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निलंबित: कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता को अपने ही पार्टी के निर्णय पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करना पड़ा भारी महंगा

निलंबित: कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता को अपने ही पार्टी के निर्णय पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करना पड़ा भारी महंगा

रामनारायण गौतम/ सक्ती। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी एवम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के साथ-साथ अपने ही पार्टी के मुख्यमंत्री के निर्णय पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करना तथा नियुक्त पदाधिकारियों के कार्यक्षमता को हतोत्साहित करना कांग्रेस पार्टी के पूर्व संभागीय प्रवक्ता सतीश दीवान को भारी पड़ गया। जिला कांग्रेस कमेटी ने उन्हें पार्टी से निलंबित किया है। इस दौरान उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करते हुये 7 दिवस के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री एवम जांजगीर जिला कांग्रेस के संगठन प्रभारी अर्जुन तिवारी के निर्देश पर यह कार्यवाही की गई।

जिले के प्रभारी मंत्री ,जिले के कलेक्टर, जिला पंचायत के सी.ई.ओ., सहित जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधि सहित जिला कांग्रेस के संगठन प्रभारी समेत संगठन के अनेक नियुक्तियों का माखौल उड़ाते हुये उन्होंने जिस तरह से सोशल मीडिया में अपने नाम से कंटेंट प्रेषित किये उसे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने गंभीरता से लिया तथा श्री दीवान के इस कृत्य को अनुशासन हीनता के दायरे में लेते हुये उन्हें निलंबित करने हेतु बुधवार 8 दिसंबर को  जिला कांग्रेस को निर्देश दिया गया।

चूंकि  दीवान अभी पार्टी के किसी बड़े जिम्मेदारी के पद पर नही है इसलिए उन्हें निलंबित करने का अधिकार जिला कांग्रेस कमेटी को है।पहले कहा ये जा रहा था कि दीवान अपनी बात पार्टी फोरम में रखेंगे पर उन्होंने ऐसा न करते हुये अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी, प्रदेश कांग्रेस कमेटी तथा मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन के निर्णय का मखौल सोशल मीडिया में उड़ाते रहे।

माना जा रहा है कि जिले के अनुशासन हीन कांग्रेस की राजनीति को पटरी पर लाने की कवायद की शुरुआत है क्योंकि विगत दिवस प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख मोहन मरकाम के जनजागरण यात्रा का कार्यक्रम शिवरीनारायण व चाम्पा में कमजोर रहा तथा मरकाम ने जिले के बड़े नेताओं को मंच से नसीहत दिये उससे लग ही रहा था कि जिले की कांग्रेस की राजनीति के कामकाज  में कुछ बड़ा बदलाव होगा। जिले के संगठन प्रभारी को कड़ा निर्देश है कि संगठन में अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता रखते हुए कार्य करें।

बताया जा रहा है कि पूर्व में सम्पन्न नगरीय निकाय तथा त्रिस्तरीय पंचायतीराज संस्थाओं के निर्वाचन में हुये अनुशासन हीनता की फाइल भी खुलेगी तथा पार्टी का अनुशासन तोड़ने वालों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।