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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कमल से- सही रणनीति, सही निर्णय से संभली छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कमल से- सही रणनीति, सही निर्णय से संभली छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था


जब पूरा देश बेरोजगारी, आर्थिक तंगी और पलायन से जूझ रहा था तब छत्तीसगढ़ राज्य ने कोरोना संक्रमण से उपजी स्थितियों से निपटते हुए ग्रामीण क्षेत्र में जहां एक ओर धान खरीदी के माध्यम से किसानों को नगद भुगतान किया, वहीं दूसरी ओर मनरेगा जैसी योजना का बेहतर क्रियान्वयन कर छत्तीसगढ़ के मजदूरों को उनके घर के नजदीक काम देकर केश फ्लो को बनाये रखा। छत्तीसगढ़ ने कोरोना संक्रमण के दौरान प्रारंभिक तीन माह में साल भर के मनरेगा लक्ष्य का 70 प्रतिशत मानव दिवसों का सृजन कर एक दिन में 16 लाख अधिकतम मजदूरों को काम देने का जो रिकार्ड था उसके विरुद्घ 26 लाख मजदूरों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। छत्तीसगढ़ में अपनाई गई सही रणनीति और निर्णय के फलस्वरुप छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी की दर देश में आज सबसे कम 1.2 प्रतिशत रह गई है।

सेंटर ऑफ मानिटरिंग इंडियन इकानामी की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी की दर जहां 6.8 प्रतिशत है वहीं छत्तीसगढ़ में यह दर 1.2 प्रतिशत है। कोरोना संक्रमण के दौरान लागू तालाबंदी के कारण शहरी क्षेत्रों में जहां कल-कारखाने, उद्योग-धंधे और शहरी मजदूरी के अवसर बंद थे वहीं शासन के नियमित रोजगार देने वाले लोक निर्माण, जल संसाधन, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग मजदूरों को काम नहीं दे रहे थे। मजदूरों के पास मनरेगा का ही सहारा था। छत्तीसगढ़ की सरकार ने प्रवासी मजदूरों को दिक्कत और रोजगार की उपलब्धता को देखते हुए मनरेगा के जरिये रोजगार के अवसर सृजित किये। इसके कारण यहां आये करीब 4 लाख मजदूरों को काम मिला। देश का सर्वाधिक 24 प्रतिशत मजदूरी छत्तीसगढ़ में मनरेगा के काम में लगा है। छत्तीसगढ़ की 10971 पंचायतों में से 9883 ग्राम पंचायतों के 18,57,536 मजदूरों द्वारा मनरेगा में काम दिया गया।
कोरोना वारयरस संक्रमण के प्रारंभ के समय देश में प्रथम लॉकडाउन 24 मार्च को लागू हुआ। ऐसे समय में जब सभी तरह की गतिविधियां रूक गई तब 01 अप्रैल को छत्तीसगढ़ में महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत कुल 43027 श्रमिक कार्यरत थे। बढ़ते संक्रमण और लोगों की काम की जरूरत को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर बड़ी संख्या में कार्यों की स्वीकृतियां जारी करते हुए पूर्व बकाया मजदूरी सहित मजदूरी एवं सामग्री मद में 800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की गई। इससे ग्रामीणों ने सरकारी योजनाओं के कामों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। ऐसे परिवार जो रोजी-रोटी के लिये शहरों या अन्य राज्यों में चले जाते थे, उनके द्वारा योजनान्तर्गत कार्य करने की इच्छा के अनुरूप नये जॉब कार्ड बनाये गये। यह भी सुनिश्चित किया गया कि काम की मांग करने वाले हर श्रमिक को योजनांतर्गत कार्य प्रदाय किया जाए। छत्तीसगढ़ में द्वितीय लॉकडाउन के प्रारंभ में 15 अप्रैल 2020 को जहां मनरेगा के अंतर्गत लगभग 4 लाख श्रमिक कार्यरत थे, वहीं प्रत्येक सप्ताह कार्य करने वाले श्रमिक बढ़ते गए और अप्रैल अंत तक 20 लाख श्रमिक प्रतिदिन तथा 15 मई तक 25 लाख श्रमिकों को प्रतिदिन रोजगार प्राप्त हो रहा था।

छत्तीसगढ़ में मनरेगा से अभिसरण के कार्यों के अंतर्गत धान संग्रहण, चबूतरों का निर्माण, ग्राम पंचायत भवन निर्माण, शेड निर्माण, कृषि विभाग के केवीके, पशुपालन, मछलीपालन, चारागाह विकास, व्यक्तिगत मूलक कार्य, मुर्गीपालन, बकरी पालन, सूकर पालन हेतु अभिसरण के कार्य किये गए। राज्य पोषित बाड़ी योजना के साथ ही साथ रेशम विभाग की सीपीटी/ग्रीन फेंसिंग, वन विभाग की नर्सरी/वृक्षारोपण योजना के कार्यों के जरिये लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया।

