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भारतमाला परियोजना अंतर्गत किसानों के अधिग्रहित भूमि की उचित मुआवजे की मांग

भारतमाला परियोजना अंतर्गत किसानों के अधिग्रहित भूमि की उचित मुआवजे की मांग

दुर्ग । केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अन्तर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग द्वारा बनने वाले दुर्ग- रायपुर बायपास राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 53 अर्थात भारतमाला परियोजना के दायरे में सरकार द्वारा अर्जित किए जाने वाले किसानों के भूमि का राज्य सरकार द्वारा निर्धारित बाजार मूल्य के 4 गुना राशि के बावजूद किसानों को दोगुनी राशि दिए जाने के संबंध में थनौद एवं आसपास के लगभग 45 किसानों ने गृह मंत्री को आवेदन प्रेषित कर उचित मुआवजे की मांग की है। व सरकार के नियमों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग आवेदन में उल्लेख किया गया है। विदित हो कि इसके पूर्व भी गृह एवं लोक निर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू के संज्ञान में यह मामला पहले भी आ चुका है जिस पर उन्होंने त्वरित कार्रवाई वह उचित मुआवजे किसानों को मिलने की बात कही थी लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। ज्ञापन में स्पष्ट उल्लेख यह भी है कि दुर्ग जिले के अन्य ग्रामों में बाजार मूल्य से 4 गुनी राशि किसानों को दी जा रही है जबकि दुर्ग ग्रामीण विधानसभा के क्षेत्र में यह राशि मात्र दुगनी है जोकि विधि सम्मत नहीं है और यह दुर्ग ग्रामीण विधानसभा के किसानों के साथ नाइंसाफी है।
क्षेत्रीय जनपद सदस्य हरेंद्र देव ने कहा की यह किसानों के साथ धोखा और अन्याय है अगर मुआवजे की राशि में धोखाधड़ी की जा रही है तो प्रशासन आने वाले समय में उग्र आंदोलन को झेलने के लिए तैयार रहे। मेरे क्षेत्र के किसानों के साथ धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विदित हो कि यह ज्ञापन मार्च महीने में सौंपा गया था कोरोना काल के चलते उचित कार्रवाई नहीं हो पाई है इस मामले पर क्षेत्रीय जनपद सदस्य हरेंद्र देव ने बताया कि यह मामला किसानों से जुड़े मुद्दे हैं और बेहद ही संवेदनशील है राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे कार्य के लिए किसान अपनी जमीन छोड़ रहे तो उन्हें मुआवजा भी उचित मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर जानकारी मिली है की पाटन क्षेत्र में मुआवजे की राशि चौगुनी है जबकि हमारे दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में मात्र दोगुनी राशि अधिकारियों के गलतियों की वजह से भुगतान करने की चर्चा गांव में है। जोकि न्याय संगत नहीं है। सदन में मुद्दा उठाया जाएगा और किसानों को राहत दिलाने के लिए भरसक प्रयास करेंगे।