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वनोपज जाँच नाका में स्थानीयों की जगह बाहरी राज्य के लोगों को नौकरी पर रखा गया

वनोपज जाँच नाका में स्थानीयों की जगह बाहरी राज्य के लोगों को नौकरी पर रखा गया

दंतेवाड़ा, 5 नवंबर। सम्पूर्ण बस्तर संभाग में पाँचवी अनुसूची लगी हुई है। इन बातों को ध्यान में रखते  हुये इन क्षेत्रों में राज्यपाल का हस्तक्षेप रहता है। सरकारी विभागों मे रिक्त पद या फिर अस्थायी पदों पर नियुक्ति होती है, तो उस नियुक्ति में स्थानियों को पहले प्राथमिकता दी जाती है। इन सब के बावजूद सत्ता की हनक वन परिक्षेत्र दंतेवाड़ा, वनोपज जाँच नाका में देखने को मिला है। नाका खोलने का काम स्थानीय लोगों को नही दे कर बाहरी राज्य से आये लोंगो को दिया गया है। 

 सूत्रों के हवाले से निकल कर यह जानकारी सामने आ रही है। वनोपज जाँच नाक में दंतेवाड़ा जिले के स्थानीय बेरोजगार युवकों को नियुक्त किया जाना था। मगर विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा बाहरी राज्य से आये हुए युवकों को जाँच नाका में नौकरी देने का ताजा मामला सामने आया है। 

गौरतलब करने वाली बात यह है कि कोरोना के मुश्किल वक़्त में काम नहीं होने की वजह से लोगों का फिर से पलायन हो रहा है। स्थानीय लोग काम की तलाश में पड़ोसी राज्यों की तरफ पलायन करने को मजबूर है। इन सबके बावजूद राजनैतिक पहुंच एवं सत्ता की हनक से सरकारी विभाग में नौकरी हासील करने का नायाब तरीका वन  परिक्षेत्र कार्यालय दंतेवाड़ा में देखने को मिल रहा है। 

आपको बताना लाजमी है, की विभाग के अधिकारी, एवम कर्मचारी भी इस सम्बन्ध  में गोल-मोल जवाब दे रहे है। और हैरत की बात यह है कि विभाग ने जिन दो लोगो को वनोपज जाँच नाका में नौकरी पर रखा है। उनका नाम ,पता भी विभाग को मालूम नही है। फिर भी विभाग सरकारी संस्थाओं में बगैर जाँच पड़ताल किये कैसे बाहरी राज्य के लोगों को बैठने की अनुमति दे सकता है, यह जाँच का विषय है। 

इस मामले में दंतेवाड़ा के सहायक परिक्षेत्र अधिकारी का कहना है कि इस सम्बंध में  विभाग के सहायक परिक्षेत्र अधिकारी से फोन पर सम्पर्क किया तो उन्होंने बताया कि इस बारे में मुझे कुछ भी जानकारी नहीं है।