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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-सुशासन की चाह कब रंग लाएगी

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-सुशासन की चाह कब रंग लाएगी


गुड गवर्नेंस पर प्रधानमंत्री मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर के विस्तार कार्यक्रम के बीच समय निकालकर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वाराणसी में सुशासन की दिशा में काम करने की समझाईश दी है। भगवान राम के सहारे सत्ता की वैतरणी पार करने वाली पार्टी के मुखिया की मंशा दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा की है। वे अब चुनाव रूपी गंगा यमुना पार करने के लिए एक साथ भगवान शिव और कृष्ण का आशीर्वाद चाहते हैं। मथुरा की बंसी काशी के अविनाशी के डमरू की रिदम पर देश को थिरकने के लिए तैयार किया जा रहा है।

क्या वजह है कि सरकारों को चुनाव नजदीक आते ही बहुत सारी बातें याद आती है जिनमें एक गुड गर्वेनस भी है। गुड गवर्नेंस यानि सुशासन। सुशासन से तात्पर्य किसी सामाजिक-राजनैतिक इकाई को इस प्रकार चलाना कि वह वांछित परिणाम दे। सुशासन के अन्तर्गत बहुत सी चीजें आती हैं जिनमें अच्छा बजट, सही प्रबंधन, कानून का शासन, सदाचार आदि शामिल है। ऐसा नहीं है कि गवर्नेस यानि सुशासन के नाम पर पहले बातचीत न हुई हो एजेंडा न बना हो। सब कानून का राज कायम करना चाहते हैं, बापू का भारत बनाना चाहते हैं, जनता जनार्दन इनके लिए सर्वोपरि है फिर भी सुशासन नहीं आ पा रहा है।

गंगा के तट पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुड गवर्नेंस पर चर्चा करते हुए भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कहा कि प्रधानमंत्री को ये बताएं कि गुड गवर्नेंस को लेकर वो अपने प्रदेश में क्या कर रहे हैं। प्रधानमंत्री काशी में इस सम्मेलन को करके ये संदेश देना चाहते हैं कि उनकी नजर हर उस प्रदेश के विकास के काम पर है, जहां बीजेपी की सरकार है लेकिन इस पर बड़ा सवाल उठता है कि क्या देश के प्रधान सेवक उन्ही राज्यों से खास लगाव रखते हैं जहां भाजपा की सरकार हो। बाकी राज्यों को क्या सुशासन की जरूरत नहीं है..। क्या अब देश में सुशासन जो कि प्रशासन की सबसे बड़ी मांग है, आत्मा है उसे भी वोट बटोरने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। प्रधानमंत्री इस अहम विषय को लेकर सभी राज्यों को एक चश्मे में क्यों नहीं देख रहे हैं, ये अपने आप में बड़ा सवाल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुड गर्वनेस को लेकर अपनी कैबिनेट में कहा है कि सुशासन इस सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि नौकरशाही का आत्मविश्वास बढ़ाना जरूरी है, ताकि अधिकारी बड़े फैसले लेने से ना डरें। अधिकारियों के फैसलों का समर्थन जरूरी है, जिससे वे नीतियों को अमलीजामा पहना सकें। हमें हर नए विचार का स्वागत करना चाहिए, जिससे सरकार के कामकाज में रचनात्मकता बनी रहे। मोदी ने मंत्रियों से फेसबुक और ट्विटर पर लोगों की राय मांगने के लिए कहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अगले एजेंडे के बारे में कहा कि सरकार को जनता की मूलभूत जरूरतों को प्राथमिकता देनी होगी। अगर जनता की मूलभूत जरूरतें ही पूरी नहीं होंगी, तो विकसित देश कैसे बनेगा। मोदी ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और सड़क को लेकर सरकार गंभीर रहेगी। मंत्रियों को सरकार के कामकाज में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कहा गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भ्रष्टाचार पूरे देश के लिए चिंता का विषय है और इसके सुधार की शुरुआत ऊपर से होनी चाहिए। नई सरकार की हर नीति, हर हरकत पूरी तरह से पारदर्शी होनी चाहिए। मंत्रालयों के बीच आपसी समन्वय बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि विकास कार्य इसलिए ठप्प हो जाते हैं क्योंकि एक मंत्रालय की फाइल दूसरे मंत्रालय में अटकी रहती है।

