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प्रदेश में सुशासन कहाँ ? लोक लुभावने बयान देने में माहिर शिवराज

 प्रदेश में सुशासन कहाँ ? लोक लुभावने बयान देने में माहिर शिवराज

भोपाल ।  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इन दिनों प्रदेश की नौकरशाही और माफियाओं को लेकर बड़ तल्ख बयान दे रहे है ? जहां तक उनके बयानों की बात करें तो इस तरह के लोक लुभावने बयान देने में माहिर शिवराज सिंह चौहान ने नववर्ष की पहली मुलाकात में मंत्रियों और अधिकारियों से कहा कि सबसे ऊपर सुशासन और जनता मेरी भगवान? जहाँ तक बात जनता के भगवान होने की करें तो वह हमेशा से ही जनता को अपना भगवान मानते रहे हैं लेकिन इस प्रदेश की जनता को क्या मिला और इसका खामियाजा भी वह 2018 में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में सरकार के बेदखल होने का भुगत चुके हैं?

अब उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि यह सब उन अधिकारियों की बदौलत हुआ जिन पर उनकी लगाम नहीं थी और इस तरह के आरोप भी उनके 15 सालों के शासनकाल के दौरान एक बार नहीं अनेकों बार लगते रहे, तो वहीं भाजपा के उनके ही कई नेताओं ने भी उन्हें कई बार बेलगाम नौकरशाही के बारे में चेताया था? लेकिन फिर भी वह अपने अधिकारियों पर भरोसा करते रहे इसका ही परिणाम रहा कि उन्हें और उनकी पार्टी को 15 महीने का कांग्रेस की तरह सत्ता से बेदखल होना पड़ा था? अब जब सिंधिया और उनके सहयोगियों की बदौलत उन्हें शिवराज को पुन: सत्ता वापसी का सुख भोगना पड़ रहा है इसके बाद भी उनकी कार्यशैली में कोई सुधार नहीं हुआ और आज भी प्रदेश के तमाम जिलों में अधिकारी योजनाओं की रंगोली सजाकर उसकी राशि में अफरा-तफरी कर अपनी तिजोरी भरने में लगे हुए हैं, सवाल सुशासन का है जिस सुशासन को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हमेशा बयानबाजी करते रहते हैं?

बात यदि सुशासन की करें तो दूरदराज के जिलों की बात तो छोडि़ए, राजधानी भोपाल में ही ठीक तरह से सुशासन नजर नहीं आ रहा है यहां आज भी राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारी पीडि़त किसानों से सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी उन्हें बही और कब्जा दिलाने के नाम पर पांच लाख खुलेआम रिश्वत के रूप में मंाग रहे हैं? क्या शिवराज की नजर में इसे ही सुशासन कहते हैं इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं, हालांकि पीडि़त किसानों ने शपथ पत्र के साथ जिला कलेक्टर को जिस पटवारी और आरआई ने इस काम के लिये एक लाख 45 हजार रुपये ले चुके हैं और पांच लाख रुपये और मांग रहे हैं उसकी शिकायत की है लेकिन शिवराज सरकार के प्रशासनिक ढांचे के चलते उस पीडि़त किसान को कोई न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं है क्योंकि राजस्व अधिकारी दबंग बिल्डर का पक्ष लेते नजर आ रहे हैं। यह मामला तो राजधानी का है यदि प्रदेश के अन्य जिलों में और दूरदराज के क्षेत्रों में किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराई जाए तो ऐसे पीडि़त कई किसान और आमजन मिल जाएंगे

जिनसे अधिकारी खुलेआम काम के बदले रिश्वत की मांग करते हैं? यदि इन सबके बावजूद भी शिवराज के दिल में प्रदेश की जनता को सुशासन दिलाने की इच्छा व्याप्त है तो भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ मुहिम चलाकर उनपर सख्त कार्यवाही करने का निर्देश दें? हालांकि इस तरह से भ्रष्टाचार के खात्मे को लेकर वर्षों से देश व प्रदेश की जनता कई लोक लुभावने बयान सुनती आई है तो वहीं भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरु तो भ्रष्ट अधिकारियों को खंभे पर टांगने के  कई बार बयान दे चुके थे लेकिन वह अपने शासनकाल को एक भी भ्रष्टाचारी को खंभे पर नहीं टांग सके थे? देश में व्यापत भजकलदारम् की प्रथा को पनपते हुए शिवराज का प्रदेश के अधिकारियों में लेनदेन के बिना जनता का काम करने और सुशासन स्थापित करने का दावा भी बेनामी ही नजर आता है?