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अध्यात्मिक वातावरण में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ समिति की बैठक

अध्यात्मिक वातावरण में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ समिति की बैठक


भागवत प्रवाह अध्यात्मिक सेवा संस्थान छत्तीसगढ़ के प्रांतीय कार्य समिति की बैठक आज अध्यात्मिक वातावरण में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस गरिमामय बैठक में सर्व प्रथम दीप प्रज्वलित करते हुए देव पूजन व बांके बिहारी की आराधना की गई। तत्पश्चात संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष आचार्य राजेंद्र शर्मा ने भागवत प्रवाह के सदस्यों को ही अपने जीवन की पूंजी बताते हुए कहा कि आप हम सब मिलकर समाज सेवा के कार्यों को अंजाम दें। भागवत प्रवाह के प्रांतीय कार्यकारिणी को संबोधित करते हुए संरक्षक अधिवक्ता चितरंजय सिंह पटेल ने सदस्यों का अभिनंदन करते हुए संस्थान के उद्देश्य को अमलीजामा पहनाने जुट जाने का आग्रह करते हुए कहा कि कोविड के दरमियान अकाल मृत्यु के शिकार सभी मृतात्माओं के मोक्ष के लिए लिए सामूहिक भागवत कथा का आयोजन भागवत प्रवाह की ओर से किए जाने का आग्रह किया जिसका सभी ने मुक्त कंठ से सराहना करते हुए वातावरण सामान्य होने पर शीध्र भागवत कथा आयोजित करने का निर्णय लिया। सचिव एच एल जायसवाल ने प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए तुर्री धाम में बांके बिहारी मंदिर निर्माण का प्रस्ताव रखा जिसे ध्वनि मत से स्वीकार किया गया। साथ ही सदस्यता अभियान व बांके बिहारी मंदिर हेतु धन संग्रह की रसीद जारी किया गया। 

एक महत्त्वपूर्ण निर्णय के अनुसार भागवत प्रवाह का यथाशीघ्र पंजीकरण के लिए संरक्षक चितरंजय सिंह पटेल अधिवक्ता को अधिवक्ता को अधिकृत किया गया क्योंकि पंजीकरण के पश्चात ही बैंक खाता का संचालन सुचारू रूप से हो सकेगा। 

समारोह को उपाध्यक्ष लक्ष्मण चंद्रा, जीवनलाल कैवर्त, रितेश देवांगन, राजेश शर्मा,दीनदयाल गबेल, दिलेश्वर चंद्रा, निराकर पटेल (सरिया) नारी शक्तियों में श्रीमती भगवती जायसवाल, कोमल जायसवाल, श्रीमती अंबिका बंछोर, श्रीमती मीना सोनी, श्रीमती करुणा शर्मा आदि उपस्थित रहे। आचार्य देवकृष्ण के द्वारा आभार प्रदर्शन करते हुए भागवत प्रवाह के विकास व विस्तार के लिए आग्रह किया गया।

इस बैठक के समापन पर आचार्य राजेंद्र जी की माता स्व खीर बाई व स्मृति शेष अनुज गिरधर शर्मा के वार्षिक श्राद्ध के अवसर पर पूष्पांजली देकर श्रद्धांजली अर्पित की गई।

तत्पश्चात भोजन ग्रहण के उपरांत मंदिर निर्माण के लिए उड़ीसा से आए कारीगरों की टीम को तुर्री धाम ले जाकर स्थल निरीक्षण कराया गया जहां रुपेश जायसवाल व मेनका जायसवाल के द्वारा सपरिवार भागवत प्रवाह के सभी बंधुओं का आत्मीय स्वागत किया गया।