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अनुसूचित जाति वर्ग की नाबालिक से दुष्कर्म करने वाले को आजीवन कारावास

अनुसूचित जाति वर्ग की नाबालिक से दुष्कर्म करने वाले को आजीवन कारावास

सक्ती।  अनुसूचित जाति वर्ग की नाबालिक बालिका को शादी का झांसा देकर 4 माह तक निरंतर दुष्कर्म करने वाले 20 वर्षीय अभियुक्त को पॉक्सो कोर्ट सक्ती के विशेष न्यायाधीश यशवंत सारथी ने आजीवन कारावास और  अर्थदंड की कठोर सजा सुनाई है। 

विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो राकेश महंत ने बताया कि यह पूरा मामला बाराद्वार थाना क्षेत्र का है। नाबालिक अभियोक्त्री ने थाने में लिखित रिपोर्ट दर्ज करायी थी कि दिनांक 27.05.2020 को दोपहर 2.30 बजे जब उसके माता-पिता काम करने गये थे और घर में कोई नहीं था वह अकेली थी तो अभियुक्त सुरेश साहू उसके घर आया और उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिये बोला।

नाबालिक ने मना किया तो उसे जान से मारने की धमकी दी, जिससे नाबालिक डर गयी। फिर अभियुक्त सुरेश साहू ने घर के कमरे में जबरन ले जाकर नाबालिक  साथ उसकी मर्जी के खिलाफ दुष्कर्म किया।

फिर दो दिन बाद दिनांक 29.05.2020 को रात 11 बजे बोर घर में ले जाकर जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाया। आरोपी नाबालिक को शादी करूंगा कहकर 4 माह से शारीरिक संबंध बनाता रहा और शादी करने के लिये बोली तो शादी नहीं कर रहा है। घटना के बारे में नाबालिक ने अपने माता-पिता, मामा व पड़ोसी  को बताया। 

प्रार्थी की रिपोर्ट पर बाराद्वार पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 376, 506, 450 भादवि एवं 6 पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया। विवेचना दौरान अभियोक्त्री का धारा 164 दं.प्र.सं. के तहत पुलिस कथन, सीडब्ल्यूसी तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट से कथन कराया गया। विवेचना दौरान अभियोक्त्री को अनुसूचित जाति का सदस्य होना पाये जाने पर प्रकरण में धारा 3(2)(5) एससी/एसटी एक्ट जोड़ा गया। आरोपी के खिलाफ अपराध सबूत पाये जाने पर उसे विधिवत गिरफ्तार कर अभियोग पत्र पॉक्सो कोर्ट सक्ती मे पेश किया गया। उभय पक्ष को अपने पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय देने के बाद तर्क सुनकर

सभी महत्वपूर्ण गवाहों और अभिलेख के अवलोकन के बाद प्रकरण में निर्णय पारित किया अभियोजन द्वारा अभियुक्त के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रमाणित कर दिए जाने पर तथा अभियुक्त को द  सिद्ध दोष पाए जाने पर  पॉक्सो कोर्ट सक्ती के विशेष न्यायाधीश यशवंत कुमार सारथी ने अभियुक्त को लैंगिक अपराधो से बालको का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 6 के तहत 20 वर्ष वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार रुपए अर्थदंड, भारतीय दंड संहिता की धारा 450 के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास और 1 हजार रूपये अर्थदंड, भारतीय दंड संहिता की धारा 506(बी) के तहत 1 वर्ष का कठोर कारावास और 500 रूपये का अर्थदंड, अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 की धारा 3(2)(5) के तहत आजीवन कारावास और 5 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित करने का निर्णय पारित किया है। आरोपी को दी गई सभी सजाएं साथ-साथ चलेगी। साथ ही अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर अलग से 6 माह के कारावास की सजा सुनाई है।

छत्तीसगढ़ शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक राकेश महंत ने पैरवी किया।