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खुलासा : निजी अस्पतालों में ईलाज के नाम पर लूट...800 का एंटीडोज का वसूला जा रहा 5400 रूपए.. आक्सीजन का सिलेण्डर 20000 में.. अस्पतालों की लूट पर स्वास्थ्य विभाग ने मुंह सिले..भाजपा ने आड़े हाथ लिया सरकार को!

खुलासा : निजी अस्पतालों में ईलाज के नाम पर लूट...800 का एंटीडोज का वसूला जा रहा 5400 रूपए.. आक्सीजन का सिलेण्डर 20000 में.. अस्पतालों की लूट पर स्वास्थ्य विभाग ने मुंह सिले..भाजपा ने आड़े हाथ लिया सरकार को!

जनधारा संवाददाता

रायपुर. कोरोना महामारी का दूसरा रूप सुनामी की तरह जिंदगियों को लील रहा है नतीजन मरीजों की तादाद कई गुना बढ़ती जा रही है, वहीं दूसरी ओर अस्पतालों में बिस्तर और आक्सीजन तक नसीब नही हो पा रहा है. एम्स से लेकर सरकारी अस्पताल पूरी तरह भर गए हैं. थक—हारकर आदमी प्राइवेट अस्पतालों की ओर रूख करता है तो मालूम चलता है कि वहां भी जगह नही है. किस्मत से कहीं बेड' मिल भी गया तो इलाज इतना महंगा है कि मरीज बिल देखकर ही 'मरे' जा रहा है! निजी अस्पतालों में चार दिन के इलाज का खर्च ही 2 से तीन लाख रूपये तक जा रहा है!

आश्चर्य कि निजी कंपनियों ने जनहित में दवाईयों के होलसेल रेट जारी करते हुए आमजनों को लुटने से आगाह किया है जबकि सरकार है कि आक्सीजन के सिलेण्डर की कालाबाजारी और निजी अस्पतालों की लूट पर मौन साधे बैठी है. क्या मंत्री, क्या विधायक, क्या नौकरशाह..सभी इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि जब शिकायत होगी तब देखेंगे. राज्य का स्वास्थ्य विभाग कान में रूई डाले चुपचाप सब कुछ होता देख रहा है. उसका तर्क है कि जब शिकायत होगी तब कार्रवाई करेंगे. निजी अस्पतालों में सिर्फ लूट मची है और सेवा नाम की भावना खत्म हो गई है. साधारण दवाई का भी दस गुना ज्यादा रेट वसूला जा रहा है.

मंत्रियों की सिफारिश पर बेड मिल जाए, काफी है!

स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव और अन्य मंत्री, विधायकों की सिफारिश भी काम नही आ रही. जो लोग उनकी सिफारिश से एडमिट हो रहे हैं, वे इसी बात का शुक्र मना रहे हैं कि कम से कम बेड तो मिल गया जबकि इसके उलट उन्हें अस्पतालों द्वारा लम्बा—चौड़ा बिल थमाया जा रहा है और वे कुछ नही कह पा रहे.

आक्सीजन सिलेण्डर 20 हजार का एक, एक एंटीडोज की कीमत 5000 तक वसूल रहे निजी अस्पताल

दवा व्यापारी और कुछ तथाकथित मेडिकल माफिया आपदा को अवसर बना रहे हैं. 899 रू का इंजेक्शन 5400 में, और चार दिन के ईलाज का बिल दो लाख थमाया जा रहा है. आक्सिजन सिलेण्डर की भी कालाबाजारी शुरू हो गई है. बाजार से तो गायब हो गए हैं जबकि निजी अस्पतालों में एक सिलेण्डर का 20 हजार रूपये तक वसूला जा रहा है. जबकि इसकी कीमत बाजार में 4400 रूपये तक है. हाल यह हैं कि यदि मरीज को सांस लेने में समस्या हो रही है तो उसे रोज 4 से 5 सिलेण्डर आक्सीजन के लग रहे हैं. समझा जा सकता है कि उसे दिन में भी कितना खर्च आ रहा होगा.

निजी अस्पताल कोरोना' को दुहने में लगे हैं!

