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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से- देश को खाप पंचायत में बदलने की कोशिश

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से- देश को खाप पंचायत में बदलने की कोशिश


हिन्दू अस्मिता और हिन्दू बेटियों की कथित रक्षा और उन्हें प्यार के चंगुल से बचाने के नाम परभाजपा शासित राज्यों में लव जिहाद के नाम पर कानून बनाकर कड़ी कार्यवाही की बात तेजी सेइनदिनों की जा रही है। कबीर साहेब का एक दोहा है।

प्रेम न बारी उपजे, प्रेम न हाट बिकाए ।

राजा प्रजा जो ही रुचे, सिस दे ही ले जाए ।

हरियाणा के मंत्री अनिल विज का बयान आया है कि जब से हरियाणा राज्य बना है, तब से अबतक धर्म परिवर्तन की जांच कराकर, लव जिहाद के मामले खोले जायेंगे। उन्होंने राज्य के डीजीपी को इस आशय का आदेश भी जारी किया है। हरियाणा अपनी खाप पंचायतों के लिए राष्ट्रीय पहचान रखता है। अभी तक अकेले हरियाणा में 2005 तक 605 हत्याएं खाप पंचायत के नाम पर की जा चुकी है। हरियाणा में साक्षरता की दर अधिक होने के बावजूद वहां का लिंग अनुपात बाकी राज्यों की तुलना में कम है। भारत से प्रति 1000 पुरुष 943 लिंग अनुपात है, वहीं हरियाणा में 877 हैं। बेटे की लालसा वाले इस प्रदेश में बेटियां कम है। खाप पंचायतों के फरमान पर हरियाणा में पिता, माता और दादी के गौत्र में विवाह वर्जित है। इसके अलावा यदि कोई लड़की अंतर जातीय विवाह करती है और पंचायतें, परिवार उसके खिलाफ है, तो उन्हें खाप पंचायत का क्रोध झेलना पड़ता है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला की दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है। वर्ष 2015 तक के तीन साल की अवधि में दहेज हत्या 2471 मामले सामने आये जिनमें सबसे ज्यादा मामले योगी जी के उत्तरप्रदेश से 7048 थे। 

जो लोग लव जिहाद की बातें कर रहे हैं उन्हें दहेज की शिकार औरते नहीं दिखती, उन्हें कुपोषण के शिकार बच्चे नहीं दिखते। पांच साल से कम उम्र का हर तीसरा बच्चा यानी 70 करोड़ बच्चे कुपोषण का शिकार हैं।

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भी लव जिहाद को लेकर कानून बनाने की बात कह रहे हैं। दरअसल ये सब खाप पंचायत जैसी व्यवस्था को कानूनी रूप देकर प्रेम को भी अपने तरीके से नियंत्रित करके पूरे देश को मध्ययुगीन व्यवस्था में ढकेलना चाहते हैं। कभी मुस्लिमों की बढ़ती आबादी, तो कभी तीन विवाह का खौफ दिखाकर, तो कभी उनके द्वारा कोरोना वायरस फैलाने की बात कहकर, कभी हिन्दुत्व को खतरा बताकर, कभी धर्म परिवर्तन का बात कहकर इस देश की धर्म निरपेक्षता को कमजोर करने की, लोगो को आपस में लड़ाने की कोशिश की जाती रही है। देश की जनता को मूल मुद्दों से भटकाकर भावनात्मक मुद्दों में उलझा कर, झूठी बातों फैलाकर ऐसे तर्क और आंकड़े देना जिनका जमीनी हकीकत से कोई वास्ता नहीं है, यह इनका सोचा समझा एजेंडा है। देश की बहुसंख्यक आबादी और बाकी अल्पसंख्यक आबादी देश के बीच भाईचारे से रहती है, उसके बीच धर्म की बातें लाकर ये अलगाव करना चाहते हैं। इसके पहले भी तीन तलाक और कश्मीर की स्वायत्ता की बात करने वाले इन लोगों ने ऐसा माहौल और प्रचार किया, मानों तीन तलाक के बाद मुस्लिम महिलाओं के हालात सुधर जायेंगे या कश्मीर में धारा 370 के साथ शांति-व्यवस्था, अमन वापस आ जायेगा। कभी मंदिर, कभी मस्जिद, कभी घर वापसी, कभी गोरक्षा के नाम पर ये देश के लोगों को आपस में उलझाकर, उन विषयों पर बात करने से रोकते हैं जिससे हमारा जीवन जुड़ा है।

