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बेरोजगार किसान मोर्चा के माध्यम से शिवसैनिकों ने प्रदेश में फ़िर दिखाई ताक़त

बेरोजगार किसान मोर्चा के माध्यम से शिवसैनिकों ने प्रदेश में फ़िर दिखाई ताक़त

जगदलपुर, 21 मार्च। शिवसेना द्वारा छत्तीसगढ़ के बेरोजगारों और किसानों की समस्याओं को उठाने का प्रयास वृहत पैमाने पर लगातार किया जा रहा है।दो माह पूर्व बेरोजगार किसान मोर्चा के प्रथम आयोजन किया गया, जिसमें मोर्चा की शुरुआत महाराष्ट्र राज्य की सीमाई क्षेत्र देवरी से राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई होते हुए रायपुर में यात्रा मोर्चा का समापन हुआ था।

शिवसेना छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रमुख धनजंय सिंह परिहार के नेतृत्व में शिवसैनिकों ने इस बार बेमेतरा कवर्धा मुंगेली होते हुए बिलासपुर में बेरोजगार किसान मोर्चा के दूसरे चरण की सफ़ल समापन किया।

मोर्चा के सफ़ल समापन के बाद लौटे शिवसैनिक

इस मोर्चा में शिवसेना के बस्तर इकाई से 50 शिवसैनिक शामिल हुए थे, शिवसेना बस्तर के जिलाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय् ने बताया कि बेरोजगार किसान मोर्चा छत्तीसगढ़ के सभी बेरोजगार युवाओं और किसानों की समसमस्याओं को उठाने का प्रयास है। बस्तर ज़िले से 5 स्कॉर्पियों वाहन में कुल 50 कार्यकर्ता व पदाधिकारी बेरोजगार किसान मोर्चा में शामिल रहें और 20 मार्च को सुबह 6 बजे वापस पहुंचे।

गौरतलब होकि शिवसेना ने दिसंबर में "नगरनार मोर्चा" निकाला और उसके बाद केंद्रीय मंत्री को बस्तर आना पड़ा और  भाजपा से जुड़े लोगों ने उन्हें बताया कि बस्तर में अब उनकी लोकप्रियता कम हो रही है, मोर्चा के असर इतना व्यापक हुआ कि छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री ने विधानसभा में शासकीय निर्णय की घोषणा किया कि राज्य सरकार प्लांट खरीदकर संचालित करेगी।

अब शिवसेना ने छत्तीसगढ़ के बेरोजगार भाई बहनों की आवाज़ बड़े पैमाने पर उठाई है.. सरकारी विभागों में वर्षों से खाली पड़े रिक्तियों को जल्द से जल्द भरने की मांग एवं निजी व्यवसाय या अन्य काम आरंभ करने पंचायत या नगरीय स्तर पर ही कम कागज़ी कार्यवाही व बिना किसी गारंटी लिए ही युवाओं को स्वरोजगार आरंभ करने के लिए लोन उपलब्ध कराया जाए ऐसी मांग उठाई है।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में शिवसेना की अगुवाई वाली सरकार के मुखिया ने महाराष्ट्र में मराठी युवाओं को रोज़गार में 80 प्रतिशत का आरक्षण दिया है, इसी तरह बस्तर के रोज़गार पर सिर्फ बस्तर के युवाओं को, छत्तीसगढ़ के युवाओं को छत्तीसगढ़ में 80 प्रतिशत का आरक्षण अर्थात संभाग और ज़िले के युवाओं को किसी उद्योग या सरकारी विभागों में न्यूनतम 60 प्रतिशत और 20 प्रतिशत राज्य स्तर पर और 20 प्रतिशत देश के अन्य युवाओं को प्राथमिकता तय किया जावे। इसके लिए प्रशासन और सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।  

कई वर्षों से बस्तर में ठंडी पड़ी शिवसेना की संगठनात्मक ढांचा को भी डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय् के जिलाध्यक्ष बनने के बाद लाभ हुआ है और संगठन में लगातार विस्तार हो रहा है। जिलाध्यक्ष के साथ मोर्चा में शामिल होकर लौटे बस्तर के शिवसैनिक स्वयं को हजारों की संख्या में उपस्थित कार्यकर्ताओं के बीच 3 तीन दिनों तक रहें। मोर्चा के रूप में उन्होंने अपने पार्टी की ताकत को देखा व प्रदेश और अन्य ज़िलेके कार्यकर्ताओं से मुलाक़ात किया। वापस लौटे शिवसैनिकों ने हनरे प्रतिनिधि को बताया कि उनका आत्मविश्वास अब पहले से अधिक बढ़ गया है, बस्तर में तेज़ी से शिवसेना का विस्तार करेंगे।