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मजदूरों की बेरोजगारी भत्ता की मांग प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में पहली और एकमात्र घटना

मजदूरों की बेरोजगारी भत्ता की मांग प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में पहली और एकमात्र घटना

मनरेगा अधिनियम के अधिकार से काम मांगे जाने की पूरे देश में पहली और एकमात्र घटना दुर्ग के चंदखुरी में

दुर्ग। मनरेगा अधिनियम 2005 में पंजीकृत मजदूर द्वारा मौखिक या लिखित रूप से काम की मांग करने पर एक साल में 100 का काम अनिवार्य रूप से दिये जाने का कानूनी प्रावधान है किंतु अधिकांश पंचायत में पंजीकृत मनरेगा मजदूरों को 20-25 दिनों को औसत काम दिया जाता रहा है, पूरे 100 दिन तक काम करने वाले मजदूरों की संख्या पंजीकृत मजदूरों के 10त्न से अधिक नहीं है,

मनरेगा अधिनियम के अधिकार का उपयोग करते हुए दुर्ग जनपद क्षेत्र के चंदखुरी गांव के लगभग 100 पंजीकृत मजदूरों ने लगभग 20 दिन पूर्व काम देने की लिखित में मांग किया किंतु इनमें से कुछ मजदूरों को ही कुछ दिनों का काम दिया गया किंतु अधिकांश मजदूरों को एक दिन का काम भी नहीं दिया गया है,

मनरेगा अधिनियम की धारा 7 (1) के अनुसार मांगे गये दिनों का काम न देने की स्थिति में प्रथम 30 दिन के लिये निर्धारित पारिश्रमिक का 25त्न और अतिरिक्त दिनों के लिये 50त्न बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान है,

चंदखुरी के मजदूरों की ओर से आज छत्तीसगढ़ श्रमिक मंच के संयोजक एड. राजकुमार गुप्त ने चंदखुरी के पंचायत सचिव और सरपंच को पत्र लिखकर मांगे गये दिनों का काम न दे सकने की स्थिति में अधिनियम की धारा 7(1) के प्रावधान के अनुसार बेरोजगारी भत्ता का भुगतान करने की मांग की है, पत्र की प्रतियां कलेक्टर दुर्ग, सीईओ जिला पंचायत दुर्ग और सीईओ जनपद पंचायत दुर्ग को भी दी गई है, दुर्ग जनपद के सीईओ राजपूत ने नियमानुसार कार्यवाही करने का भरोसा दिया है

मनरेगा अधिनियम के अधिकार से लिखित में काम मांगे जाने और काम नहीं देने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देने की मांग करने का चंदखुरी की घटना न केवल प्रदेश में बल्कि पूरे देश में पहली और एकमात्र घटना है अभी तक मनरेगा मजदूरों को सरकार और अधिकारियों की अनुकंपा और मेहरबानी के रूप में काम दिया जाता रहा है पहली बार मजदूरों ने अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग किया है।