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माफियाओं के आगोश में जिले की रेत खदानें...

माफियाओं के आगोश में जिले की रेत खदानें...


बड़ी करेली में आंदोलन, शासन की छवि हो रही धूमिल

संजय जैन

धमतरी, 23 फरवरी। माफियाओं के राज में प्रशासन पूरी तरह उलझकर रह गया है। गांजा, चरस, अफीम, अवैध शराब के माफिया चहुंओर फैले हुए हैं वहीं अब रेत माफियाओं के ज्यादती और दादागिरी के चलते इनके ऊपर अंकुश लगाने वाला कोई नहीं है। पिछले दिनों बड़ी करेली में जिस प्रकार रेत ठेकेदार द्वारा ग्रामीणों से अभद्रता पूर्वक कार्यवाही कर लाख मना करने के बाद भी ग्रामीणों की बात नहीं माना। फलस्वरूप बड़ी करेली के सैकड़ों लोग कलेक्टर का घेराव कर दिये। बात यहीं समाप्त नहीं हुई, अलबत्ता आज बड़ी करेली में सैकड़ों लोग रेत खदान को पूर्णत: बंद कराये जाने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इधर कलेक्टर ने कहा है कि नियम से ही चलेगी। उनके इस तर्क को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर अब तक जो खदानें संचालित हुई हैं, वह नियम विरूद्ध संचालित हुई हैं? बड़ी करेली के साथ साथ जिले भर में खनिज विभाग की लापरवाही से जिस प्रकार गौण खनिज का दोहन किया जा रहा है और लाख विरोध होने के बाद भी ऐसी खदानों पर खनिज अमला हाथ पे हाथ धरे बैठा है, इससे पूरी तरह शासन की छवि धूमिल हो रही है। वहीं माफियाओं के आ$गोश में जिले की रेत खदानें संचालित होती नजर आ रही है।

पूर्व वर्षों से लेकर आज तक रेत माफियाओं द्वारा विभिन्न स्थानों पर नियम, कायदों को बलाये ताक रखते हुए जो खनन जेसीबी एवं चैन माउंटेन मशीन से करवाया जा रहा है, उससे अब रेत के भीतर दफन अनेक नर कंकाल उभरकर सामने आ रहे हैं। पूर्ववर्ती सरकार के समय से चलने वाले इस गोरखधंधे में अनेक सफेदपोश लोगों का समावेश होने की वजह से प्रशासनिक दृष्टिकोण से कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है जिसका सीध-सीधा असर आगामी चुनाव में देखने को मिलेगा, ऐसे कयास लगाये जा रहे हैं। लगातार रेत, मुरूम, गिट्टी माफियाओं द्वारा धड़ल्ले से बिना पिटपास के रात भर गौण खनिज उत्खनन का कार्य करवाया जा रहा है। समय समय पर ग्रामीणों की मांग पर मीडिया में यह समाचार सुर्खियों में रहा। इसके बाद भी कार्यवाही करेंगे, जानकारी नहीं है, कभी फोन नहीं उठाना, ग्रामीणों की शिकायतों को नजरअंदाज कर देना, इससे समूचे जिले के उन क्षेत्रों में सरकार और प्रशासन के खिलाफ बेहद आक्रोश व्याप्त है। अनेक ग्राम क्षेत्र के लोगों द्वारा बारंबार खनिज विभाग, कलेक्टर को शिकायतें करने के बाद भी कोई कार्यवाही रेत माफियाओं पर नहीं की गई। पूरे जिले में अवैध शराब, गांजा जैसे मादक द्रव्यों को माफियाओं द्वारा खपाया जा रहा है। सट्टा, जुआ, शराब के लिये बड़ी-बड़ी बातें की जाती है। लेकिन ऐसे गैर कानूनी कार्यों में लिप्त रहने वालों पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की जा रही है जिससे उनके हौसले बुलंद हैं। खनिज विभाग द्वारा भी जेसीबी, चैन माउंटेन मशीन की जप्ती दिखावे के रूप में की जा रही है जबकि सैकड़ों हाईवा शहर से होकर ग्राम क्षेत्रों में पहुंच रही है। यातायात नियमों की दुहाई देने वाला विभाग ऐसे ओव्हरलोड एवं हाईवा के बेतरतीब चलाने को लेकर कोई कार्यवाही इन पर नहीं कर रहा है।

