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प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदेव साय का आरोप, 'सीएम ने विपक्ष का अपमान किया..भाजपा के उच्च स्तरीय शिष्टमंडल को नही दिया मिलने का समय..क्रिकेट करवाने का समय था लेकिन विपक्ष से मिलने का नही है.. नौ सूत्रीय मांग दोहराई

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदेव साय का आरोप, 'सीएम ने विपक्ष का अपमान किया..भाजपा के उच्च स्तरीय शिष्टमंडल को नही दिया मिलने का समय..क्रिकेट करवाने का समय था लेकिन विपक्ष से मिलने का नही है.. नौ सूत्रीय मांग दोहराई

जनधारा समार
रायपुर. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने आज वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कांग्रेस सरकार पर विपक्ष को अपमानित करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भाजपा का उच्च स्तरीय शिष्टमंडल मुख्यमंत्री से प्रत्यक्ष मिलकर उनसे कोरोना महामारी के बारे में चर्चा करना चाहता था लेकिन उन्होंने मिलने का समय नही दिया और कांग्रेस के हैंडल से हिकारत भरे सन्देश ट्वीट किये. श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने इतना अमर्यादित लोकतांत्रिक व्यवहार इससे पहले कभी नहीं देखा.


श्री साय ने बताया कि हमने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी से प्रत्यक्ष मिलने का समय चाहा था. भाजपा का उच्च स्तरीय शिष्टमंडल जिसमें नेता प्रतिपक्ष धरम लाल कौशिक, सांसद सुनील सोनी और विधायक बृजमोहन अग्रवाल और अजय चंद्राकर के साथ मैं खुद मुख्यमंत्री से चर्चा कर कुछ ज़रूरी सुझाव देना चाहते थे लेकिन उन्होंने मिलने का समय देना तो दूर, काफी ठंडी प्रतिक्रिया दी और कांग्रेस के हैंडल से हिकारत भरे सन्देश ट्वीट किये गए.

इससे दुर्भाग्यजनक कुछ नहीं हो सकता कि नकली शराब पीने से प्रदेश के दस व्यक्ति की मृत्यु हो गयी तो उसे भी इन्होंने शराब की कमाई करने के लिए बहाने के रूप में उपयोग कर लिया. इतने बड़े आपदा को भी विकृत अवसर में बदलने की इस कोशिश की जितनी निंदा की जाय, यह कम है. इस तरह इतने गंभीर मुद्दे का मज़ाक उड़ाना और विपक्ष को अपमानित करना असहनीय है. इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.

पूर्व लोकसभा सदस्य रहे विष्णुदेव साय ने कहा कि मुझे सीएम कार्यालय से बताया गया कि 12 तारीख को वर्चुअल माध्यम से हम बात कर सकते हैं. जिस तरह के हालात है प्रदेश में, जहां एक-एक दिन में परिस्थियां विकराल हो रही है वहां विपक्ष से मिलने के लिए 12 तारीख का, वह भी आभासीय माध्यम से समय देना यह दिखाता है कि विधायी मर्यादाओं और परम्पराओं तक के प्रति कितना हिकारत रखती है कांग्रेस. इस सरकार के लिए किस तरह ऐसे कठिन समय में भी विपक्ष के अनुभव और उसके फीडबैक आदि महत्वहीन हैं. श्री साय ने कहा कि कोरोना के कठिन समय में प्रदेश को अपने हाल पर छोड़ लगातार अन्य प्रदेशों में व्यस्त रहने, क्रिकेट आदि देखने और उसका मुफ्त पास गांवों तक में बांट कर कोरोना फैलाने का समय था इनके पास लेकिन, विपक्ष के शिष्टमंडल से मिलने का समय नहीं है. छत्तीसगढ़ ने इतना अमर्यादित लोकतांत्रिक व्यवहार इससे पहले कभी नहीं देखा.

श्री साय ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ आज भयंकर दौर से गुजर रहा है। हालात भयावह हैं। प्रदेश में संक्रमितों का आंकड़ा 8.50 लाख पहुंचने वाले हैं। और रिकवरी रेट 80 प्रतिशत के आसपास आ गया है। 10 हज़ार से अधिक लोग अभी तक अकाल काल-कवलित हो चुके हैं। रोज सैकड़ों मौतें हो रही हैं। ये तो वे आंकड़े हैं जो सरकार ने जारी किये हैं। बड़ी संख्या में न तो संक्रमण रजिस्टर हो रहे हैं और न ही सभी मौतों की जानकारी दर्ज हो पा रही है. फिर शासकीय स्तर पर ही आंकड़े छिपाये जा रहे हैं। श्मसानों में कई-कई दिन की प्रतीक्षा सूची है. मर्च्युरी में कई गुना अधिक लाश रखने पड़ रहे हैं. इससे वीभत्स हालात की कल्पना भी नहीं की जा सकती है.

उन्होंने सरकार से मांग की कि
1. माननीय उच्च न्यायालय के संबंधित आदेश के अनुपालन में प्रदेश में टीकाकरण के लिए भेदभाव रहित नीति बनायी जाय. ऐसी नीति जिसमें सर्व समाज का हित निहित हो.
2. अन्त्योदय, बीपीएल और एपीएल श्रेणी के लिए अलग-अलग कस्बों में केंद्र का निर्माण किया जाना निहायत ही अव्यावहारिक निर्णय है. हर केंद्र पर सभी श्रेणी के बूथ होने चाहिए.
3. भारतीय टीके के खिलाफ प्रदेश में राजनीतिक कारणों से लगातार दुष्प्रचार किये गए. इस कारण गांवों-कस्बों में टीका लगाने गए कर्मियों पर हमले की ख़बरें लगातार आ रही है. ऐसे कर्मियों की सुरक्षा हो. टीकाकर्मियों का पर्याप्त बीमा भी हो. साथ ही जनमानस में फैलाई गयी भ्रांतियों को दूर करने प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान चलाया जाना चाहिए.
4. टीके की वर्तमान कमी का एक कारण समय से आर्डर नहीं दे पाना भी है. हमारे पड़ोसी नए राज्य ने अनुमति मिलते ही 8 करोड़ टीकों के लिए आदेश कर दिया. जबकि हम अंतिम दिन तक पत्र लिखते रहे. अतः आग्रह है कि अनावश्यक पत्राचार न कर त्वरित निर्णय लें.
5. प्रदेश में करीब 2.50 लाख टीके बर्बाद हुए हैं. इसे रोकने ‘केरल मॉडल’ से प्रेरणा लें. वहां उन्होंने ‘वेस्टेज फैक्टर’ के मद्देनजर दिए जाने वाले खुराक का बेहतरीन उपयोग कर केंद्र द्वारा मिले कुल डोज का 102 प्रतिशत टीकाकरण कर लिया. इससे सीखना चाहिए.
6. छत्तीसगढ़ में टेस्टिंग कम होते जाना चिंताजनक है. आरटीपीसीआर एंटीजन और ट्रू नॉट सभी पर्याप्त संख्या में हो. जांच की कमी के कारण भी प्रदेश में मृत्यु दर बढ़ना चिंताजनक है.
7. हर पंचायत में ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर और दवा किट आदि शीघ्र उपलब्ध कराये जायें.
8. पत्रकारों को ‘फ्रंटलाइन वर्कर’ मानते हुए इनका प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण हो.
9. नियमों को धत्ता बता कर टीके लगवाने की अनेक ख़बरें चिंताजनक है. इस पर सख्ती से लगाम लगाया जाना चाहिए. नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो.