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तेरा मेरा मनवाः आप पूछे हम बताएं, मन से मन की उलझन सुलझाएं - डॉ. ममता व्यास

तेरा मेरा मनवाः आप पूछे हम बताएं, मन से मन की उलझन सुलझाएं - डॉ. ममता व्यास

मानसिक रोग के लक्षण, हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। ये इस बात पर निर्भर करते हैं कि उसके हालात कैसे हैं और उसे कौन-सी मानसिक बीमारी है। मन की हजार उलझनों का सुलझाव भी मन के रास्तों से ही निकलता है। तेरा मेरा मनवा भी कुछ ऐसी ही बात करता है।

समस्या –मेरी पत्नी एक प्रायवेट कंपनी में जॉब करती थी पिछले वर्ष कोविड 19 के कारण उनकी कंपनी ने कई सारे लोगों को नौकरी से निकाल दिया। मेरी पत्नी ने जब से जॉब खोई है वे अक्सर चिंता में घिरी रहती है। अजीब सा व्यवहार हो गया है । किसी से बात नहीं करती ना आसपड़ोस में आती जाती है। सारा दिन घर में रहती है और गुमसुम रहती है। परेशान हूँ क्या करूँ ?

समाधान –मुझे लगता है नौकरी खोने की वजह से आपकी पत्नी डिप्रेशन और एंजाइटी से जूझ रही हैं । इन अवस्था में पीड़ित व्यक्ति हमेशा एक टेंशन में रहता है। उसे हर वक्त एक अज्ञात डर सताता रहता है। वह समाज से खुद को कटा हुआ महसूस करता है। हमेशा अपने दुखों के बारे में सोचना नकारात्मक विचारों से घिरे रहना और अकेले रहना पसंद करता है। आप परेशान ना हों, आप अपनी पत्नी से बातचीत करते रहें। उन्हें मोटीवेट करते रहें । उन्हें अकेला ना रहने दें जरूरत पड़ने पर किसी मनोवैज्ञानिक से परामर्श भी लिया जा सकता है। 


समस्या –मेरी समस्या यह है कि मेरी शादी को पाँच साल हो गए हैं मैं एक निजी स्कूल में पढ़ाती हूँ । मेरे पति मुझ पर बहुत शक करते हैं, उनके इस शक्की स्वभाव की वजह से मैंने कई बार नौकरी छोड़ दी है, लेकिन घर में रहने पर भी वे मुझ पर शक करते थे,| कभी सब्जी वाले, दूधवाले यहाँ तक कि दरवाजे पर आए किसी भिखारी से भी बात कर लूँ तब भी झगड़ा करते हैं। मैं जो खाना बनाती हूँ उसे नहीं खाते बोलते हैं तुमने इसमें जहर मिला दिया है मुझे मारना चाहती हो। मेरी सास और मैं हम दोनों ही बहुत परेशान हैं क्या करें ?

समाधान –मुझे लगता है आपके पति को सीजोफ़्रेनीया नामक गंभीर मानसिक रोग है। वैसे तो शक करने को सामान्य अर्थों में लिया जाता है, लेकिन मनोविज्ञान इसे बीमारी मानता है, जो मस्तिष्क में होने वाले रासायनिक असंतुलन के कारण ये विकार हो जाता है  इसे सिजोफ्रेनिया कहते हैं। इसके लक्षण कई तरह के होते हैं। शुरुआत में ही अगर इसके लक्षण पहचान लिए जाएं तो इस रोग को काबू में किया जा सकता। आप जल्दी से जल्दी अपने पति को किसी अच्छे मनोचिकित्सक को दिखाएँ | 

समस्या –मेरी बेटी की उम्र बीस बरस है। जब वह घर में रहती है तो सामान्य व्यवहार करती है लेकिन जब वह किसी भीड़ भरी बस में या भीड़ वाले स्थानों पर जाती है तो उसका व्यवहार अजीब सा हो जाता है। वह डरने लगती है , उसे पसीना आने लगता है और चेहरे की भाव भी बदल जाते हैं, मेरी पत्नी कहती है कि उस पर किसी ने जादू या टोना किया है, समझ नहीं आता क्या करूं।

समाधान – फोबिया  एक ऐसी समस्‍या है, जो किसी भी व्‍यक्ति को हो सकता है, लेकिन ज्‍यादातर लोग इसे पहचान नहीं पाते। और ना वे इससे बचने का हर संभव प्रयास करते हैं। आप परेशान ना हों आपकी बेटी को ऐग्रोफ़ोबिया यानि द फियर ऑफ क्राउड है ( भीड़ से डर) नामक मनोविकार हुआ है, जिसमें व्यक्ति को विशेष वस्तुओं, परिस्थितियों या क्रियाओं से डर लगने लगता है। यानि उनकी उपस्थिति में घबराहट होती है जबकि वे चीजें उस वक्त खतरनाक नहीं होती है। यह एक प्रकार की चिन्ता की बीमारी है।

आपकी बेटी को भीड़ वाली जगह या भीड़ -भाड़ से घबराहट होती है। आप डॉक्टर को दिखाये, इलाज से लाभ मिलेगा|

समस्या – मेरे चार वर्षीय बेटे का पढ़ने में बिल्कुल मन नहीं लगता है, किताबों को देखते ही उसके पेट में दर्द होने लगता है खासकर मेथ्स की  बुक देखकर | मैं अगर जबर्दस्ती उसे पढ़ने के लिए बैठा दूँ तो वो सो जाता है। अक्सर वो अपनी पेंसिल या रबर गुम कर देता है या छिपा देता है  या कभी कभी स्कूल बेग ही छिपा देता है, क्या करूं?

समाधान – आपकी परेशानी समझ सकती हूँ लेकिन आप बच्चे को फोर्स मत कीजिये पढ़ने के लिए। उसे कहानियों के माध्यम से पढ़ाये। उसे रोज कहानियाँ सुनाये और कहानियों के बीच ही उसे पढ़ाई का महत्व समझाये। पढ़ाई को हौवा न बनाए अभी उसकी उम्र बहुत छोटी है। अभी से उस पर प्रेशर मत डालिए |

समस्या – मेरे पिताजी अक्सर रातों को उठकर बैठ जाते हैं और कहते हैं कि उन्हें कई तरह की आवाजें सुनाई दे रही है। घर के किसी भी सदस्य को ये आवाज़े सुनाई नहीं देती सिर्फ पिताजी को सुनाई देती हैं। कई तरह के पूजा पाठ करवा लिए फिर भी आराम नहीं मिल रहा।

समाधान -किसी भी व्यक्ति को अगर अजीबों-गरीब आवाज़ें सुनाई पड़ रही हैं| या वह कुछ ऐसा देख या सुन रहा है जो दूसरे नहीं, या अगर कोई खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है तो ऐसे में परिवार और दोस्तों की ज़िम्मेदारी है कि वे उसे डॉक्टर के पास ले जाएं | ये गंभीर मानसिक रोग हो सकता है |