सरकार के लिए योजनाओं को तय समय-सीमा में पूरा करना जरूरी है। हर काम के लिए एक समय निर्धारित हो और उस समय के अंदर वह काम पूरा होना चाहिए।

शासन से आशय किसी सामाजिक-राजनैतिक इकाई (जैसे नगर निगम, राज्य सरकार आदि) को इस प्रकार चलाना कि वह वांछित परिणाम दें। सुशासन के अन्तर्गत बहुत सी चीजें आतीं हैं जिनमें अच्छा बजट, सही प्रबंधन, कानून का शासन, सदाचार आदि। इसके विपरीत पारदर्शिता की कमियां सम्पूर्ण अभाव, जंगल राज, लोगों की कम भागीदारी, भ्रष्टाचार का बोलबाला आदि दु:शासन के लक्षण हैं।

सामान्यत: सुशासन की जो आठ विशेषताएं बताई जाती है जिनमें 1. विधि का शासन 2. समानताएवं समावेशन 3. भागीदारी 4. अनुक्रियता 5. बहुमत/मतैक्य 6. प्रभावशीलता दक्षता 7. पारदर्शिता 8. उत्तरदायित्व 9. निष्पक्ष आंकलन शामिल है।  

सरकारी-कर्मचारियों में सुशासन स्थापित करने के लिए पूर्व में भी राज्यों और केंद्र सरकार ने कई बार अभियान चलाया है लेकिन सुशासन शासन-प्रशासन की अंतरात्मा में आया जरूर पर अत्यल्प या सूक्ष्म रूप में, जबकि वास्तविकता इसके सार्वभौमिक, व्यापक और व्यवहारिक रूप की है। सुशासन तभी कारगर रूप से दिखेगा जब लोकतंत्र में कार्य करने वाले तंत्र को ठीक से कसा जाए। आम आदमी जो लोकशाही का स्वामी है सृजनकर्ता है उसका नित नव दिन के सरकारी काम समय पर हो जाये, तंत्र पर  भ्रष्टाचार, लालफीताशाही का मंत्र न दिखे बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों में संवेदनशीलता परिलक्षित दिखे मात्र नहीं बल्कि हो भी। मूलत: सरकारी तंत्र को असरकारी बनाने के लिए सबसे भरोसेमंद जुमला यही सुशासन है। जिसे शासन-प्रशासन अपने में दिखाना चाहता भी है।

राज्य सरकारों में सामान्य प्रशासन विभाग और राज्यों की राजधानियों में स्थित प्रशासन अकादमी इसके लिए काम कर रही हैं, प्रशिक्षण लोक सेवकों को देती हैं लेकिन तंत्र में अपेक्षित परिणाम सुधार के दिखना शेष है। शासकीय तंत्र को बेहतर बनाने में प्रवृत्ति में सुधार सबसे जरूरी होगा। प्रवृत्ति में सुधार का आशय क्या हो इसको लेकर केंद्रीय प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिशों में बहुत कुछ बातें लिखी है, इसके तत्कालीन अध्यक्ष वीरप्पा मोइली ने सरकारी तंत्र के सुधार हेतु जो विस्तृत सुझाव सिफारिश दिए हैं उनमें कतिपय का तो पालन हो गया जैसे प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना ताकि भ्रष्टाचार कम किया जा सके इसके लिए 2005 में सूचना का अधिकार लाया गया। इसी तरह सेवा प्रदाय व्यवस्था सुधरे लोगों का समय पर काम हो जाये उनकी फ़ाइल कहां है कब होगा काम यह सब पता चल जाये।

प्रशासनिक ढांचे में सुशासन लेने के उद्देश्य से वीरप्पा मोइली कमेटी गठित की गई है इस कमेटी ने अपनी सिफारिशों में बहुत कुछ बातें लिखी हैं। उन्होंने सरकारी तंत्र के सुधार हेतु जो विस्तृत सुझाव सिफारिश दिए हैं उनमें कतिपय का तो पालन हो गया जैसे प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना ताकि भ्रष्टाचार कम किया जा सके इसके लिए अक्टूबर 2005 में सूचना का अधिकार लायागया। इसी तरह सेवा प्रदाय व्यवस्था सुधरे लोगों का समय पर काम हो जाये उनकी फ़ाइल कहां है कब होगा काम यह सब पता चल जाये। इस समयबद्ध सेवाओं के प्रदाय हेतु सेवा का अधिकार 2010 में मध्यप्रदेश और 2011 में हमारे छत्तीसगढ़ में भी लागू हुआ। लोक सेवा गारंटी कानून केरूप में लेकिन इस कानून के राज्य में क्रियान्वयन वो लेकर बहुत कुछ किया जाना बाकी है। इन दोनों कानूनों को सुशासन स्थापित करने वाले प्रभावी उपाय में जाना जाता है।