एक तरफ निजी अस्पताल आपदा में अवसर देख रहे हैं तो दूसरी ओर बाजार में दवाईयां और शेष उपकरणों की कालाबाजारी प्रारंभ हो गई हैं. कोरोना से जुड़ी दवाईयां या तो मिल नही रही हैं या फिर उसके उंचे दाम वसूले जा रहे हैं. इसी तरह इंजेक्शन के दाम भी दस गुना तक बढ़ा दिए गए हैं. रेमडेक एंटीवायरल इंजेक्शन की सबसे ज्यादा डिमाण्ड है. बाजार में कंपनियां इसे 899 रूपये में उपलब्ध कराने का दावा कर रही हैं लेकिन निजी अस्पतालों में इसके एक डोज का 5000 रूपये तक लिया जा रहा है. मरीज को इलाज कराना मजबूरी है इसलिए इस लूट के आगे नतमस्तक है.


समय रहते इंतजाम क्यों नही किए सरकार ने!

बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार को मालूम था कि कोरोना का सेकण्ड स्टेज घातक रूप से हमला कर सकता है तो क्या आखिर क्या तैयारियां की गईं. सरकार को चाहिए था कि कम से कम आक्सीजन सिलेण्डर के इंतजाम व्यापक रूप से किए जाने चाहिए थे ताकि कालाबाजारी को रोका जा सके. इसके अलावा यदि कोई महिला गर्भवती है और उसका आपरेशन होना है तो इसके लिए एक लाख रूपये तक मांगा जा रहा है. इंजेक्शन, दवाईयां, सलाह की फीस इत्यादि में भी कई गुना चार्ज लगाए जा रहे हैं.

कंपनियों ने निभाई जिम्मेदारी..सरकार को शिकायत का इंतजार

कोरोना की दवाईयां बनाने वाली कंपनी केडिला' ने जनहित में एक सूची जारी करते बताया है कि वे बाजार में किस दर पर दवाई दे रहे हैं और निजी अस्पतालों में इसके कितने दाम वसूले जा रहे हैं. यानि होलसेल रेट और एमआरपी रेट में बड़ा फर्क है. सूची के मुताबिक सिप्ला लिमिटेड का एंटी डोज होलसेल 880 रूपये है लेकिन इसका एमआरपी 4000 रूपये तक है. हैट्रो हेल्थकेयर का होलसेल 850 रूपये है जबकि एमआरपी 5400 रूपये तक जा रहा है. जुब्लियेंट लाइफसाइंसेस के इंजेक्शन का रेट 1000 रूपये है जबकि एमआरपी 5000 रूपये तक लिया जा रहा है. इलिया लेबोर्टिज का होलसेल रेट 1000 रूपये है जबकि इसके भी 4000 तक एमआरपी लिया जा रहा है. डॉ. रेडडीज का होलसेल रेट 825 रूपये है लेकिन अस्पतालों में इसके 5400 रूपये लिए जा रहे हैं. जायडस केडिला का होलसेल 720 रूपये है लेकिन इसके 1000 रूपये तक एमआरपी लिया जा रहा है.


निजी अस्पतालों से भेजा जा रहा है कमीशन : गौरी शंकर श्रीवास

भाजपा नेता और मीडिया पेनलिस्ट गौरी शंकर श्रीवास ने जनधारा' से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार की गाइडलाइन का कोई पालन निजी अस्पताल नही कर रहे. पिछली बार लूट मची थी और इस बार भी वही हाल है. आम आदमी परेशान है. कोई भी मानिटरिंग सरकार की तरफ से नही हो रही. सिर्फ गाइडलाइन जारी है कि इतनी फीस लेना है लेकिन इससे कई गुना ज्यादा का बिल पकड़ाया जा रहा है तो उसे कौन देखेगा! सरकार को चाहिए कि वह एक कमेटी बनाए और टोल फ्री नम्बर भी जारी करे. आशंका है कि निजी अस्पतालों से सरकार को मोटा कमीशन मिल रहा है इसलिए वह आंखें मूंदे बैठी है.

लोग सवाल उठा रहे हैं कि पिछली बार तरह इस बार भी राज्य सरकार को प्रदेश के सभी प्राइवेट हास्पीटल व नर्सिंग होम को अपने कब्जे में ले लेना चाहिए ताकि वह अपने स्तर से अब इन अस्पतालों का संचालन करे. देखते हैं कि स्वास्थ्य विभाग वक्त पर जागता है या नही!