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कमलनाथ की भाजपा सरकार से नूरा कुश्ती के आने लगे परिणाम

कमलनाथ की भाजपा सरकार से नूरा कुश्ती के आने लगे परिणाम

भोपाल। हाल ही में सम्पन्न हुए चार दिवसीय विधानसभा सत्र के दौरान जो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने अपने कांग्रेसी विधायकों के साथ हंगामा करके उस सत्र में जनहितैषी और खासकर प्रदेश के ग्वालियर चंबल संभाग सहित अन्य जिलों में आई बाढ़ से पीडि़त मुद्दे पर बहस न कर केवल हंगामा मचाकर चार दिन के विधानसभा के सत्र को एक घण्टा कुछ मिनटों में ही खत्म करवा दिया, अब इसके परिणाम उन बाढ़ पीडि़तों को भुगतना पड़ रहे हैं जिनके पास अपना घरद्वार ही नहीं सिर्फ तन ढंकने के कपड़े ही बचे हैं हालांकि उन बाढ़ पीडि़तों को कहीं मण्डी के शेड में तो कहीं स्कूलों व धर्मशालाओं में आश्रय दिया था ऐसे पीडि़तों के साथ शिवपुरी जिला जो बाढ़ से अधिक पीडि़त है उस जिले की नरवर तहसील की तहसीलदार यह कहने लगी कि अब सरकार ने बहुत कुछ खिला दिया अब काम धंधा करो, यह शिवराज सरकार की कार्यशैली के कारण बिगड़ी नौकरशाही के बोल का एक नमूना मात्र है, इस तरह के अनेकों दास्ताएं मप्र में होती रहती हैं जिसके चलते बाढ़ के समय अधिकारी नाव में बैठकर मौज-मस्ती करते दिखे, ऐसे भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं तो वहीं शिवपुरी, श्योपुर व मुरैना में अनेक लोगों को सरकार के द्वारा अपनी पेट की आग बुझाने के लिए दो जून की रोटी भी सरकार उपलब्ध नहीं करा पा रही, ऐसी भी कई खबरें सुर्खियों में हैं, आज कांग्रेसी नेता पीसी शर्मा जैसे नेता जिनका प्रभाव अपने वार्ड में भी नहीं है और वह जीतते तो दूसरे वार्ड के मतदाताओं के भरोसे पर हैं, इस प्रकार के अलोकप्रिय नेता प्रेस कान्फ्रेंस से लेकर सरकार पर अपने नेता कमलनाथ की सरकार के साथ नूरा कुश्ती के आरोप से जनता को भ्रमित करने में लगे हुए हैं और सरकार पर यह आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा की सरकार अलोकतांत्रित रवैया अपनाते हुए तानाशाही की ओर बढ़ रही है तो वह पत्रकार वार्ता में यह भी आरोप लगाते हैं कि कोरोनाकाल में सरकार द्वारा कितना धन खर्च किया गया वह राशि कहां गई इसका हिसाब लेना चाहते थे, तो वहीं महंगाइ के मुद्दे पर सरकार को घेरने की मंशा थी, लेकिन वह या कोई भी कांग्रेसी नेता यह नहीं कह रहा है कि हाल ही में आई बाढ़ की समस्या पर कोई मुंह खोलने को तैयार नहीं है हालांकि कांग्रेेसियों के इस प्रकार के रवैये से उन बाढ़ पीडि़तों में असंतोष व्याप्त है जिनको सरकार के मुखिया शिवराज सिंह की घोषणावीर होने के चलते तमाम झूठे आश्वासन तो दिये जा रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है जिसे शासन के प्रभाव से न तो मीडिया उजागर कर पा रही है और न ही प्रदेश की जनता के जनहितैषी होने का ढिंढोरा पीटने वाले कमलनाथ व उनके कांग्रेसी विधायक हां, सुर्खियों में बने रहने के लिये वह ऊल-जलूल आरोप तो लगाते नजर आते हैं तो वहीं सरकार की ओर से भी कई नेता कांग्रेसी नेताओं को उनकी कार्यशैली के चलते घेरते नजर आते हैं लेकिन दोनों ही दल के नेता इस बात का खुलासा नहीं कर पा रहे हैं कि आज प्रदेश में चाहे महंगाई का मामला हो या कोरोना महामारी जैसे काल में सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किये जाने का मामला हो या फिर बाढ़ पीडि़तों का, इन सबको दरकिनार करने के लिये सरकार के साथ नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने सरकार के साथ नूरा कुश्ती का खेल खेलकर जनता को और खासकर उन बाढ़ पीडि़तों को राम भरोसे छोडऩे का काम किया सवाल यह है कि यदि विधानसभा के चार दिवसीय सत्र में यही कमलनाथ व उनके साथी कांग्रेसी नेता जनहित क ेसाथ-साथ बाढ़ पीडि़तों की चर्चा चार दिवसीय विधानसभा सदन में कोई चर्चा करते तो सरकार की ओर से जो जवाब आता वह सरकारी दस्तावेज होता और विधानसभा में की गई घोषणा के अनुसार सरकार को भले ही शिवराज सिंह की सरकार की कार्यशैली के चलते सरकारी योजनाओं के फर्जी आंकड़ों की जिस तरह से रंगोली सजाने का काम करने में सत्ताधीश और उनकी नौकरशाही माहिर है वही करती तो कम से कम कुछ न कुछ तो राहत बाढ़ पीडि़तों को मिलती, लेकिन कमलनाथ की नूरा कुश्ती के चलते उन बाढ़ पीडि़तों को राम भरोसे छोडऩे की जो कार्य किया गया उसके लेकर जनता में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं और लोग कमलनाथ की सरकार के साथ इस नूरा कुश्ती को लेकर तरह-तरह की चर्चायें चटकारे लेकर करते नजर आ रहे हैं?