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डॉ एम डी सिंह की कविताः तूफां में न सही लहर में तो हूँ

डॉ एम डी सिंह  की कविताः तूफां में न सही लहर में तो हूँ


तूफां में न सही लहर में तो हूँ 

शहर में ना सही सहर में तो हूँ


माना ग़ज़ल में बस तुम ही तुम हो 

मुकम्मल में न सही बहर में तो हूँ 


बहे तुम जा रहे बह मैं भी रहा 

नदी में ना सही नहर में तो हूँ


कुछ तो है जो मिटाए ना मिटती 

दवा में ना सही ज़हर में तो हूँ 


रहम कर न कर मुझपे तेरी मर्जी

रहमत मे न सही कहर में तो हूँ 


सहर- सुबह, मुकम्मल- पूरा, बहर- एक लाइन

रहम- दया,रहमत- दयालुता,कहर- तांडव