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वन विभाग: नर्सरियों में हो रहे पौधे तैयार, सड़कों के किनारे रोपे जाएंगे गोल्डन शॉवर ट्री

वन विभाग: नर्सरियों में हो रहे पौधे तैयार, सड़कों के किनारे रोपे जाएंगे गोल्डन शॉवर ट्री

राजकुमार मल, बिलासपुर- हरियाली लाने की चल रही कवायद में पहली बार "गोल्डन शॉवर ट्री" भी नजर आएगा। इसके पौधे सड़कों के किनारे रोपे जाएंगे। वन विभाग की नर्सरियों में इसके पौधे बड़ी संख्या में तैयार हो रहे हैं। निजी क्षेत्र की नर्सरियों में भी यह बहुत जल्द विक्रय के लिए उपलब्ध होंगे।

आगत मानसून के पहले पौधरोपण के क्षेत्र में पहली बार अमलतास के पौधे बड़ी संख्या में रोपे जाएंगे। औषधीय गुणों के खुलासे के बाद अमलतास को ट्री- फार्मिंग में भी लाने की योजना है।

फिलहाल योजना के अनुसार अमलतास रोडसाइड लगाए जाएंगे ताकि इसके गुणों से आम जन परिचित हो सकें। मालूम हो कि अमलतास लैंडस्केप से क्षेत्र में जाना पहचाना पेड़ है।

इसलिए गोल्डन शॉवर ट्री

5 से 15 मीटर ऊंचे अमलतास के पेड़ों में अप्रैल-मई के माह में फूल लगते हैं। पीले रंग के फूल लंबाई में लगते हैं। रंग की वजह से इसे गोल्डन शॉवर ट्री के नाम से जाना जाता है। निश्चित अवधि के बाद इनमें फल लगते हैं। प्रारंभ में हरा और पकने के बाद गहरा भूरा रंग का इसका फल कई महत्वपूर्ण औषधियां बनाने में सक्षम है।

हर हिस्सा अहम

मुनगा के बाद अमलतास, दूसरा ऐसा पेड़ है जिसकी पत्तियां, फूल, फल, तना और जड़ अपने आप में महत्वपूर्ण औषधीय गुणों से परिपूर्ण है। बुखार के लिए यह उपयोगी है तो, छाल की सहायता से मधुमेह जैसी आम बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है। 

इतना ही नहीं, इसकी छाल में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के भी गुणों की जानकारी मिली है। फोड़ा, फुंसी, खाज और खुजली के लिए तो आयुर्वेद में इसे रामबाण माना गया है। पत्तियों के नियमित सेवन से गैस, कब्ज और गठिया जैसी बीमारी भी दूर की जा सकती है।

केरल का राजकीय वृक्ष

अमलतास में औषधीय गुणों के खुलासे के बाद केरल राज्य ने इसे राजकीय वृक्ष का दर्जा दिया हुआ है। यही वजह है कि सभी राज्यों में मिलने वाले अमलतास के पेड़ सबसे ज्यादा संख्या में केरल में ही है। इसके बाद अमलतास लैंडस्केप के बड़े हिस्से में भी नजर आने लगा है और पौधरोपण में भी स्वीकार्यता मिल रही है।

संक्रमण से बचाव में मजबूत

अमलतास अपने खूबसूरत पीले फूलों की वजह से "गोल्डन शॉवर ट्री" के रूप में जाना जाता है। आयुर्वेद में इसे "सर्वरोग प्रशमणि" के रूप में पहचाना गया है, जिसका अर्थ है कि यह सभी प्रकार के रोग ठीक करता है और शरीर को माइक्रोबियल संक्रमण से बचाता है। इसमें रेचक, कार्मिनेटिव एंटी-प्रुरिटिक और एंटी इन्फ्लेमेटरी जैसे गुण होते हैं।