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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -कोरोना के बाद बदलता बाजार

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से  -कोरोना के बाद बदलता बाजार

-सुभाष मिश्र
अकबर इलाहाबादी की तरह अब आप यह भी नहीं कह सकते की-
दुनिया में हूं दुनिया का तलबगार नहीं हूं बाजार से गुजरा हूं खरीदार नहीं हूं।
बाजार तो आपके घर आ चुका है आपको बाजार जाने की जरूरत नहीं है। घर बैठे बोलो बाबूजी क्या क्या खरीदोगे। अगला आदमी आपसे भवानी प्रसाद मिश्र की तरह कहेगा-
जी हां हुजूर मैं गीत बेचता हूं, मैं तरह तरह के गीत बेचता हूं, मैं किसिम किसिम के गीत बेचता हूं।
अब आपको मिर्जा गालिब की तरह यह नहीं कहना पड़ेगा -
कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा ग़ालिब और कहाँ वाइज़
पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले
क्योंकि सरकार ने आनलाईन मय (याने शराब) होम डिलेवरी के जरिये आपके घर पहुंच रही है। होटल के सेफ अब होटल खुलने का इंतजार करने के बजाए आनलाईन आकर तरह-तरह की रेसीपी सीखा रहे हैं। यूट्यूब एक तरह से खाना बनाने की सिखाने की पाठशाला, कोचिंग इंस्टिटूयूट बन गया है। आज बाजार का फंडा वन क्लीक एंड थींग विल बी एट यूवर्स डोर साइड हो गया है।
कोरोना संक्रमण ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। लोगों की जीवनचर्या में बदलाव आया है। अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता बढ़ी है। बहुत सारे लोगों को घर में रहकर घर के कार्यो में हाथ बटाने की आदत भी विकसित हुई है। भीड़-भाड़ वाली जगहों पर लोग जाने से कतराने लगे हैं। पाबंदियों की वजह से मॉल, सिनेमा हाल और बहुत सारी दुकानें बंद होने के कारण लोगों की अनावश्यक खरीदी की आदतों पर भी अंकुश लगा है। बहुत बड़ी संख्या में लोगों को अपनी नौकरी से रोजगार से हाथ धोना पड़ा है। ऐसे समय में बहुत से लोगों ने अपनी ऐसी प्रतिभा को सामने लाने की कोशिश की है, जो उन्हें व्यस्त रखे या घर में बैठे रोजगार के अवसर दें। ऑनलाईन खरीदी-बिक्री और भुगतान का चलन बढऩे से अब 24ङ्ग7 चौबीसो घंटों का बारामासी बाजार हमारे मोबाईल, कम्प्यूटर, लैपटाप पर मौजूद है। लोग संक्रमण से बचने के लिए अब आनलाईन बातचीत, खरीददारी, पढ़ाई और अपनी समस्या बीमारी आदि के हल खोज रहे हैं। विशेषज्ञ सेवा के लोग अब आनलाईन उपस्थित रहकर वो सब बता रहे हैं, दिखा रहे हैं, सीखा रहे हैं जिसकी जरूरत रोजमर्रा के जीवन में है। बाजार अब नये रूप में हमारे दरवाजे पर मौजूद है। हमें जो चाहिए हम आनलाईन शॉपिंग के जरिए वह सब मंगा सकते हैं। स्थानीय स्तर पर भी बहुत सारी प्रतिभाशाली महिलाएं बुटिक, फैशन और खानपान की चीजों के साथ अपने घर से इस तरह का व्यवसाय चला रही है। सब्जी, फल, केक, बुके, कपड़े से लेकर आनलाईन म्युजिक, योगा, ट्यूशन क्लास तक अब स्थानीय स्तर पर घर से संचालित हो रहा है। स्टार्टअप को लेकर सरकार की सोच में भी पिछले कुछ सालों में परिवर्तन आया