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दुग्ध उत्पादन कर बुंदेलखंड की 24 हजार से अधिक महिलाएं हुई आत्मनिर्भर

दुग्ध उत्पादन कर बुंदेलखंड की 24 हजार से अधिक महिलाएं हुई आत्मनिर्भर

झांसी 31 मई।  उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में जहां एक ओर रोजगार के अभाव में जबरदस्त पलायन की समस्या से जूझ रहा है वहीं दूसरी ओर इसी क्षेत्र के छह सौ एक गांवों की 24 हजार से अधिक महिलाएं दूध उत्पादन के काम से जुड़कर न केवल आत्मनिर्भर हुई हैं । अब यह महिलाएं अपने ही दम पर अपने परिवार को भरण पोषण कर पाने में सक्षम हो गयी हैं।

इस अभावग्रस्त क्षेत्र में विशेषकर महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूती देने का यह काम दिसम्बर 2020 में अस्तित्व में आया बलिनी दुग्ध उद्योग तेजी से कर रहा है। बुंदेलखंड के सात में से पांच जिलों के 601 गांवों की कुल 24 हजार 180 महिलाएं बलिनी से जुड़कर लाभान्वित हो रही हैं। कुछ महिलाएं सीधे तौर पर कंपनी की सदस्य हैं और कुछ स्वयं सहायता समूह बनाकर इससे जुड़ी हैं । कंपनी से जुड़ने का स्वरूप चाहे कैसा भी हो लेकिन सभी महिलाओं की सामाजिक –आर्थिक स्थिति में बदलाव हुआ है।

जहां इस क्षेत्र से पुरूष रोजगार के अभाव में दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं वहीं इसी क्षेत्र की महिलाएं बलिनी की मदद से आमदनी में इजाफा कर अपने परिवार का भरण पोषण कर पा रही हैं। बलिनी समूह के अधिकारी डा.ओपी सिंह के अनुसार कोरोना काल में कंपनी से जुड़ने वाली महिलाओं की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ है। पहले पांच सौ गांवों की 21 हजार महिलाएं जुड़ी थी लेकिन कोरोना काल में यह संख्या 601 गांव की 24 हजार 180 महिलाओं तक पहुंच गया ।

इन परिवारों का भरण पोषण महिलाएं अपने दम पर कर रहीं हैं और यह इजाफा बताता है कि महिलाएं कंपनी से जुड़कर फायदा कमा रही हैं। समूह से जुड़ी महिलाओं से मिली जानकारी से गांव की दूसरी महिलाओं को भी काफी फायदा हो रहा है। जो महिलाएं पहले दूधियों को कम कीमत पर अच्छा दूध बेचती थीं वह अब जागरूक हो गयी हैं और उनसे दूध लेने वाले दूधियों से भी मोलभाव कर लेतीं हैं। जो दूधिये पहले 25 से 30 रूपये किलों में दूध खरीद लेते थे वह भी अब 40 रूपये में दूध लेने लगे हैं। इस तरह समूह से जुड़ी महिलाओं ने अन्यों को भी जागरूक किया है और इसका फायदा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से महिलाओं को मिलने लगा है।

कंपनी महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का काम कर रही है जिसका डेढ वर्ष का टर्नओवर 80 करोड़ का है और 62 करोड रूपये सीधे महिलाओं के खाते में भेजे जा चुके हैं। बलिनी से जुड़ी बबीना विकासखंड के महिला समूह गांव की रसोई से की रविरंजना पाल को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्मानित भी किया था। इस समूह से जुड़ी महिलाएं और महिलाओं के सहायता समूह पुरजोर बता रहे हैं कि सामूहिक रूप से काम कर सरकार के “ सबका साथ सबका विकास ” के नारे को किस तरह से चरितार्थ किया जा सकता है।

कंपनी बुन्देलखंड के झांसी,जालौन,हमीरपुर,बांदा व चित्रकूट की कितनी महिलाओं और उनके परिवारों के आर्थिक और सामाजिक उन्नयन में लगी है। डा. सिंह ने बताया कि बलिनी के माध्यम से बुन्देलखंड के झांसी, जालौन, हमीरपुर, बांदा व चित्रकूट के अब 601 गांवों की महिलाओं को लाभ मिल रहा है। अभी ललितपुर व महोबा जिले को बलिनी से जोड़ा जाना है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री से निवेदन भी किया था। उन्होंने बताया कि कोरोना के चलते इसमें थोड़ी देरी हुई है। पत्राचार चल रहा है, जल्द ही ये दोनों जनपद भी बलिनी से लाभान्वित होंगे।

गौरतलब है कि 7 दिसम्बर 2020 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलिनी दुग्ध उत्पादन संस्थान का शुभारम्भ झांसी से किया था। महज एक वर्ष में बलिनी से बुन्देलखंड से सात में से पांच जिलों के 601 गांवों की कुल 24 हजार 180 महिलाएं जुड़कर लाभान्वित हो रही हैं महिलाओं के इस समूह में करीब 3 हजार से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं जबकि अन्य महिलाएं समूह के बाहर से हैं।