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यूपी में गैरकानूनी धर्मांतरण कानून का शिकंजा

यूपी में गैरकानूनी धर्मांतरण कानून का शिकंजा

समीरात्मज मिश्र 

कथित लव जिहाद को रोकने के लिए लाए गए अध्यादेश के बाद से यूपी में कई मामले दर्ज हुए हैं. दो दिन पहले एटा जिले में भी इस तरह का केस दर्ज हुआ और अब तक पुलिस इस मामले में अभियुक्त बनाए गए युवक से संबंध रखने वाले 14 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. हालांकि अभी युवक पुलिस की पकड़ में नहीं आ सका है. युवक पर आरोप है कि उसने एक लड़की को अगवा किया, फिर जबरन उसका धर्म परिवर्तन कराकर उसे निकाह किया.

हालांकि पुलिस ने गुरुवार को उस लड़की को भी दिल्ली से बरामद कर लिया जिसे अगवा करने का उस युवक पर आरोप है. अभी तक युवती ने अपनी ओर से ऐसी कोई शिकायत नहीं की है. पुलिस का कहना है कि लड़की को पुलिस अभिरक्षा में एटा के महिला थाने में रखा गया है. मेडिकल जांच के बाद अदालत में उसके बयान दर्ज किए जाएंगे.

एटा के जलेसर क्षेत्र में 21 वर्षीय एक लड़की के पिता ने आरोप लगाया था कि 17 नवंबर को उनकी बेटी को किडनैप किया गया था. परिजनों के मुताबिक, बाद में दिल्ली में लड़की का धर्म परिवर्तन कराकर उसका निकाह जावेद नाम के एक युवक से करा दिया गया.

लड़की के पिता की तहरीर पर जलेसर थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 366 और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम(कथित लव जिहाद रोकने के लिए लाया गया कानून) के तहत 6 नामजद और दो अज्ञात लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई गई. पुलिस अभी तक इस मामले में दो महिलाओं समेत 14 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. हालांकि मुख्य अभियुक्त जावेद समेत पांच नामजद अभियुक्त अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. इन सभी पर पुलिस ने 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा है और कोर्ट से इनकी कुर्की वारंट भी ले लिए हैं.

जलेसर के पुलिस उपाधीक्षक रामनिवास सिंह के मुताबिक, "जावेद और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आईपीसी के सेक्शन 366 के साथ ही उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश के तहत केस दर्ज कर किया गया. मुख्य आरोपी 25 साल के मोहम्मद जावेद फरार है जबकि 14 लोगों की गिरफ्तारी हुई है. जावेद के साथ उसके चार नजदीकी रिश्तेदार भी फरार हैं. पुलिस ने अब पांचों पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है.”

यूपी में बीते 28 नवंबर को राज्यपाल ने गैरकानूनी धर्मांतरण अध्यादेश को अपनी मंजूरी दी थी जिसके बाद से यह कानून के तौर पर अस्तित्व में आ गया. राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद से ही अब तक इन मामलों में दर्जनों एफआईआर दर्ज की गई हैं और कई गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं. कई मामले ऐसे भी हैं जिनमें पुलिस की सक्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

इस अध्यादेश के तहत पहला मामला बरेली जिले में दर्ज हुआ जिसमें पुलिस ने अभियुक्त को एक हफ्ते के भीतर ही गिरफ्तार करके जेल भेज दिया.  इसी जिले में एक हफ्ते बाद जब एक लड़की के परिजनों ने एफआईआर दर्ज कराई तो पुलिस ने नए अध्यादेश के तहत धाराएं दर्ज करने से मना कर दिया. दिलचस्प बात यह है कि उसी दिन ऐसे ही एक मामले में पड़ोसी जिले मुरादाबाद में इसी अध्यादेश के तहत मामला दर्ज किया गया.

बरेली जिले के प्रेमनगर के रहने वाले शाहिद मियां ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी 22 वर्षीया बेटी को तीन लोगों ने अगवा कर लिया है. परिजनों ने सिद्धार्थ सक्सेना, उनकी बहन चंचल और दोस्त मनोज कुमार सक्सेना पर केस दर्ज कराया.

