विश्व रंगमंच दिवस : थिएटर-रायपुर' के तौर पर स्थापित हुआ है 'जनमंच, सडडू स्थित जनमंच पर पांच महीने में चालीस नाट्य प्रस्तुतियां और अन्य आयोजन

विश्व रंगमंच दिवस :  थिएटर-रायपुर' के तौर पर स्थापित हुआ है 'जनमंच, सडडू स्थित जनमंच पर पांच महीने में चालीस नाट्य प्रस्तुतियां और अन्य आयोजन

रायपुर. आज विश्व रंगमंच दिवस है. फिल्म और रंगमंच में बड़ा फर्क यह होता है कि रंगमंच पर आप जीवंत अभिनय देखते हैं. देश के नामचीन शहरों की तरह ही रायपुर में भी लगभग आठ महीने पहले सडडू में एक जनमंच की शुरूआत हुई जो छत्तीसगढ़ का पहला निजी एयरकंडीशंड नाटय थियटर माना जाता है जोकि बेहद कम समय में नाटक खेलने और साहित्यिक गतिविधियों के आयोजित होने का बड़ा, सस्ता और सुलभ केंद्र बन गया है. फिल्म, साहित्य और नाटक के कई यादगार सफल आयोजन हुए नतीजन बेहद कम समय में ही जनमंच ने देश में अपनी पहचान बना ली है. बुक मॉय शो' पर भी नाटक और रंगमंच उपलब्ध है.

हमारी छत : हमारा थियेटर
जनमंच के निदेशक सुभाष मिश्र और रचना मिश्र—जोकि रंगमंच के लिए तन—मन—धन से समर्पित हैं—ने बताया कि राजधानी रायपुर में एक भी प्राइवेट थिएटर नही था. कुछ शासकीय थिएटर हैं परंतु या तो वे बेहद महंगे हैं या फिर इतने व्यस्त रहते हैं कि नाटय प्रेमियों के लिए उपलब्ध नही हो पाते थे. इसलिए हमने खुद के खर्चे पर वातानुकूलित नाटय थिएटर 'जनमंच बनाने का फैसला किया. 01 अगस्त 2019 को देश के वरिष्ठतम कवि अरूण कमल, रंग निर्देशक संजय उपाध्याय और संस्कृति संचालक अनिल साहू के हाथों जनमंच उदघाटित हुआ.

दूसरे राज्यों से भी आ रही नाटय मंडलियां
जनमंच की खासियत यह हे कि यह अत्याधुनिक संसाधनों से लैस, 100 सीटर नाटय थिएटर हैं. यहां पर प्रति शनिवार नाटकों की प्रस्तुतियां दी जाती हैं. साथ ही अखिल भारतीय हबीब तनवीर नाटय स्पर्धा, मुक्तिबोध नाटय समारोह, अंतरराष्टीय फिल्म महोत्सव जैसे चर्चित आयोजन भी होते रहे हैं. शनिवार को वीक एण्ड थिएटर आयोजित होता है जिसमें नवोदित रंगकर्मी और कलाकार नि:शुल्क प्रस्तुतियां देते हैं. जनमंच में अब तक 40 मंचीय प्रस्तुतियों के साथ नाट्य कार्यशाला और गोष्ठियों का आयोजन किया जा चुका है. देशभर  की रंग संस्थाएं यहां आकर नाट्य मंचन कर रही हैं.  

कई नाटय निर्देशकों ने किया मंचन
राजधानी के पहले टेरिस थिएटर में अब तक फिल्म निर्देशक संजय उपाध्याय की 18 दिवसीय नाट्य कार्यशाला, उपाध्याय निर्देशित नाटक 'हरसिंगार' का मंचन, हरिशंकर परसाई जंयती पर “हमारा समय और परसाई“ विषय पर डॉ स्नेहलता पाठक, अख्तर अली से बातचीत, रचना मिश्रा द्वारा निर्देशित नाटक प्रेमचंद के फटे जूते के दृश्यों की प्रस्तुति, नाटय निर्देशक हीरा मानिकपुरी, सिगमा उपाध्याय, सुरभि श्रीवास्तव, यशवंत आनंद गुप्ता, योग मिश्रा, नाट्य लेखक अख्तर अली, वरिष्ठ पत्रकार गिरजाशंकर की उपस्थिति में रंग विमर्श आयोजित हो चुका है. इसके अलावा इंदौर, जबलपुर, नागपुर, भोपाल, रायगढ़ की नाटय मंडलियों ने जनमंच में नाटक खेले हैं. इसी तरह कई प्रसिदध नाटक भी खेले गए जिनमें नाटक वो दिन रंग बिरंगे, गांधी, निठल्ले की डायरी, दो कौड़ी का खेल इत्यादि नाटकों का मंचन किया गया.

सिर्फ बिजली बिल देना होता है
श्री मिश्र ने बताया कि रायपुर के बाहर की जो भी संस्थाएँ यहाँ आकर नाट्य मंचन करती हैं, उनके लिए रहने और खाने की सामान्य व्यवस्था की जाती है. नाट्य संस्थाएँ बुक माई शो या अन्य माध्यमों से टिकिट या सहयोग से अपनी संस्था, शो लिए राशि एकत्र करती हैं. सकती हैं. सर्वसुविधायुक्त 100 दर्शक क्षमता वाले एयर कंडिशन जनमंच में लाईट, माईक, अटैच बाथरूम तथा ग्रीन रूम की व्यवस्था है. नाट्य संस्थांओं को केवल बिजली का वास्तविक खपत के आधार पर मीटर रीडिंग के अनुसार बिल की राशि देनी होती है. जो भी संस्थाएँ जनमंच में नाट्य मंचन करने की इच्छुक हैं, वे सादर आमंत्रित हैं.

जब विनोद कुमार शुक्ल जनमंच पहुंचे और कविताएं सुनाईं

सुप्रसिदध साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल एक दिन प्रसिदध कहानीकार ध्रुव शुक्ल और आलोचक डॉ राजेन्द्र मिश्र एक साथ जनमंच थिएटर पहुंचे तथा रंगमंच सहित साहित्य प्रेमियों को अपनी लिखी चुनिंदा कविताएं सुनाईं. रंगमंच के निदेशक सुभाष मिश्र कहते हैं कि वह दिन हमारे लिए सौभाग्यशाली था कि इस उम्र में, जब विनोद जी कहीं नही जाते, सडडू स्थित जनमंच में पधारे और तीनों लेखकों ने अपनी रचनाएं सुनाईं. विनोद जी हमारे शहर रायपुर में रहते हैं. ये हमारा सौभाग्य है कि हमें हमेशा उनका सानिध्य मिलता है. मैं उनकी कविता की तरह पहले उनके पास, फिर वो ऐश्वर्या किंगडम स्थित मेरे घर आये. उनके साथ ध्रुव शुक्ल और आलोचक डॉ राजेन्द्र मिश्र भी साथ थे. विनोदजी शाम को किताब मेला भी गए.