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वैज्ञानिकों के अनुसार सूरज पर उठते तूफान से बड़ी तबाही का अंदेशा

वैज्ञानिकों के अनुसार सूरज पर उठते तूफान से बड़ी तबाही का अंदेशा

नई दिल्ली: सूरज में विस्फोट से कई प्रकार के बेहद खतरनाक रेडिएशन निकलता है जो पृथ्वी पर इसका असर देखने को भी मिलता है। सामान्य तौर पर सौर तूफान 10-20 लाख मील प्रतिघंटे की रफ्तार से चलते हैं.लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि सूरज पर उठने वाले तूफान का असर सैटेलाइट टेक्नोलॉजी पर हो सकता है.

अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के मुताबिक,  ये सूरज के coronal holes से उठते हैं. सूरज में विस्फोट होने से इनसे Coronal mass ejection भी निकलते हैं.

धरती का चुंबकीय क्षेत्र इंसानों को सूरज से आने वाले खतरनाक रेडिएशन से बचाता है,  सोलर विंड की वजह से धरती का बाहरी वायुमंडल गरमा सकता है और इसका असर सैटलाइट्स पर पड़ सकता है.

1859 और 1921 में ऐसे तूफानों का असर धरती पर देखा गया था. वर्ष 1859 में आए सबसे शक्तिशाली जिओमैग्‍नेटिक तूफान ने यूरोप और अमेरिका में टेलिग्राफ नेटवर्क को तबाह कर दिया था. इससे जीपीएस नैविगेशन, मोबाइल फोन सिग्नल और सैटलाइट टीवी में रुकावट पैदा हो सकती है. 

वहीं सौर हवाओं के साथ हमारे सबसे करीबी सितारे से निकला रेडिएशन चार्ज्ड पार्टिकल्स को धरती पर लाता है. ये चार्ज्ड पार्टिकल्स स्पेस में ट्रैवल करते हैं और बेहद तेज गति पर धरती की ओर आते हैं. जब ये धरती के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं तो रोशनी की शक्ल में एनर्जी रिलीज होती है. इसे Aurora कहते हैं.वहीं पावर लाइन्स में करंट तेज हो सकता है जिससे ट्रांसफॉर्मर भी उड़ सकते हैं. इसके अलावा कम तीव्रता का एक सौर तूफान 1989 में भी आया था.

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इलेक्टिकल ग्रिड और इंटरनेट पर असर के जरिए इनकी तीव्रता को समझा जा सकता है.  पिछले तूफान के मुकाबले इस बार सौर तूफान से परिणाम ज्‍यादा भयावह हो सकता है. सौर तूफान आने पर हमारे अंतरिक्ष में चक्‍कर लगा रहे सैटलाइट प्रभावित हो सकते हैं और इससे हमारी संचार और जीपीएस प्रणाली ठप पड़ सकती है.