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Breaking महिला वनपाल से यौन प्रताड़ना का मामला फूटा, वन परिक्षेत्र अधिकारी कलिहारी पर आरोप, 'साहब बुरी नीयत से छूते थे, रेस्ट हाउस बुलाते थे'

Breaking महिला वनपाल से यौन प्रताड़ना का मामला फूटा, वन परिक्षेत्र अधिकारी कलिहारी पर आरोप, 'साहब बुरी नीयत से छूते थे, रेस्ट हाउस बुलाते थे'

रायपुर. राज्य के सरकारी महकमे में यौन शोषण के मामले थमने का नाम नही ले रहे हैं. ताजा मामला वन विभाग से निकला है. कांकेर वनमण्डल की 35 वर्षीय महिला वनपाल ने वन परिक्षेत्र अधिकारी डी के कलिहारी पर यौन—प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाया है. मामले की शिकायत होने के बाद विभागीय जांच बिठा दी गई है जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी.

मामला तब सामने आया जब उक्त शासकीय महिला ने एक लिखित शिकायत प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी और अन्य विभागीय अधिकारियों से की. कुछ दिन तो मामला दबा रहा लेकिन जब शिकायत हेल्पिंग हयूमन राइटस फेडरेशन की महिला सेल की अध्यक्ष हेमलता पारख को हुई तो हड़कम्प मच गया. लिखित शिकायत में महिला का आरोप है कि वह सन 2014 से अप्रैल 2020 तक शहरी रोपणी सिंगारभाठ कांकेर में कार्यरत थी तथा रोपणी में प्रभार के दौरान वन परिक्षेत्र अधिकारी डी के कलिहारी के अधीन कार्यरत थी लेकिन कुछ ही दिनों में आभास हो गया कि कलिहारी मुझ पर बुरी नीयत रखता है.

किसी न किसी बहाने रेस्ट हाउस बुलाते थे
पीड़ित महिला का आरोप है कि शासकीय कार्य के दौरान निर्देश लेने, फाइल जांच कराने तथा प्रगति रिपोर्ट बतलाने के लिए वह जब भी साहब के पास जाती तो वे बुरी नियत से शरीर को छूने की कोशिश करते तथा किसी भी कार्य के लिए रेस्ट हाउस बुलाया करते थे. वे कहते थे कि मेरी बात मान जाओ, लाईफ बना दूंगा नही तो बर्बाद कर दूंगा. आरोपी अफसर को एक मंत्री का करीबी बताया जाता है और सेवानिवृत्त होने वाला है.

नौकरी से सस्पेण्ड हुई महिला
महिला ने आगे अपनी शिकायत में कहा है कि जब अधिकारी की ज्यादती बढ़ गई तो मैंने पहली लिखित शिकायत वन कर्मचारी संघ कांकेर को की परंतु कोई एक्शन नही लिया गया. उलटा वन परिक्षेत्र अधिकारी डी के कलिहारी ने मुझे और ज्यादा प्रताड़ित करना शुरू कर दिया. मुझे उच्च अधिकारियों के आदेश की अवहेलना करने तथा लक्ष्य के अनुरूप रोपणी में पौधों की संख्या कम बताकर षडयंत्रपूर्वक नौकरी से निलंबित कर दिया गया है. इसके पहले ना तो मुझे सुनवाई का मौका दिया गया और ना ही कोई नोटिस.

मामला संदिग्ध है!
वन विभाग के एक अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा कि महिला के खिलाफ काफी शिकायतें थीं जैसे समय पर आफिस ना आना, डयूटी के दौरान दिए गए कार्य को पूरा ना करना इत्यादि. इसलिए विभागीय कार्यवाही हुई है, उसके बाद अधिकारी पर यह आरोप लगाना संदेहास्पद है. फिर महिला कह रही है कि वह छह साल तक कार्य करती रही, उसे अप्रैल् 2020 में ही हटाया गया और उसके बाद ही उसने शिकायत कर दी है. हालांकि इसके बाद भी विशाखा कमेटी पूरे मामले की जांच कर रही है.


विभागीय जांच रिपोर्ट का इंतजार है : राकेश चतुर्वेदी

प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि शिकायत प्राप्त हुई थी और उसके बाद जांच कमेटी बैठा दी गई है. हर विभाग में एक विशाखा कमेटी होती है जिसे जांच करने के निर्देश दिए गए हैं. यदि शिकायत सही पाई गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी.


आरोप गंभीर हैं इसलिए जांच जारी है : कलेक्टर चौहान

इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कांकेर कलेक्टर आइएएस चौहान ने कहा कि महिला की शिकायत के बाद तुरंत जांच शुरू हुई है. विभागीय जांच जारी है और उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्यवाही होगी. 


बलात्कार के आरोपी आइएएस पाठक की अब तक गिरफतारी नही!

दूसरी ओर जांजगीर—चांपा के पूर्व कलेक्टर रहे आइएएस जगत प्रकाश पाठक पर लगे बलात्कार के आरोप की जांच रिपोर्ट अभी तक नही आ सकी है और पुलिस भी बहुत धीरे कार्यवाही कर रही है. आमजन सवाल उठा रहे हैं कि आम आदमी की गिरफतारी उसी दिन हो जाती है लेकिन आइएएस पर अभी तक शिकंजा नही कसा जा सका है. हालांकि निलंबन हो चुका है लेकिन पीड़ित महिला त्वरित गिरफतारी की मांग कर रही है.