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बड़ी खबर : वजन त्यौहार को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह : पौष्टिक आहार का महत्व, नौनिहालों के पोषण स्तर की जानकारी

बड़ी खबर : वजन त्यौहार को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह : पौष्टिक आहार का महत्व, नौनिहालों के पोषण स्तर की जानकारी

 

रायपुर । प्रदेश की आंगनबाडिय़ों में बच्चों में पोषण स्तर के आंकलन के लिए उत्साह के साथ वजन त्यौहार मनाया जा रहा है। वजन त्यौहार के शुभारंभ अवसर 7 जुलाई पर सभी जिलों में 5 वर्ष तक के हजारों बच्चों का वजन और ऊंचाई लिया गया। वहीं 11 से 18 वर्ष की सभी किशोरी बालिकाओं का हिमोग्लोबिन टेस्ट भी कराया गया। कई आंगनबाड़ी केन्द्रों को रंग बिरंगे गुब्बारो से सजाया गया अैर फल-सब्जियों से बनी रंगोली के माध्यम से सुपोषित आहार अपनाने का संदेश दिया गया। स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता और स्वस्थ किशोरी बालिका प्रतियोगिता के आयोजन के साथ ही रेडी-टू-ईट के विभिन्न व्यंजनों और छत्तीसगढ़ की विभिन्न भाजी का भी प्रदर्शन किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 16 जुलाई तक वजन त्यौहार का आयोजन किया जाएगा।
आम नागरिकों के साथ जन प्रतिनिधिगण भी उत्साह से वजन त्यौहार में शामिल होकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिय़ा ने भी सभी पालकों से अपने 5 वर्ष तक के बच्चों को आंगनबाड़ी ले जाकर उनके पोषण स्तर का आंकलन करवाने का आग्रह किया है, जिससे कुपोषण को जल्दी हराया जा सके। उन्होंने कहा है कि बच्चों के पोषण स्तर के आंकलन के लिए वजन करना आवश्यक है। वजन कराने से बच्चों के विकास की सही जानकारी मिलेगी।
वजन त्यौहार में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं एवं सहायिकाएं कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन कर पालकों को उनके बच्चों और शिशुवती माताओं को खान-पान में पौष्टिक आहार को शामिल करने के साथ स्वास्थ और स्वच्छता संबंधी सलाह भी दे रही हैं। इस कार्य में स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी सहयोग किया जा रहा है। बच्चों की आयु के अनुसार उनके वजन और ऊंचाई के आधार पर बच्चों के गंभीर कुपोषित, मध्यम कुपोषित या सामान्य होने का आंकलन किया जा रहा है। इस आधार पर बच्चों को आवश्यकता अनुसार पौष्टिक आहार और स्वास्थ सुविधाएं मुहैय्या करायी जाएंगी, जिससे बच्चों से कुपोषण दूर किया जा सके। वजन त्यौहार में बच्चों का वजन लेकर उनका पोषण स्तर ज्ञात कर सॉफ्टवेयर में दर्ज किया जा रहा है। इससे कुपोषित बच्चों का डाटा बेस तैयार होगा, जिससे कुपोषण दर कम करने हेतु कार्ययोजना तैयार करने में सुविधा होगी।