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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -इंस्पेक्टर मातादीन सरस्वती नगर थाने में

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से  -इंस्पेक्टर मातादीन सरस्वती नगर थाने में

-सुभाष मिश्र

सुप्रसिद्घ व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की कालजयी रचना है इंस्पेक्टर मातादीन चांद पर। यह व्यंग्य रचना आज से पचास साल पहले लिखी गई थी। हमारा पुलिसिया सिस्टम किस तरह काम करता है, यह रचना उसका एक तरह का रोजनामचा है। परसाई कबीर से प्रभावित थे इसलिए उन्होंने सुनो भई साधो नाम से कालम भी लिखे। अन्याय, अत्याचार और धार्मिक आडम्बरों का विरोध करने के कारण कुछ लोगों ने परसाई जी पर भी हमला किया। उनकी टांग तोड़ दी। उन्होंने हार नहीं मानी और विकलांग श्रद्घा का दौर जैसी रचना लिखी। संत कबीर हर उस आदमी को प्रभावित करते हैं जिनकी सोच जनवादी है। हमारे रंगकर्मी मित्र मिर्जा मसूद हों या साहित्यकार मित्र हरिओम राजौरिया या रमेश अनुपम इन्होंने अपने बेटे का नाम कबीर रखा। कबीर नाम से एक ऐेसे व्यक्ति की छबि सामने आती है जो अन्याय, अत्याचार के विरुद्घ लामबंद होता है। कालेज के प्राध्यापक रहे रमेश अनुपम के पढ़े-लिखे संस्कारी पुत्र ने अपने कबीर नाम के अनुरुप रायपुर के अनुपम गार्डन के पास एक फल वाले को पुलिस से बेवजह प्रताडि़त होते देखा। अपने पिता से अन्याय, अत्याचार के विरुद्घ जनवादी ताकतों के संघर्ष की गाथा सुनने वाले कबीर ने मौके पर इसका प्रतिरोध किया। कबीर को लगा होगा परसाई के मातादीन का चरित्र इतने साल बाद शायद बदल गया होगा। हमारे देश में पिछले पचास सालों में पुलिस सुधार के लिए बहुत से काम हुए हैं। पुलिस मित्र योजना बनाई गई है। सोशल मीडिया आने के बाद पुलिस ज्यादती के वीडियो वायरल होने पर संबंधितों के खिलाफ कार्यवाही भी हुई। अभी कुछ महीने पहले ही छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उरला थाना क्षेत्र के बीरगांव इलाके में एक पुलिस अधिकारी द्वारा एक लड़के को जो अपनी मां के साथ जा रहा था, लॉकडाउन के उल्लंघन पर डंडे मारते हुए वीडियो देखा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस कृत्य को अमानवीय करार दिया और संबंधित अधिकारी को छुट्टी पर भेजकर जांच के आदेश दिए। पता नहीं उस अधिकारी के खिलाफ क्या कार्यवाही हुई? ब्रेकिंग न्यूज के चक्कर में लगे मीडिया को इस बात की कतई परवाह नहीं होती कि पहले जो कुछ घटा था, उसमें क्या हुआ। हमारे यहां सरकारी योजना हो या कार्यवाही फॉलोअप की प्रथा धीरे-धीरे खत्म सी हो रही है। अब तो मीडिया स्वयं अदालत, पुलिस सब कुछ बनकर तत्काल सजा देने पर आमादा है। लाईन अटैच, निलंबन और तबादला, मजिस्ट्रियल जांच ये सब कार्यवाही होती है, जो जन दबाव को कम करने की जाती है। कालांतर में उनके नतीजे सिफर ही निकलते हैं। सरकारी क्षेत्र में बढ़ती अराजकता, गुंडागर्दी ऐसी ही दिखावटी कार्यवाही का नतीजा है।
बहरहाल रायपुर के सरस्वती नगर थाने में पदस्थ एक इंस्पेक्टर और पुलिस कर्मचारियों ने कबीर को उसके द्वारा किये गये प्रतिरोध की सजा अपने तरीके से दी। उसे पुलिस जीप में पटककर थाने ले जाया गया। मारा-पीटा गया, उसके मुंह में जबरन शराब डाली गई, कुछ गांजे के पैकेट साथ रखकर पुख्ता प्रकरण बनाया गया। मोबाइल पर पिता द्वारा सुने गए वाक्य पापा-पापा और पटको साले को गाड़ी में... के आधार पर रमेश अनुपम बेटे को ढूंढने निकले। सबसे पहले नजदीक के थाने सरस्वती नगर गये, जहां बेटे की बेदम पिटाई हो रही थी। प्रतिकार करने पर रमेश अनुपम और उनके साथ पत्रकार के साथ बदतमीजी हुई, धक्का-मुक्की हुई। कबीर अब शायद ही किसी पिटते हुए व्यक्ति को बचाने की शायद ही सोचेगा। हमारे देश में पुलिस के लफड़े में कोई नहीं पडऩा चाहता। हरिशंकर पर साई की रचना इंस्पेक्टर मातादीन चांद पर का वाक्यांश है-