मौजूद शताब्दी के दो दशकों में वैश्विक पूंजीवाद के प्रसार के साथ वैश्विक स्तर पर धार्मिक कट्टरता भी पसर रही है। पिछली सदी के अंतिम दशक में अमेरिका के पेंटागन से फ्रांसिस फुकुयामा का सिद्धांत 'सभ्यताओं के संघर्षÓ (क्लैश ऑफ सिविलाइजेशन) सामने आया था जो वस्तुत: अमेरिकी साम्राज्यवाद की रीति-नीति को वैध ठहराने और वैश्विक तेल भंडार पर कब्ज़ा करने की और सैन्य उद्योग को गतिशील बनाये रखने की नीयत से बड़ी चालाकी के साथ पेश किया गया था। इसके बाद सुनियोजित तरीके से लगातार ऐसा वातावरण निर्मित किया गया कि धार्मिक पहचान को सामुदायिक अस्मिता का सबसे महत्तवपूर्ण पहलू करार दिया जाए और उस पर लगातार ज़ोर दिया जाए। इससे जनता के दिमाग में यह बात बैठ गयी कि अन्य धर्मावलम्बी नागरिक उनके दुश्मन हैं। इस मानसिक धरातल के तैयार हो जाने के बाद कट्टरपंथियों को, चाहे वे किसी भी देश या किसी भी धर्म के हों, बल मिला। आतंकवाद को धर्म से जोडऩे की भूमिका भी इससे निर्मित हुई। इस्लामी आतंकवाद जैसा शब्द इसी दौरान प्रचलित हुआ। आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, यह तार्किक विचार है। लेकिन धर्म के आधार पर उसकी ब्रांडिंग करने से निहित राजनैतिक स्वार्थ को पनाह देने का तर्क तैयार हो जाता है। इस तरह अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान द्वारा प्रस्तुत  सभ्यताओं के संघर्ष के सिद्धांत को वैधानिकता मिलने लगती है। इसका इस्तेमाल विभिन्न देशों में कट्टरपंथी ताकतें करती हैं। वे अपनी उद्देश्य पूर्ति के लिए अन्य धर्मावलम्बी नागरिकों को निशाना बनाती हैं। लोकतांत्रिक देशों में भी इस प्रवृत्ति से जुड़ी राजनीति को पहचानना मुश्किल नहीं है। वे अपने लक्ष्य की खातिर लोकतांत्रिक औज़ारों का भी प्रयोग करती हैं। भारत में लव जिहाद को लेकर कुछ राज्यों में कानून बनाने की जो सुगबुगाहट हो रही है। इसे व्यापक वैश्विक सन्दर्भ में भी समझने की ज़रूरत है। किसी अन्य देश में किसी खास समुदाय के कतिपय कट्टरपंथ तत्वों की विध्वंसक गतिविधि के तोड़ में उससे मिलती-जुलती कार्रवाई करना कट्टरपंथ का जवाब नहीं, बल्कि उसी मानसिकता के आगे आत्मसमर्पण कर देना है। इससे कोई निहित राजनीतिक स्वार्थ भले सध जाए, मानवता का भला नहीं हो सकता।

हमारे संविधान में सभी नागरिकों को मौलिक अधिकार दिए गए हैं जिसमें से एक धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार भी शामिल है। इसके अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को किसी भी धर्म को मानने, पालन करने व प्रचार करने की स्वतंत्रता है। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को कोई विशेष धर्म मानने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

वहीं स्पेशल मैरेज एक्ट भी है जिसमें अलग-अलग धर्म से आने वाले लड़के और लड़की बिना अपना धर्म बदले शादी कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए कई प्रावधान भी किए गए हैं जिसे पूरा करने के बाद ही आप शादी कर सकते हैं। हरियाणा के बल्लभगढ़ में निकिता तोमर नाम की लड़की को गोली मार दी गई थी और ये गोली तौसीफ़ नाम के युवक ने उन पर चलाई थी। इस पूरे मामले को 'लव जिहादÓ के मामले की तरह पेश करने की कोशिश की जा रही है। मध्यप्रदेश के उज्जैन से भाजपा सांसद अनिल फिरोजिया ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखा जिसमें उनसे लव जिहाद के खिलाफ संसद में एक सख्त कानून लाने का अनुरोध किया गया है। इससे पहले यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर कानून लाने की बात कह चुके हैं।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि लव जिहाद के खिलाफ प्रदेश में कानून बनाया जाएगा। प्रदेश में लव जिहाद एवं शादी के लिए धर्म परिवर्तन किसी भी रूप में नहीं चलेगा। यह पूर्ण रूप से अवैध और गैर-कानूनी है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश में अपराधी तत्वों, विशेष रूप से बेटियों के विरूद्ध अपराध करने वालों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। इस संबंध में नियमित रूप से फॉलोअप किया जाए।

हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि चूंकि बल्लभगढ़ की महिला हत्या का मामला 'लव जिहादÓ से जुड़ा हुआ है, इसलिए केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकार भी इसे गंभीरता से ले रही है। 

दरअसल, हमारे देश में आजादी के पहले से ही हिन्दू-मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई को आपस में बांटने की तैयारी होती रही है। अंग्रेजों की फूट डालो राज करो की नीति को जीवित रखकर बहुत सारी ताकतें, धर्म, जाति, सामुदाय आदि के नाम पर जन भावनाओं को भड़काकर उसे आपस में बांटने का कोई अवसर नहीं छोडऩा चाहते। लव जिहाद के नाम पर फिर एक बार पुराने जिन्न का बोतल से निकालने की कोशिश हो रही है। लगता है पूरे देश को कुछ लोग खाप पंचायतो की तरह चलाना चाहते हैं।