शाहिद मियां बताते हैं, "एक दिसम्बर को बेटी बाहर गई थी लेकिन वापस नहीं आई. फिर हमने 5 दिसम्बर को प्रेमनगर थाने में तहरीर दी की मेरी बेटी का मनोज और अमन ने अपहरण कर लिया है. पुलिस ने अगले ही दिन लड़की को बरामद तो कर लिया लेकिन हम लोगों से ना तो बात कराई और ना ही मिलने दिया गया. हमें डर है कि उसे कुछ हो ना जाए.”

इस मामले में पुलिस का कहना था कि लड़की ने अपनी मर्जी से शादी की थी और उसने स्वेच्छा से पति के साथ रहने की बात कही, इसलिए उसे उसके पति के साथ जाने दिया गया. जबकि मुरादाबाद में ऐसे ही मामले में पुलिस की कार्रवाई बिल्कुल इसके उलट थी.

मुरादाबाद जिले में 22 वर्षीय एक युवक राशिद अली को कांठ क्षेत्र में उस समय गिरफ्तार किया गया  जब वह अपनी पत्नी के साथ शादी का रजिस्ट्रेशन कराने जा रहा था. राशिद के साथ उनके भाई सलीम को भी गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस ने यह गिरफ्तारी लड़की के परिजनों की इस शिकायत पर की थी कि राशिद ने जबरन धर्मांतरण करके उनकी बेटी के साथ शादी की है. जबकि वहां मौजूद पत्रकारों से लड़की ने खुद कहा कि उसने राशिद के साथ अपनी मर्जी से शादी की है. बाद में कोर्ट ने राशिद और उनके भाई सलीम को रिहा करने के आदेश दिए.

यही नहीं, दिसंबर महीने में ही लखनऊ में ऐसी ही एक शादी पुलिस ने रुकवा दी थी जिसमें लड़की और लड़के के परिजन भी शामिल थे और उन्हें इस शादी से कोई आपत्ति भी नहीं थी. पुलिस ने यह शादी कुछ संगठनों की शिकायत पर रुकवाई थी. मुरादाबाद में भी पुलिस ने जो कार्रवाई की, उसके पीछे बजरंग दल के कुछ लोगों की आपत्ति थी जिन्होंने कोर्ट में हंगामा किया था और पुलिस पर राशिद को गिरफ्तार करने का दबाव बनाया था.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी एक फैसले में भी कहा है कि अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहना और उससे शादी करना व्यक्ति का मौलिक अधिकार है, बावजूद इसके इस अध्यादेश के तहत कई मामले दर्ज हो रहे हैं. यही नहीं, कुछेक मामलों में पुलिस को अदालत की फटकार सुनने को भी मिली लेकिन मामले दर्ज होने का सिलसिला जारी है. हालत ये हो गई है कि छात्रों का पढ़ाई के सिलसिले में या फिर घूमने जाने पर भी केस दर्ज हो जा रहे हैं.

बिजनौर में तो अभी एक दिन पहले हैरान करने वाला मामला सामने आया. यहां हिन्दू लड़की के साथ पिज्जा खा रहे एक मुस्लिम युवक पर पुलिस ने कथित तौर पर गैरकानूनी धर्मांतरण अध्यादेश के तहत मामला दर्ज कर लिया. यही नहीं, युवक नाबालिग है, लेकिन उसके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट, पॉक्सो एक्ट और गैरकानूनी धर्मांतरण कानून के तहत मामला दर्ज करके जेल भेज दिया गया.

लड़की के पिता ने स्थानीय मीडिया को बताया है कि इस मामले में पुलिस वालों ने खुद उसे थाने बुलवाया, घटना की जानकारी दी और फिर एफआईआर लिखवाई. लड़के के परिजनों का कहना है कि अभियुक्त साकिब नाबालिग है और उसकी उम्र अभी 17 साल ही है.

यूपी सरकार के इस अध्यादेश को कोर्ट में भी चुनौती दी जा चुकी है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस अध्यादेश के खिलाफ तीन जनहित याचिकाएं दाखिल की गई हैं जिनमें इसे नैतिक और संवैधानिक रूप से अवैध बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है.

इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब तलब किया है. यूपी सरकार को हाईकोर्ट के सामने चार जनवरी तक अपना विस्तृत जवाब पेश करना है. कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 7 जनवरी तय की है. हालांकि चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने अध्यादेश पर अंतरिम रोक लगाए जाने से फिलहाल इंकार कर दिया है.