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विश्व अस्थमा दिवस पर अस्थमा की रोकथाम के लिए अस्पतालों में होंगे जागरुकता कार्यक्रम

विश्व अस्थमा दिवस पर अस्थमा की रोकथाम के लिए अस्पतालों में होंगे जागरुकता कार्यक्रम

राजनांदगांव। फेफड़ों से जुड़ी पुरानी व एक गंभीर बीमारी अस्थमा की रोकथाम तथा इस विषय में जन-जागरुकता के लिए जिले के अस्पतालों में विविध आयोजन किए जाएंगे। इस अवसर पर अस्थमा के कारण, लक्षण तथा इससे बचाव संबंधी उपायों का विभिन्न माध्यमों से प्रचार-प्रसार किया जाएगा। साथ ही बताया जाएगा कि अस्थमा को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता लेकिन लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है जिससे दमा से पीड़ित को पूर्ण जीवन जीने में सक्षम किया जा सके।

अस्थमा इन दिनों एक आम बीमारी बन गई है। इससे ग्रसित लोगों को सांस लेने में तकलीफ के साथ सीने में घरघराहट, जकड़न और खांसी की समस्या होती है। कोरोना वायरस संक्रमण की परिस्थितियों में सबसे ज्यादा संख्या में अस्थमा से ग्रसित लोगों को ही ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी थी तथा अस्थमा पीड़ितों को ही सबसे ज्यादा अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ी थी। अस्थमा पर नियंत्रण तथा इस विषय में जन-जागरुकता लाने के लिए ही विश्व भर में इस साल 3 मई का दिन अस्थमा दिवस के रूप में मनाया जाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हर साल मई के पहले मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस के रूप में तय किया है। 

इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी ने बतायाः अस्थमा पीड़ित की सांस की नली में सूजन आ जाती है जिसकी वजह से पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होती है। धीरे-धीरे काम करने की क्षमता कम होने लगती है। ऐसे में जानकारी का अभाव या समय पर इलाज नहीं होना भी इस बीमारी के बढ़ने तथा गंभीर रूप ले लेने का कारण बन सकता है। तीन मई को विश्व अस्थमा दिवस के अवसर पर अस्पतालों में जनजागरुकता हेतु विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

बच्चे भी हो रहे अस्थमा से पीड़ित

बच्चों में अस्थमा के लक्षण प्रतीत होने तक यह बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है। ऐसे में बच्चों को लगातार खांसी हो, रात में यह खांसी बढ़ जाए, सांस लेते वक्त बच्चों की नाक से सीटी की आवाज आने लगे, छाती में अकड़न हो, बच्चा जल्दी थक जाता हो या वह कमजोरी महसूस करता हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि बच्चों में ऐसी स्थिति में अस्थमा की संभावना बढ़ जाती है। ज्यादातर बच्चों में 5 साल के होते-होते ये लक्षण नजर आने लगते हैं। इस बीमारी से ग्रसित होने की बड़ी वजह एलर्जी भी है। 


वायु प्रदुषण है इस बीमारी की बड़ी वजह

बदलते पर्यावरण और तेजी से फैल रहे प्रदूषण की वजह से अस्थमा पीड़ितों की संख्या में औसतन लगातार वृद्धि हो रही है। धूप और हवाएं नम होने की वजह से सर्दियों में यह बीमारी तेजी से बढ़ने लगती है। वायु प्रदूषण भी इसका बड़ा कारण माना है क्योंकि दूषित वायु में मौजूद छोटे-छोटे कण नाक और मुंह के जरिये फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। वहीं धुआं, धुंध और हवा में धूल के कण काफी हानिकारण होते हैं जो अस्थमा के मरीजों पर खतरनाक प्रभाव डालते हैं।

अस्थमा के मरीजों ऐसे मिल सकती है राहत 

० अस्थमा के मरीज को सही समय पर अपना इलाज कराना चाहिए।

० समय-समय पर डॉक्टर से परामर्श लेते रहना चाहिए।

० पीड़ित को रिलीवर इन्हेलर हमेशा साथ रखना चाहिए।

० प्रदूषित जगहों पर जाने से बचना चाहिए।

० भीड़ वाले इलाके में जाने से बचना चाहिए।

० पीड़ित को पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए।

० मास्क का प्रयोग करते रहना चाहिए और धूल से बचकर रहना चाहिए।