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साहित्यिक मंच छत्तीसगढ़ का 7वां ऑनलाइन काव्यगोष्ठी संपन्न

साहित्यिक मंच छत्तीसगढ़ का 7वां ऑनलाइन काव्यगोष्ठी संपन्न

      सक्ती। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री रुद्रेश्वर प्रकाश श्रीवास  एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. हर्षदेव नापित  सम्मिलित हुए । कार्यक्रम की शुरुआत  नोमिता श्रीवास के सुमधुर 'सरस्वती वंदना' "माते वीणाधारणी माते" से की गई । मुख्य अतिथि श्री रुद्रेश्वर प्रकाश श्रीवास ने इस साहित्यिक मंच की सराहना करते हुए समाज को इस दिशा में साथ देने की बात कर आशीर्वाद प्रदान किये एवं कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथि डॉ. हर्षदेव नापित ने साहित्य को समाज का आईना बताया और सभी लेखकों पदाधिकारियों के इस कार्य की प्रशंसा की ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्रीरामरतन श्रीवास जी ने इस मंच में सबको जुड़ने का आव्हान किया और कहा कि यह मंच आप सभी का है और हम चाहते हैं कि समाज के लोग जागृत हों आगे आएं और साहित्य के इस मंच का तनमन धन से समर्थन करें ।

   कार्यक्रम का संचालन करते हुए मंच के महासचिव डॉ. हितेन्द्र श्रीवास ने बारी बारी से सभी कवियों को आमंत्रित किया जिसमें सर्वप्रथम संतोष श्रीवास ने अपनी "सुप्त निशा का प्रणय प्रहर" अलौकिक रचना का पाठ किया। आगे "राम जी के राजतिलक मैं करवावौ" बसंत श्रीवास जी ने छत्तीसगढ़ी गीत बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किये । 

  कार्यक्रम की आगे की कड़ी में चन्द्रकांत श्रीवास के द्वारा "हे मार्ग के पथिक" नामक प्रेरणादायक रचना की प्रस्तुति से हुयी , आगे क्रमशः "लक्ष्य को निश्चित करो" नोबेल श्रीवास,"आज मै तेरे साथ हूँ कल भी तेरे साथ" घनश्याम श्रीवास, "जो पास वो खास, जो खास वो पास" उमेश श्रीवास,"अनमोल हर सख्स इस जहां में" रामरतन श्रीवास(अध्यक्ष)"नित नए नवनीत तुम,प्रखर प्रेम का गीत तुम" रविशंकर श्रीवास (कोषाध्यक्ष) द्वारा गाकर सुनाया गया ।

   इसी कड़ी में बालदिवस पर बच्चों के भविष्य का चिंतन करते हुए "बच्चों का ख्याल रखना हमे सदा जरूरी"(घनाक्षरी) एवं "रे मानुष मत कर तू अभिमान" नामक गीत डॉ हितेन्द्र श्रीवास के द्वारा प्रस्तुत किया गया ।

इसके पश्चात  कार्यक्रम अध्यक्ष महोदय के आदेशानुसार संपन्नता की ओर अग्रसर हुआ और आगंतुक अतिथियों का रविशंकर श्रीवास एवं मंच के संस्थापक इंजि. रमाकांत श्रीवास ने आभार व धन्यवाद प्रदर्शित करते हुए कार्यक्रम की समाप्ति की ।