''आपके मातादीन ने हमारी पुलिस को जैसा कर दिया है, उसके नतीजे ये हुए हैं: कोई आदमी किसी मरते हुए आदमी के पास नहीं जाता, इस डर से कि वह कत्ल के मामले में फंसा दिया जाएगा। बेटा बीमार बाप की सेवा नहीं करता। वह डरता है, बाप मर गया तो उस पर कहीं हत्या का आरोप नहीं लगा दिया जाए। घर जलते रहते हैं और कोई बुझाने नहीं जाता-डरता है कि कहीं उसपर आग लगाने का जुर्म कायम न कर दिया जाए। बच्चे नदी में डूबते रहते हैं और कोई उन्हें नहीं बचाता, इस डर से कि उस पर बच्चों को डुबाने का आरोप न लग जाए। सारे मानवीय संबंध समाप्त हो रहे हैं। मातादीनजी ने हमारी आधी संस्कृति नष्ट कर दी है। अगर वे यहाँ रहे तो पूरी संस्कृति नष्ट कर देंगे। उन्हें फौरन रामराज में बुला लिया जाए।

बकौल रमेश अनुपम मेरा बेटा अक्षज (कबीर) अनुपम उम्र 28 वर्ष कल (30 जून) को रात में अपना कैमरा ठीक करवाकर घर लौट रहा था। रास्ते में करीब 8:15 बजे अनुपम गार्डन के सामने उसने देखा कि कुछ पुलिस वाले एक फल वाले की पिटाई इसलिए कर रहे थे कि वह कोरोना गाइड लाइन का पालन न करते हुए अपने ठेले पर फल बेच रहा था। मेरे बेटे ने रुककर पुलिस वालों से कहा कि उन्हें इस तरह नहीं पीटना चाहिए। इतने में सरस्वती नगर थाने का थानेदार गौतम गेडाम जीप से नीचे उतरकर पुलिस वालों से कहा इस साले को जीप में पटककर थाने ले चलो। बेटे का मोबाइल रास्ते में पुलिस वालों ने छीन लिया मुझसे बात भी करने नहीं दिया, न पुलिस ने बतौर गार्जियन मुझे सूचित किया। मुझे जैसे-तैसे खबर लगी और मैं भागते हुए दिल्ली मीडिया से जुड़ी हुई जीतेश्वरी के साथ सरस्वती नगर थाने पहुंचा। पुलिसवाले तब भी उसे मार रहे थे। मैंने कारण पूछा तो मुझसे भी बदतमीजी की, यहां तक की धक्का-मुक्की भी और साथ ही जीतेश्वरी से भी बदतजीमी की और उसका फोन छीनने की कोशिश भी की। जबरदस्ती केस बनाने के लिए मेरे बेटे के मुंह को खोल कर शराब पिलाने की कोशिश की। थाने लाकर पहले बीस पैकेट गांजा रखने फिर चार पैकेट गांजा रखने की झूठी बात मुझे बताई। मेरा बेटा दिल्ली यूनिवर्सिटी से बी.ए. ऑनर्स इंग्लिश है, वही से उसने सिनेमा में पी.जी किया। वहीं जॉब भी कर रहा था। कोरोना के कारण मैंने उसे अपने पास रायपुर बुला लिया। मैं हमेशा छत्तीसगढ़ की पुलिस की प्रशंसा करता रहा हूं। पर इस पुलिस की बर्बरता से मैं बेहद आहत हुआ हूं।

25 मई 2020 को, अमेरिका के मिनेसोटा के मिनियापोलिस में जॉर्ज फ्लॉयड नाम के एक 46 वर्षीय अश्वेत व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद पूरे अमेरिका में पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन हुए। अमेरिकी सरकार को संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करनी पड़ी। वो चाहे अप्रैल 2021 में इंदौर के परदेशीपुरा थाना क्षेत्र की एक व्यस्त सड़क पर दो पुलिसकर्मियों ने दिनदहाड़े एक रिक्शा चालक की बेरहमी से पिटाई का मामला हो या फिर 19 जून 2020 को जयराज और उनके बेटे बेनिक्स नाम के दो लोगों को तमिलनाडु पुलिस द्वारा जांच के लिए थूथुकुडी जिले के सथनकुलम में कथित तौर पर कोविड-19 लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करने के लिए उठाने का मामला। कुछ दिनों बाद जयराज और उनके बेटे बेनिक्स की तमिलनाडु के थूथुकुडी में हिरासत में मौत हो गई। नेशनल कैंपेन अगेंस्ट टॉर्चर रिपोर्ट के अनुसार, भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने वर्ष 2020 में हिरासत में हुई मौतों के 1680 मामले दर्ज किए। इनमें से 1569 मौतें न्यायिक हिरासत में हुईं और 111 मौतें पुलिस हिरासत में हुईं है।

पुलिस कर्मियों द्वारा गंभीर कदाचार के आरोपों की जांच करने की दृष्टि से जिला एवं राज्य स्तर पर पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन किया गया है। पुलिस द्वारा समय-समय पर बहुत से अभियान चलाकर जनता के साथ ऐसे संबंध स्थापित करने की कोशिश होती है जिससे शांति व्यवस्था बनी रहे। लोगों के बीच आपसी सौहाद्र्र कायम रहे। पुलिस की बर्बरता से आहत रमेश अनुपम और उन जैसे लाखों-लाख लोग शायद नहीं जानते हैं कि अभी भी हमारी समूची शासन व्यवस्था में बहुत से मातादीन हैं, जो कानून अपने हाथ में लेकर रामराज्य स्थापित करना चाहते हैं। वे हनुमान जी की तरह मौके पर ही अपनी पूंछ में आग लगाकर लंका जला डालना चाहते हैं। गनीमत है कि अभी हमारे देश में पूरी तरह से रामराज्य नहीं आया है।
समरथ को नहीं दोष गुसाईं ,
रवि पावक सुरसरि की नाई।।