महज दस हजार रुपए की लागत से छत्तीसगढ़ के युवा टीम ने बना दिया वेंटिलेटर

महज दस हजार रुपए की लागत से छत्तीसगढ़ के युवा टीम ने बना दिया वेंटिलेटर


भिलाई।   छत्तीसगढ़ में कोरोना महामारी से लड़ने के लिए  संकट की घड़ी में भिलाई के सात युवाओं की  इंजीनियर्स  टीम ने थ्री डी प्रिंटर तकनीक से एक ऐसा पोर्टेबल वेंटिलेटर  बनाया है।  जो  हर उम्र के मरीजों का पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन देने में सक्षम है। 

 भिलाई के इन  युवाओं की टीम ने लाखों की बजाय महज चंद हजार रुपए में सस्ता और कारगार वेंटिलेंटर बना दिया है। इस  वेंटिलेंटर के जरिये  कोरोना के हर उम्र के मरीजों को ऑक्सीजन देने के लिए इसमें ऑटो फीचर भी डेवलप किया गया है।  इंजीनियर्स की टीम ने  दावा किया है कि यदि छत्तीसगढ़ सरकार उनके इस मॉडल को मंजूरी देती है तो उनकी टीम बहुत कम समय में सरकार के सहयोग से पांच हजार से ज्यादा वेंटिलेंटर कोरोना मरीजों के इलाज के लिए सेवा भावना से तैयार कर सकती है।

छत्तीसगढ़ में टैक बी नाम की स्टार्टअप कंपनी चलाने वाले टीम के इलेक्ट्रॉनिक एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर रिंकू साहू ने बताया कोरोना के गंभीर मरीज बिना वेंटिलेंटर के जिंदा नहीं रह सकते। मरीजों को सबसे ज्यादा सांस लेने में तकलीफ होती है। लॉकडाउन की वजह से इतनी बड़ी मात्रा में वेंटिलेटर मंगाना और बनाना भी संभव नहीं है।  पहले इसके  परीक्षण के बाद वेंटिलेटर को रि डिजाइन किया ताकि इसे आसानी से बेहद कम समय में एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट किया जा सके।  

 भिलाई के यंग इंजीनियर्स ने अपनी इनोवेशन से महज दस हजार रुपए की लागत से इस वेटिंलेटर को तैयार किया है। जुगाड़ और थ्री डी तकनीक से बने इस वेंटिलेटर को अब बस मरीजों की जान बचाने का इंतजार है।युवाओं ने वेंटिलेटर से पहले एन 96 मास्क और फेस शील्ड भी थ्री डी प्रिंटर तकनीक की सहायता से तैयार किया है। 

भिलाई, कोरबा और बलोदाबाजार के सात युवकों की टीम में विकास चौधरी, अभिषेक अंबस्टा, रिंकू साहू, अमित जैन, मनीष अग्रवाल, अनूप सिन्हा और सौरभ वर्मा शामिल हैं।

chandra shekhar