जिले में जिस प्रकार रेत, गिट्टी, मुरूम का अवैध उत्खनन हो रहा है। ऐसे तथाकथित रेत माफियाओं द्वारा न तो राजस्व की जमीन देखी जा रही है, न वन एवं सिंचाई विभाग के भूभाग को देखा जा रहा है। बस इन्हें चोरी करने से मतलब है। ऐसे लोगों को पकडऩे की जिन पर जवाबदारी है, वे लापरवाह एवं अनजान बने नजर आते हैं। नागरिकों के बीच जिस प्रकार माफियाओं के विरूद्ध आक्रोश उबल रहा है, उससे प्रशासन पूरी तरह बेखबर है। इसी की परिणति ही मानी जायेगी कि बड़ी करेली जैसे ग्राम जो कि मगरलोड विकासखंड अंतर्गत आता है, वहां से हजारों की संख्या में ग्रामीणों द्वारा कलेक्टोरेट में रेत खदान बंद कराये जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया। यहां तक कार्यालय जा रहे कलेक्टर की वाहन को रोककर उन्हें वाहन से उतरने मजबूर कर दिया जिन्होंने प्रदर्शनकारियों को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि आप लोग यदि अपनी बात रखना चाहते हैं तो कार्यालय आईये। इस प्रकार रास्ता रोककर किसी भी अधिकारी को अपनी समस्या नहीं बताई जा सकती। जनदर्शन में भी मैं इतनी बड़ी भीड़ को एक साथ नहीं बुला सकता। आप जैसे लोगों की समस्याओं को लेकर ही मैं जनसुनवाई करता हुं। उसके बाद प्रदर्शनकारियों ने वहां तो कलेक्टर की बात को गंभीरता से लेते हुए घेराव को शिथिल कर दिया जबकि कलेक्टर ने इनसे ज्ञापन लेने के लिये एडीएम, डिप्टी कलेक्टर को भेजा था। इसके बाद भी रेत खदान बंद कराये जाने की मांग पर  ग्रामीणजन डटे रहे। इनकी मांग पूरी नहीं होने की दशा में बड़ी करेली ग्राम के लोगों द्वारा पिछले कई दिनों से धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। धरना प्रदर्शन स्थल पर कलेक्टर जाकर ग्रामीणों से धरना समाप्त करने की अपील की। लेकिन ग्रामीण नहीं माने।

बताया जाता है कि बड़ी करेली के लोगों की तरह अन्य ग्रामों में भी खनिज विभाग की लापरवाही एवं उनके संरक्षण में चल रही रेत, गिट्टी, मुरूम खदानों को बंद कराये जाने की मांग पिछले लंबे समय से की जा रही है। लेकिन शिकायतकर्ताओं की मांग के अनुरूप संबंधित ठेकेदारों पर कार्यवाही नहीं किये जाने के कारण बड़ी करेली जैसे अनेक ग्रामों में धरना प्रदर्शन की आग सुलग रही है। ऐसे लोगों की मांग है कि रात्रिकालीन चलने वाली खदानों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाये। यहां यह बताना लाजिमी है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं पर्यावरण विभाग द्वारा खदानों में चैन माउंटेन, जेसीबी मशीनों से खुदाई नहीं किये जाने की व्यवस्था की गई है। इस व्यवस्था के आदेश का उल्लंघन करते हुए संबंधित लोग जेसीबी, चैन माउंटेन मशीन से ही गौण खनिज का उत्खनन करा रहे हैं। जहां तक बड़ी करेली रेत खदान के ठैकेदार द्वारा जो ज्यादती ग्रामीणजनों से की गई एवं उनके पूर्वजों के नर कंकाल को खोदने तक नदी की खुदाई किये जाने को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। यही कारण है कि बड़ी करेली के रेत खदान को पूर्णत: बंद कराये जाने की मांग पर ग्रामीणजन जुटे हुए हैं। गौण खनिज उत्खनन के कार्यों में लगे वैध एवं अवैध उत्खनन कार्य करने वालों पर यदि कार्यवाही नहीं की गई तो अनेक ग्रामों से बड़ी करेली जैसे ही धरना प्रदर्शन की संभावनाओं को नहीं नकारा जा सकता। खनिज विभाग की घोर लापरवाही के चलते शासन एवं प्रशासन की छवि धूमिल हो रही है।