है। सरकार स्कील डेव्हलपमेंट के कार्यों पर फोकस करके तरह-तरह के रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करके स्वयं का रोजगार करने के लिए बैंकों के माध्यम से कम ब्याज दरों पर लोन उपलब्ध करा रही है। आनलाईन शापिंग के कारण बड़े-बड़े शो रूम, दुकाने बंद होने की कगार पर है। मॉल की दुकानें बंद है, पर घर से चलने वाली सभी छोटी दुकाने चालू है, जिन्हें मॉल की तरह मैंटेनेस महंगे किराये, बिजली बिल नहीं भरने है। लोग उपभोक्ता के रूप में सजग होकर आनलाईन रेट चेक करने लगे हैं जो अक्सर दुकान के रेट से कम होता है।
अस्पतालों और डाक्टर्स के पास जाकर कोरोना संक्रमित होने के संभावित खतरों से बचने के लिए बहुत सारे लोग अब टेली वैक्सीन सिस्टम पर भरोसा कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण के कारण शिक्षा के क्षेत्र में भी बहुत बड़ा बदलाव आया है। वहां ई-लर्निंग का उदय हुआ है, जहां बच्चों को डिजिटल माध्यम से पढ़ाया जा रहा है। कोरोना जैसे संक्रमण से बचने के लिए सार्वजनिक जगहों, बस, ट्रेन, ऑफिस, स्कूल, आडिटोरियम, सिनेमा हॉल आदि जगहों को नए ढंग से डिजाइन किया जाएगा। हाल ही में अमेज़ॅन, ग्रोफ़र्स, फ्लिपकार्ट और बिग बास्केट जैसे ई-कॉमर्स खिलाडिय़ों ने मांग में अचानक वृद्धि देखी। औसत उपभोक्ता के शॉपिंग पैटर्न में आमूल-चूल बदलाव आया है। कोरोना गाईड लाईन के परिपालन में सरकारों द्वारा जारी किए गए स्टे एट होम जैसे निर्देशों ने बाजार में एक नया बदलाव किया है। कैसे अन्य व्यवसायों के बीच रेस्तरां, फार्मेसियों और किराना मालिकों द्वारा भविष्य की डिलीवरी को संभाला जाएगा।
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) पर लेनदेन की मात्रा एक साल में दोगुने से अधिक हो गई, जो मार्च 2021 में 2.73 बिलियन को छू गई, जबकि एक साल पहले यह 1.25 बिलियन थी। आनलाईन भुगतान 73 प्रतिशत तक बढ़ा है। तमाम क्षेत्रों में डिजिटल की दखलदंजी बढ़ी है।
कोरोना काल में आनलाईन शॉपिंग में बड़ा उछाल आया है। इस दौरान ग्रासरी, किताबें, ब्यूटी सप्लाई, बच्चों के सामान जैसी चीजों की आनलाईन खरीदारी जमकर हुई है। कोरोना महामारी के चलते हमारे जीवन में हमेशा के लिए काफी कुछ बदल गया है। जैसे हम घर से काम करने के लिए अनुकूलित हो रहें है, ईमेल, चैट और वीडियो कांफ्रेसिंग पर हमारी निर्भरता बढ़ रही है, वीडियो कालिंग अब समय काटने के लिए नहीं, बल्कि काम के लिए हो रही है। व्यापार जगत, आईटी सेक्टर, अन्य कंपनियां ही नहीं, आम व्यक्ति भी वीडियो कांफ्रेसिंग और आनलाईन कार्य को ज्यादा महत्व दे रहा है। कोरोना काल में भय के कारण यात्राएं बहुत कम हुई हैं जिसकी वजह से यात्राओं पर होने वाला व्यय बहुत कम हुआ है। यह माना जा रहा था कि वर्क फ्राम होम के कारण एक बड़ा सामाजिक बदलाव लैंगिक विभेद को लेकर होगा, इसमें कमी आएगी। लेकिन यह भी सच है कि कोरोना काल में महिलाओं के साथ घरेलु हिंसा के प्रकरण भी बढ़े हैं। बाजार अपना स्वरूप मनुष्य की जरूरतों और समय के साथ बदलता है और बदलता रहेगा।