ऐसे कैसे होगा कोरोना से जंग साहब, प्रेमनगर में 1 माह से नहीं है 108 एम्बुलेन्स, प्रशासन के कार्य पर उठ रहे सवाल

ऐसे कैसे होगा कोरोना से जंग साहब, प्रेमनगर में 1 माह से नहीं है 108 एम्बुलेन्स, प्रशासन के कार्य पर उठ रहे सवाल

चंद्र प्रकाश साहू 

सूरजपुर, 5 अप्रेल। प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल राज्य में स्वास्थ्य सेवाय बेहतर करने व covid-19 कोरोना से जैसे महामारी से जनता को बचाने के लिए कई तरह के कार्य कर रहे है। निजी अस्पतालों का अधिकरण कर रहे है तो वहीं सूरजपुर जिला की शासकीय स्वास्थ्य महकमा चरमर्राती हुई प्रतीत हो रही है। जिला के प्रेमनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का विवादों से मानो पुराना नाता रहा हो। यहां के अस्पताल में मौजूद आपातकाल सेवा एंबुलेंस 108 हमेशा ही खराब स्थिति में रही है। प्रेमनगर स्वास्थ्य केंद्र में पिछले 1 महीनों से एमजेन्सी एम्बुलेंस 108 खराब है जो खड़ी है। इस वाहन के इंजन में टेक्निकल फाल्ट होने कारण वहां आवागमन नहीं कर पा रही है। जिस कारण समीप के विकासखंड रामानुज नगर से वहां के एम्बुलेन्स 108 जोकि समय रहने पर प्रेमनगर के भी आपातकाल मरीजों को लाने ले जाने का कार्य कर रहा है। जानकार बताते हैं कि प्रेमनगर अस्पताल में 108 को लेकर आए दिन विवादों में रहा है इससे पूर्व प्रेमनगर के 108 एम्बुलेन्स करीब 7-8 महीने भर तक रामानुजनगर  अटैच किया गया था।

 जो काफी विरोध के बाद 108 एम्बुलेन्स आया जो ज्यादातर दूरदराज क्षेत्रों में नहीं जा पाता था जिसकी सूचना मीडिया में आए दिन आने के बाद भी जिला प्रशासन के कानों में जूं नहीं रेंगी जिसका खामियाजा आगे निकल के आ रहा है। कि इस कोरोना जैसे महामारी से निपटने जे लिए प्रदेश सरकार तमाम तरह की कार्य करती हुई दिख रही है किंतु सूरजपुर जिला प्रशासन इस ओर शून्य नजर आ रहे हैं। जबकि प्रेमनगर विकाशखण्ड वनांचल क्षेत्र में बसा हुआ है प्रेमनगर के आसपास क्षेत्र ज्यादातर जंगलों के समीप में कई ऐसे गांव और मोहल्ले हैं सड़क भी नही है। ऐसे में किसी व्यक्ति की दुर्घटना हो जाने पर जब तक 108 एम्बुलेन्स पहुँचेगा तब तक दुर्घटना ग्रस्त मरीज की जान जा सकती है। जो पहले भी जान गवां चुके है। 

 1 महीने से एम्बुलेन्स नहीं होना प्रशासन के कार्य पर उठ रहे सवाल

इस संबंध में प्रेमनगर जिला पंचायत सदस्य अजय श्याम ने चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश की सरकार जनता को बेहतर स्वास्थ्य उपलब्ध कराने की बात कहती है जो जमीन पर नही दिख रहा है। इसका उदाहरण सूरजपुर जिला के प्रेमनगर विकासखंड के अस्पताल को देख सकते हैं। प्रेमनगर अस्प्ताल में बीते महीनों से 108 ना होना वो भी इस संवेदन सील समय मे जब स्वास्थ्य की अत्यंत आवश्कता है।  इस दौरान भी बंद होना जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने आगे कहा की कि स्वास्थ्य मंत्री को तत्काल संज्ञान में लेकर लापरवाह अधिकारियों के ऊपर तत्काल से करवाई किया जाना चाहिए।

इस संबंध में जब हम सूरजपुर एस डी एम पुष्पेंद्र शर्मा से चर्चा करके जानकारी जाननी चाहिए जिस पर उन्होंने कुछ कहने से मना करते हुए कहां की इस संबंध मैं अथोराईड नहीं हूं। आप क्लेक्टर सर से बात कर लीजिए ऐसे में दिखाता है कि एक जिम्मेदार अधिकारी किस तरह से अपने कार्य से भागते हुए प्रतीत हो रहे हैं। 

इस सम्बंध में सूरजपुर सीएचमो आरएस सिंह ने कहा कि जानकारी नही है आपके द्वारा मिल रही है। दिखवाता हूं