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पशु पालन विभाग ने नही कराया जांच, लेकिन मृत मुर्गो में दिखे बर्ड फ्लू के लक्षण

पशु पालन विभाग ने नही कराया जांच, लेकिन मृत मुर्गो में दिखे बर्ड फ्लू के लक्षण

चंद्र प्रकाश साहू

सुरजपुर। जिले के विभिन्न विकाश खंडों में बर्ड फ्लू के दस्तक का क्यास लगाया जा रहा है। जिले के वेटनरी विभाग बर्ड फ्लू से भले ही पल्ला झाड़ ले किन्तु ग्रामीण अंचलों में मुर्गियों की संदिग्ध परिस्थियों में मौत हो रही है। 

विदित है कि जिले के रामानुजनगर के पत्रापाली ग्राम में पिछले दिनों कुछ कुआं, बकुला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। जिनका सेंपल लेना तक पशुपालन विभाग उचित नही समझा है। वहीं रामानुजनगर के एक निजी बॉयलर पोल्ट्री फार्म में बीते दिनो मिनी ट्रक जिसका क्रमांक cg 07BW 1395 में मृत पोल्ट्री फार्म मुर्गा को उतारा जा रहा था। जिसकी सूचना स्थानीय पत्रकारों ने तहसीलदार को दी। मौके पर तहसीलदार राधे श्याम तिर्की पहुँचे जहां देखा कि बाड़ी में रखे पैरा में   छुपा कर रखा गया था। जिसे तहसीलदार श्री तिर्की के मौजूदगी में पॉल्ट्री फार्म संचालक के मालिक को दफनाने के आदेश दिए थे। जिसे संचालक ने दफना दिया गया है। 

सुरजपुर नगर मुख्यालय के वार्ड क्रमांक 14 जो कि मानपुर बैगापारा में आता है। यहां निवासरत पितमाबर आत्मज स्व राम प्रताप जो कि चेरवा जाति आदिवासी है। ये बताते है कि पिछले एक माह से लगभग 30 मुर्गियों की मौत हो गई है। इन मुर्गियो को सर्दी की तरह लक्ष्ण थे। ये चिल्लाते थे। मृत मुर्गियों को जमीन में दफन कर दिया गया है तो वहीं कुछ मुर्गी को ऐसे ही खुले में फेंक दिया गया है। आगे कहते है कि पशु चिकित्सको द्वारा किसी प्रकार से कोई जागरुकता नही किया गया है। ना ही कोई बीमारी के बारे में।सूचना दी गई है। 

वहीं राम कुमार आत्मज स्व. पुरुषोत्तम ये भी मानपुर के बैगापारा के ही निवासी है। आगे कहते है कि 10 -15 मुर्गी लोकल नस्ल के पाले हुए थे। जिसमें से तीन बड़े मुर्गी-मुर्ग़ा की मौत हो चुकी है तो वहीं 7- 8 मुर्गी के बच्चो की मौत हो चुकी है। साथ ही कुछ बड़े मुर्गी जो कि बीमार है झुप रहे है। मरे हुए मुर्गियो को खुले में फेंक दिया गया है। 

तहसीलदार के कार्य से उठे सवाल 

रामानुजनगर प्रभारी तहसीलदार राधे श्याम तिर्की  से जब इस सम्बंध में चर्चा की गई तब उन्होंने कहा कि रामानुजनगर पशु चिकित्सकों से इस सम्बंध में चर्चा की गई । जिन्होंने बताया कि बर्ड फ्लू के लक्ष्ण नही है। जिस कारण दफनाया गया है। कल मेरे द्वारा पशु चिकित्सक के साथ जांच किया जाएगा।

जबकि पशु चिकित्सको की टीम तहसील स्तर में बनाया गया है। जिनका कार्य मॉनिटरिंग करना है। किंतु पशु चिकित्सक इतने लापरवाह है कि दफ्तर में ही बैठ कर खाना पूर्ति के कार्य करते है। इन मृत मुर्गों को ले जाया कहा जा रहा था। इस सम्बध में संचालक ने कुछ नही बताया गया।  

बतादें कि कुछ माह पूर्व रामानुजनगर के आदर्श गोठांन कृष्ण पुर में एक ग्रामीण के मवेशी मौत संदिग्ध स्थिति में हो गई थी। किन्तु रामानुजनगर के पशु चिकित्सक द्वारा कोरोना का बहाना बना कर पोस्टमार्टम करना उचित नही समझा था। और गोठान परिसर में ही दफन कर दिया गया है।