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कांग्रेस के कई बड़े नेता, आइएएस और आइपीएस पर ईडी का शिकंजा

कांग्रेस के कई बड़े नेता, आइएएस और आइपीएस पर ईडी का शिकंजा

भोपाल।   कमल नाथ सरकार के कार्यकाल में पड़े आयकर विभाग के छापों के दौरान जब्त दस्तावेजों की आंच में कांग्रेस के कई बड़े नेता, आइएएस और आइपीएस अधिकारी झुलसेंगे। अभी चुनाव आयोग ने चार वरिष्ठ पुलिस अधिकारी झुलसेंगे।

अभी चुनाव आयोग ने चार वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) में प्रकरण दर्ज कराने को कहा है। तैयारी यह है कि ईओडब्ल्यू में प्रकरण दर्ज होते ही ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) इसमें शामिल होगा और इसके बाद कांग्रेस के कई नेताओं की घेराबंदी की जाएगी। दस्तावेजों में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), ऊर्जा, नगरीय विकास व प्रशासन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई), महिला बाल विकास और एमपी एग्रो जैसे विभागों से भी लेन-देन का जिक्र किया गया है।

ऐसे में इन विभागों के दर्जनभर तत्कालीन आईएएस अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी। जिन पुलिस अधिकारियों का नाम सामने आ चुका है, पुलिस मुख्यालय से किसी न किसी रूप से संबद्ध रहे हैं, ऐसे में आइपीएस अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है। गौरतलब है कि आयकर छापों के दौरान जब्त दस्तावेतों की केंद्रीय प्रत्यरक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने चुनाव आयोग को भेजा था।

वहां से राज्य सरकार के पास रिपोर्ट आ गई है। इसमें तीन आईपीएस वी. मधुकुमार, सुशोवन बनर्जी, संजय माने और राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी अरुण मिश्रा के खिलाफ ईओडब्ल्यू में प्रकरण दर्ज कराने को कहा गया है। अभी मामला सरकार स्तर पर विचाराधीन है, लेकिन यह तय है कि जब भी प्रकरण दर्ज कराया जाएगा और जांच आगे बढ़ेगी, कई अधिकारियों की जवादही तय होगी। जिन लोगों के यहां आयकर के छापे पड़े थे, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबी रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि ईडी की जांच में छापों की जद में आए प्रवीण कक्कड़, राजेंद्र मिगलानी, अश्विन शर्मा आदि पर शिकंजा कसेगा। इनसे तत्काल पूछताछ शुरू की जा सकती है।

संपत्ति बचाने के लिए वे उन लोगों के नाम बता सकते हैं, जिनके इशारे पर वे काम कर रहे थे। कहा जा रहा है कि कांग्रेस मुख्यालय के साथ कांग्रेस के कई नेताओं को भी करोड़ों रुपये भेजे गए हैं। इनमें से कई नेता कांग्रेस छोड़कर अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं। पुलिस मुख्यालय में भी चिंता - जिन चार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही गई है, उनका संबंध किसी न किसी रूप में पुलिस मुख्यालय से रहा है। इनके कार्रवाई की जद में आते ही पुलिस मुख्यालय के कई अधिकारियों में चिता है।

मुख्यालय को अभी तक अधिकारिक रूप से इस बारे में कोई पत्र नहीं मिला है, लेकिन सभी को मामले की जानकारी है। अधिकारियों की चिंता का सबब यह है कि जांच में कही कोई कड़ी जुड़ी तो और भी नाम सामने आ सकते हैं। पुलिस अधिकारियों के नाम घोटालों में सामने आने को लेकर सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक (लोकायुक्त) अरुण गुर्टू ने कहा कि निगरानी तंत्र में कमी आने से अनैतिक कार्यों में बढ़ोतरी हो रही है। यह चिंता का विषय है। पहले अधिकारी अपने अधीनस्थों के क्रियान्वयन पर बारीकी से नजर रखते थे।

इस व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकता है। ये नेता भी मुश्किल में- बिसाहूलाल साहू, प्रद्मुन सिंह तोमर, राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, एंदल सिंह कंषाना, गिर्राज दंडौतिया, रणवीर जाटव, कमलेश जाटव, रक्षा संतराम सिनोरिया, प्रद्मुन सिंह लोधी, राहुल लोधी, नारायण सिंह पटेल, सुमित्रा देवी कास्डेकर, मनोज चौधरी, रामबाई, संजीव सिंह, अजय सिंह, कंप्यूटर बाबा, रणदीप सुरजेवाला, दिग्विजय सिंह, अभिषेक मिश्रा, फुंदेलाल मार्का, विजय राघवेंद्र सिंह, ओमकार सिंह मरकाम, संजय उइके, भूपेंद्र मरावी, सज्जन सिंह, बाबू जंडेल, बैजनाथ कुशवाह, प्रवीण पाठक, घनश्याम सिंह, गोपाल सिंह चौहान, तनवर लोधी, नीरज दीक्षित, विक्रम सिंह नातीराजा, शिवदयाल बागरी, सिद्धार्थ कुशवाह, संजय यादव, शशांक भार्गव, आरिफ मसूद, गावेर्धन सिंह दांगी, बापूसिंह तोमर, महेश परमार, राजेश कुमार, राणा विक्रम सिंह, देवेंद्र पटेल, रामलाल मालवीय, झूमा सोलंकी, सचिन बिड़ला, रवि जोशी, केदार डाबर, ग्यारसीलाल रावत, चंद्रभागा किराड़े, महेश रावत पटेल कलावती भूरिया, वीरसिंह भूरिया, बालसंह मेढ़ा, प्रताप ग्रेवाल, पाचीलाल मेढ़ा, हर्षविजय सिंह गेहलोत, मीनाक्षी नटराजन, कमल मरावी, प्रमिला सिंह, मधु भगत, देवाशीष जरारिया, शशि कर्णावत, शैलेंद्र सिंह, दीवान, कविता नातीराजा, मुकेश श्रीवास्तव, बृजेश पटेल आदि बताया जा रहा है कि इनके नाम लेनेदेन को लेकर दस्तावेजों में सामने आए हैं।