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तेरा मेरा मनवाः आप पूछे हम बताएं, मन से मन की उलझन सुलझाएं - डॉ. ममता व्यास

तेरा मेरा मनवाः आप पूछे हम बताएं, मन से मन की उलझन सुलझाएं - डॉ. ममता व्यास

संक्रामक रोगों का हम सभी पर एक गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है, जो संक्रमित हैं वो भी प्रभावित होते हैं और जो संक्रमित नहीं हैं वे भी प्रभावित होते हैं। 

कोरोना ने एक बार फिर पलट के दस्तक दी है फिर से लोगों में चिंता बढ़ी हैं। मानसिक रूप से हम सभी कहीं न कहीं डरे हुये हैं मनवा पर आने वाली चिट्ठियों में कोरोना से संबन्धित प्रश्न ज्यादा थे इसलिए इस बार मनवा पर कोरोना की बात ।

समस्या – पिछले बरस पूरा साल एक डर और घबराहट में निकला था। कोरोना की वजह से मेरी चाची का देहांत हो जाने से अब चाचा बहुत डर गए हैं | कोरोना फिर से लौट आया है ये खबरे सुनकर उन्होने खाना पीना छोड़ दिया है। सारा दिन वे या तो अखबार की खबरें पढ़ -पढ़ कर सुनाते है या फिर टीवी पर न्यूज सुनते रहते हैं। रातों को सो नहीं पा रहे, बस कमरे में गोल गोल चक्कर लगाते रहते हैं, सुझाव दीजिये।

समाधान - आजकल टीवी और सोशल मीडिया पर चारों तरफ़ कोरोना वायरस से जुड़ी ख़बरें आ रही हैं. हर छोटी-बड़ी, सही-गलत ख़बर लोगों तक पहुंच रही है। डॉक्टर्स के मुताबिक़ इससे भी लोगों की परेशानी बढ़ गई है, क्योंकि वो एक ही तरह की बातें सुन, देख व पढ़ रहे हैं और फिर सोच भी वही रहे हैं। 

आपके चाचाजी स्ट्रेस या तनाव में होने की वजह से कमरे में चक्कर लगाते हैं । मेरी सलाह तो यही है कुछ दिन ना अखबार पढ़ा जाये ना ज्यादा न्यूज सुनी जाये। खबरों के ओवर डोज़ से मानसिक परेशानी बढ़ रही है। उनसे बातचीत करे लेकिन कोरोना के विषय पर नहीं अन्य मनोरंजक विषय पर बातचीत करें ताकि उनका ध्यान दूसरी जगह लगे। खान पान का ध्यान रखें।

समस्या- मेरे पति ने जब से सुना है कि दोबारा लॉक डाउन लगने वाला है, उन्होंने घर में सामान भरना शुरू कर दिया है। बहुत से फेस मॉस्क, टॉयलेट रोल्स, सेनेटाइजर की कई बोतले और खाने के सामान को ज्यादा से ज्यादा जमा कर लिया है। डिब्बा बंद चीजें, नमकीन बिस्किट आदि रोज ला ला कर रखते जाते हैं। उनके मन में लॉक डाउन को लेकर एक अंजाना सा डर दिखता है। मैं उनकी इस आदत से बहुत परेशान हो गयी हूँ।

समाधान – कई सारी मानसिक समस्याओं के साथ कुछ इस तरह की दिलचस्प समस्याएँ भी सामने आ रही हैं, जहां लोगों को  बहुत सारे भोजन,सब्जियाँ आदि का स्टोर करते देखा गया है | ये भी एक तरह के तनाव, भय,ओर चिंता की वजह से होता है। जब व्यक्ति किसी आकस्मिक खतरे से खौफ खाता है। बीमारी से ना तो ज्यादा डरने की जरूरत होती है ना लापरवाह हो जाने की। जरूरत है तो बस संयम बनाए रखने की।

 समस्या – मेरी समस्या यह है कि मुझे समझ नहीं आ रहा कि कोरोना वायरस की वजह से मौत किस तरह से होती है। कुछ लोग ठीक होकर घर आ रहे हैं तो कुछ कभी घर लौटे ही नहीं । क्या करे क्या ना करे समझ नहीं आ रहा। कोरोना से मानसिक बीमारियों का क्या कोई संबंध हैं ? मुझे और मेरे परिवार को क्या करना चाहिए ।

समस्या – सबसे पहले तो यही कि दो गज की दूरी , मास्क है जरूरी | इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। हैंड सैनिटाइजर का उपयोग करें। अब बात कोरोना की वजह से होने वाले मानसिक रोगों की बात। तो ऐसा है कि कोरोना के दौरान कई तरह की मानसिक स्वास्थ्य चिंताओं को भी रेखांकित किया, जिनमें अवसाद, तनाव और मनोविकृति और पैनिक अटैक शामिल हैं। कोरोना संक्रमण होने के बाद पीड़ित रोगियों में मानसिक रोग के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। कोविड-19 के कारण हमारे फेफड़ों में सूजन आती है। धीरे-धीरे यह शरीर के अन्य अंगों की तरफ भी बढ़ने लगती है। जिन रोगियों में यह सूजन दिमाग तक पहुंच जाती है, उनके ब्रेन की कार्यप्रणाली में बाधा उत्पन्न होती है और उन्हें अलग-अलग तरह की मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जिन लोगों का इम्यून सिस्टम मजबूत है वे जल्दी ही इस संक्रमन से निकल आते हैं कुछ लोग चपेट में आ जाते हैं। खुद का और अपने परिवार का ध्यान रखे। 

समस्या – मेरे बड़े भाई पिछले दिनों कोरोना पॉज़िटिव निकले थे जल्दी ही वे स्वस्थ होकर घर भी आ गए थे, लेकिन उन्हें अब भी लगता है कि उन्हें फिर से कोरोना हो जाएगा | वे बहुत तनाव में रहते हैं एकदम खामोश हो गए हैं उन्हें लगता है अगर उन्हें कुछ हो गया तो परिवार का क्या होगा | उन्हें कैसे समझाये ?

समाधान – जी, यह भी देखने में आ रहा है कि जो मरीज कोरोना वाइरस को हराकर स्वस्थ हो चुके हैं, उनके मन से अभी तक डर नहीं गया है। कुछ तो समाचार ,न्यूज और सोशल साइट्स पर मिलने वाली आधी सच्ची आधी झूठी खबरों के कारण माहौल ऐसा बन गया है। लोगों के मन से डर जा नहीं रहा है | अस्पतालों की माने तो पाँच से सात मरीज मानसिक तनाव के आ रहे हैं। जिनमें तनाव , चिंता , डर शामिल है। लोगों के व्यवहार में बदलाव आ रहे हैं। ऐसे समय में संयम, धीरज और साहस से काम लेना होगा। महामारी को लेकर इतनी अनिश्चितता और उलझन है कि कब तक सब ठीक होगा, पता नहीं. ऐसे में सभी के तनाव में आने का ख़तरा बना हुआ है। 

इस तनाव का असर शरीर, दिमाग़, भावनाओं और व्यवहार पर पड़ता है. हर किसी पर इसका अलग-अलग असर होता है। ज्यादा परेशानी हो तो डॉक्टर से या काउन्सलर से संपर्क करे।