तंत्र में सुधार हो उसके लिए मजबूत सुधार और क्रियान्वयन फील्ड में दिखना चाहिए। नागरिकों को पता भी चलना चाहिए। सुशासन के प्रमुख बिन्दुओं में नागरिक केंद्रित व्यवहार को सिखाया जाना जरूरी है।

सुशासन के लिए जरूरी है की शासकीय सेवकों में अभिप्रेरणा जो सेल्फ मोटिवेटेड हों । उनके सही काम को प्रोत्साहन मिले वे सही और त्वरित निर्णय सकें  तथा समस्या समाधान कर सके। शासकीय सेवको में समन्वय और टीम बिल्डिंग का निर्माण कर सके और वे नेतृत्व करना सीखें। प्रशासन में नैतिकता और मूल्यबोध हो, उत्तरदायित्व का बोध हो। आंतरिक प्रबंधन स्वयं का कार्यालय का ठीक हो। समय प्रबंधन ठीक ताकि जनता को तनाव और निराशा न होना पड़े। सुशासन स्थापित करने के लिए लोक सेवकों में तनाव प्रबंधन की व्यवस्था करना जरूरी है।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को सुशासन में देश में दूसरा स्थान मिला है। वहीं देश के टॉप-10 रहने योग्य राजधानियों में यह आठवें स्थान पर है। सेंटर फार साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में रायपुर को यह रैंकिंग दी है। सीएसई ने ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स-2020 जारी किया है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य की राजधानियां भारत के सबसे अधिक रहनेयोग्य शहरों में से हैं। इसके अनुसार, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर आठवें सर्वश्रेष्ठ राजधानी मेंशामिल है। इतना ही नहीं, रायपुर गुड गवर्नेस के टाप शहरों में भी शामिल है।

जब हम सुशासन की बात करते हैं तो हमें कुछ खास बातों की ओर भी देखने की जरूरत है। प्रशासन तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही, कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के अनुरूप कार्यव्यवहार, कार्यशैली, न्यायसंगत, कार्यप्रणाली, उत्तरदायित्व पूर्ण आचरण, विधि का शासन, समावेशी विकास, समस्याओं का त्वरित निराकरण और सबसे प्रमुख है भ्रष्टाचार मुक्त कार्यप्रणाली। दरअसल पूरी शासन व्यवस्था में सबसे ज्यादा कमी यदि किसी बात की होने लगी है तो वह है, संवेदनशीलता की। प्रशासकीय तंत्र धीरे-धीरे रोबोट में तब्दील होता जा रहा है। अपने बुद्धि, विवेक और नियम कानून की मंशा से अलग अपने आकाओं की मर्जी या अपने व्यक्तिगत हित-अहित को देखकर निर्णय लेने से, काम करने से प्रशासन तंत्र की साख जनता में गिरी हो। आज सुशासन के सामने जो सबसे बड़ी चुनौतियां हैं उनमें भ्रष्टाचार, लैंगिक असमानता, प्रशासन का केंद्रीकरण, सामाजिक एवं शैक्षणिक जागरूकता की कमी, सत्यनिष्ठा के बोध का अभाव अयोग्य और अक्षम हाथों में बड़े दायित्वों को सौंपे जाना। पदोन्नति और पोस्टिंग के लिए चापलूसी और जी-हुजूरी की व्यवस्था। बहुत सारे अच्छे कत्र्तव्यनिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी, चापलूसों के सामने सीआर की रेस में हार जाते हैं।

हमारे देश में 25 दिसंबर 2019 से सुशासन दिवस मनाने की शुरुआत हुई है। सुशासन लाने के लिए लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत ई-गर्वनिंग शुरू की गई। न्यूनतम सरकार अधिकत मशासन की अवधारणा जो सुशासन का मूल है उस पर अभी बहुत कुछ होना बाकी है। हमारे यहां तरह-तरह की घोषित-अघोषित सरकारे हैं जो नौकरशाही को अपने अनुसार चलाना चाहती है।