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स्मृतिशेष: सलाम तुम को ....- आबिद अली

स्मृतिशेष:  सलाम तुम को ....- आबिद अली

इप्टा रायगढ़ से जुड़े अजय आठले की पिछले साल कोरोना से हुई मृत्यु पर आबिद अली ने एक कविता लिखी थी ।

अब जब कोरोना ने आबिद अली को हमसे दूर कर दिया तब उन्हीं की यह कविता उन्ही को समर्पित ।

जैसा वे अजय के लिए महसूस करते थे वैसा ही आज लोग उनके लिए महसूस कर रहे हैं -


सलाम तुम को मेरे दोस्त

सलाम- ए - आख़िर।

सलाम तुम जो मज़लूमों

बेकस के साथ-साथ चले।।

सलाम तुमको हमेशा 

ही हक़ के साथ रहे।।

जहां पा रहना ख़ामोश

बस वहीं ख़ामोश रहे।।

ज़बान खोली वहां हक़

जहां पामाल हुआ।।

मैंने भूला नहीं भिलाई

का मंज़र अब तक।

मेरी ख़ातिर जहां, आवाज़ उठाई थी तुमने।

हम ना बिछड़े थे कभी

और ना बिछड़ेंगे कभी।।

जहां भी ज़ुल्म गर होगा।

साथ रहोगे तुम भी।।

कुछ दिनों पहले कहा था मैंने।

*कुछ लोग नहीं हो के यहीं होते हैं !

*कुछ लोग यहीं हो के नहीं होते हैं !!