छत्तीसगढ़ का अधिकांश हिस्सा ग्रामीण और कृषि बाहुल्य है जहां पर लोग खेतीबाड़ी और मजदूरी पर आश्रित हैं। ग्रामीण आबादी की आजीविका का मुख्य साधन, कृषि, वनोपज तथा उसके प्रसंस्करण और विपणन के ईर्द-गिर्द रहा है। इतना ही नहीं शहरी क्षेत्रों में जो लोग रोजगार पाने पलायन किये हैं उनका भी आर्थिक ढांचा उनके गांव-घर में उत्पादित होने वाले कृषि एवं वनोपज पर आधारित है। सरकार ने खेती को लाभकारी व्यवस्था बनाने के लिए नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी जैसी महत्वपूर्ण योजना लाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने की ईमानदारी कोशिश की है। गोधन न्याय योजना के जरिये ग्रामीणों से दो रुपए किलो की दर पर गोबर खरीदी की जा रही है। ट्राइफेड के जरिये बड़े पैमाने पर लघु वनोपज की खरीद की गई है। छत्तीसगढ़ के लोगों की सीमित जरूरतें और सरकार द्वारा उठाये गये आर्थिक स्वावलंबन के सही कदमों की वजह से छत्तीसगढ़ आज देश के आर्थिक रूप से स्वावलंबी राज्यों और कम बेरोजगारी वाले राज्यों में शुमार हुआ है।

राज्य सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों और फैसलों से छत्तीसगढ़ में उद्योगों सहित कृषि क्षेत्र में गतिविधियां तेजी से संचालित हो रही हैं। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ में रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं और बेरोजगारी की दर में कमी दर्ज की जा रही है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि छत्तीसगढ़ की उपलब्धि के पीछे जनता के सहयोग और निचले स्तर के अधिकारियों की मेहनत रही है। दूसरे प्रदेशों से लौटकर यहां 7 लाख लोग आए। वहीं यहां से वापस जाने वाले सिर्फ 26 हजार लोग है। सबने मिलकर लगातार काम किया। उद्योगपतियों ने सहयोग किया। स्टील का उत्पादन यहां सबसे पहले शुरू हुआ। आज स्टील की आपूर्ति सबसे ज्यादा छत्तीसगढ़ से हो रही है।
सीएमआईई के अनुसार, छत्तीसगढ़ की बेरोजगारी दर सितंबर 2018 में 22.2 प्रतिशत थी, जो घट कर अप्रैल 2020 में 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई है।
छत्तीसगढ़ में अप्रैल 2020 के अंतिम सप्ताह से ही औद्योगिक गतिविधियां प्रारंभ हो गई थी। वर्तमान में लगभग शत-प्रतिशत उद्योगों में कोरोना से रोकथाम और बचाव के साथ काम शुरू हो गया है। अच्छी बारिश से राज्य में कृषि की गतिविधियों में तेजी आई है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना सहित किसान हितैषी योजनाओं और जनकल्याणकारी फैसलों से उत्साहजनक वातावरण बना है। अनलॉक होते ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था ने गति पकड़ी, जिसकी वजह से छत्तीसगढ़ में जीएसटी कलेक्शन बढ़ा, ऑटोमोबाइल, कृषि सहित अन्य क्षेत्रों में तेजी आई हैै।

कृषि और इससे जुड़ी गतिविधियों पर भी फोकस कर फसल बीमा और प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत लॉकडाउन अवधि में 900 करोड़ रुपए की राशि किसान खातों में ट्रांसफर के साथ, खेती-किसानी के लिए आवश्यक छूट और सबसे बड़ा यह कि उनके उत्पादों के विक्रय की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई। लघु वनोपज के संग्रहण, खरीदी, बिक्री को जारी रखने के आदेश के कारण वनांचलों में आर्थिक संकट नहीं रहा। महुआ फूल का समर्थन मूल्य 18 रुपए प्रति से बढ़ाकर 30 रुपए किया गया, वहीं 25 लघु वनोपजों के समर्थन मूल्य पर नगद खरीदी कर इनके संग्रहण कार्य में लगे सभी वनवासियों को रोजगार दिया गया। गोधन न्याय योजना के तहत प्रदेश के 83 हजार 809 गोपालकों और गोबर विक्रेताओं को चौथी किश्त के रूप में आठ करोड़ दो लाख रुपये का ऑनलाईन भुगतान किया। यह राशि सीधे संबंधितों के खातों में एक से 15 सितंबर तक राज्य के 3,122 गोठानों से खरीदी गई। चार लाख एक हजार 475 क्विंटल गोबर की खरीदी के एवज में दी गई है। गोधन योजना के तहत अब तक कुल 20 करोड़ 72 लाख रुपए का भुगतान किया जा चुका है। कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण के प्रारंभ से लेकर अब तक इस तरह से रोजगार मूलक योजनाएं संचालित की गई, जिनकी वजह से छत्तीसगढ़ में आर्थिक प्रवाह बना रहा। इसका असर पूरे छत्तीसगढ़ के उद्योग-धंधों, बाजार और रोजमर्रा की खरीद-फरोख्त में देखा जा सकता है।