसा है तो प्राइवेट अस्पतालों को दिया जाए।
इसी बीच मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रायवेट अस्पतालों ने आक्सीजन सिलेंडर 20 हजार का, एक-एक एंटीजन की कीमत 5000 तक वसूली शुरू कर दिया है। निजी अस्पताल, दवाव्यापारी और कुछ तथाकथित मेडिकल माफिया आपदा को अवसर में तब्दील कर 898 का इँजेक्शन 5400 में और चार दिन के ईलाज का बिल दो लाख थामना शुरु किया। आक्सीजन सिलेंडर की भी काला बाजारी शुरु हो गई है। निजी अस्पतालों में एक सिलेंडर का 20 हजार रुपये तक वसूला जा रहा है।
कोरोना में लगने वाला रेमडेक एंटीवायरल इंजेक्शन की सबसे ज्यादा डिमांड है। बाजार में कंपनियां इसे 898 रुपये में उपलब्ध कराने का दावा कर रही है। लेकिन निजी अस्पतालों में इसके लिए डोज का 5000 रुपये तक लिया जाने की बात जब सामने लाई गई तो मुख्यमंत्री ने कहा कि वे सरकारी अस्पतालों के जरिये से इसे अभी उपलब्ध करा रहे है। दवाओं, आक्सीजन सिलेंडर और इंजेक्शन आदि की कालाबाजारी नहीं होने दी जाएगी।



मुख्यमंत्री ने कहा कि वैक्सीनेशन, टेस्टिंग और मरीजों के इलाज के लिए बेहतर से बेहतर प्रबंध किए गए हैं। वेन्टीलेटर और ऑक्सीजन बेड की कमी नहीं है। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए फंड की कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों में कोविड-19 की टेस्टिंग और इलाज के लिए दरें तय करने की पहल की जाएगी। इसी तरह रेमडेसिवियर इंजेक्शन की दरें भी तय किए जाएंगे। शासकीय और निजी अस्पतालों में रेमडेसिवियर की 4500 डोज उपलब्ध है। राज्य सरकार का प्रयास है कि जरूरतमंदों को इस दवाई की डोज मिल सके। कोरोना जांच, इलाज तथा कोरोना टीकाकरण की सुविधा बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री जी से वैक्सीनेशन की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष निर्धारित करने का उन्होंने अनुरोध किया है। पहली बार छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाको में फैले कोरोना संक्रमण की स्थिति पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए टेस्टिंग बढ़ाई जाएगी। भूपेश बघेल ने कोरोना की टेस्ट रिपोर्ट मिलने पर होने वाले विलंब, बाहर से आने वाले लोगों को क्वारेंटिन करने, आक्सीजन की सप्लाई बढ़ाने जैसी अन्य सेवाओं के डॉक्टरों की सेवाएं कोरोना उपचार के लिए जानने की बात स्वीकार की।
इस बीच केन्द्र की चिंता सूची में शमिल छत्तीसगढ़ में पॉजिटीविटी दर माह मार्च 2021 में एक प्रतिशत थी, जो 7 अप्रैल को बढ़कर 24 प्रतिशत हो गई है। रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, महासमुन्द और बेमेतरा प्रदेश के सबसे ज्यादा पॉजिटिविटी दर वाले जिले हैं। छत्तीसगढ़ देश के कुछ गिने-चुने राज्यों में से है जहां प्रति दस लाख में सबसे ज्यादा लोगों की टेस्टिंग हो रही है।
अब एक बार ना चाहते हुए भी सरकार को मजबूरी में लॉकडाऊन का सहारा लेना पड़ रहा है। आगामी तीस दिनो तक कोरोना संक्रमण की स्थिति और खराब होने की सूचना है। यदि ऐसा ही रहा तो रोज कमाकर खाने वालों पर भारी गाज गिरेगी। कोरोना से ये बच भी जायें तो पता नहीं आगे क्या होगा।