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मध्यप्रदेश की जेलों के भीतर बंदी बखूबी निभा रहे जीवनरक्षक की भूमिका

मध्यप्रदेश की जेलों के भीतर बंदी बखूबी निभा रहे जीवनरक्षक की भूमिका

भोपाल। जेल में बंद कैदियों ने बाहरी दुनिया में भले ही कितने भी जुर्म किए हों, लेकिन मध्यप्रदेश की जेलों के भीतर वे जीवनरक्षक की भूमिका बखूबी निभा रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न जेलों के 105 बंदियों को भोपाल केंद्रीय जेल में निजी अस्पताल के सहयोग से नर्सिंग का प्रशिक्षण दिया गया है। ये अब जेलों में पदस्थ चिकित्सकों के साथ पैरामेउिकल स्टाफ की तरह काम कर रहे हैं।

मध्यपदेश की 130 जेल और 11 केंद्रीय जेलों में करीब 45000 बंदी हैं। इनके इलाज के लिए डॉक्टरों केक 70 स्वीकृत पद हैं, लेकिन 12 पर ही नियुक्ति है। इनके अलावा हाल ही में संविदा पर 22 डॉक्टरों को तैनात किया गया है। नर्सिंग स्टाफ भी काफी कम है। ऐसे में बंदियों को समय पर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध हो सके, इसलिए कैदियों को ही पैरामेडिकल स्टाफ के रूप में प्रशिक्षित करने का काम शुरू किया गया। वर्ष 2018 से यह काम जारी है और विभिन्न सत्रों मेें अब तक दो महिलाओं और 103 पुरुष बंदियों को तीन-तीन माह का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

बंदियों में सुधार प्रक्रिया के तहत यह काम शुरू किया गया था। हालांकि, इसमें ऐसे कैदियों का चयन किया जाता है, जो शिक्षित हों। विज्ञान विषय से पढ़ाई करने वालों को प्राथमिकता दी जाती है। चारसितम्बर से तीन अक्टूबर 2020 तक 15 ऐसे जेल प्रहरियों को भी प्रशिक्षण दिया गया, जो फार्मेसी में स्नातक थे। ये प्रदेश की विभिन्न जेलों में अब पैरामेडिकल स्टाफ के तौर पर कार्य कर रहे हैं।

इसके अलवा 27 अक्टूबर से 31 दिसम्बर 2020 तक जेलों में पदस्थ 47 फार्मासिस्ट की कार्यकुशलता में वृद्धि के लिए प्रशिक्षण दिया गया। नर्सिंग के काम क ेएिल प्रशिक्षण लेकर जेल लौटने वाले बंदी अन्य साथियों के लिए प्रेरणा देने वाले साबित होते हैं। उन्हें पैरामेडिकल स्टाफ के तौर पर काम करता देख दूसरे लोग भी दक्षता हासिल करने वाले कार्यों में रुचि लेते हैं। उन्हें यह समझ आता है कि यहां से काम में पारंगत होने के बाद वे समाज में अपने परिवार के लिए सम्मानजनक रोजगार पा सकेंगे।