breaking news New

कृषि कानून पर बिफरे किसान, राज्यभर में आंदोलन करने की चेतावनी, राज्य का नया कानून विश्वसनीय नही

कृषि कानून पर बिफरे किसान, राज्यभर में आंदोलन करने की चेतावनी, राज्य का नया कानून विश्वसनीय नही

रायपुर. केंद्र सरकार के कृषि संबंधी तीनों कानूनों के विरोध में कल प्रदेशभर में प्रदर्शन हुआ। रायपुर में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सामने सेरीखेड़ी में छत्तीसगढ़ किसान-मजदूर महासंघ से जुड़े संगठनों ने छोटी सभा कर केंद्र सरकार को चेतावनी दी। बाद में नेशनल हाईवे पर चक्काजाम किया। किसानों ने सड़क पर खड़े होकर कार्पोरेट भगाओ, खेती-किसानी बचाओ के नारे भी लगाए।

इस दौरान किसान राज्य सरकार से भी 10 नवंबर से धान खरीदी की मांग कर रहे थे। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आव्हान पर राज्य में गुरुवार को किसानों ने प्रदेश के दो दर्जन से अधिक स्थानों पर ऐसे प्रदर्शन किया। इसको लेकर पुलिस ने भारी सुरक्षा बंदोबस्त किया था। संचालक मंडल के सदस्य तेजराम विद्रोही, रूपन चंद्राकर, जागेश्वर चंद्राकर, डॉ. संकेत ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जब से सत्ता में आई है, किसानों की मांगों की ओर ध्यान ही नहीं दे रही है। सरकार से विधानसभा के विशेष सत्र से किसानों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन निराशा हाथ लगी। वही दूसरी ओर भाजपा धान खरीदी के नाम पर केवल राजनीति ही कर रही है।

केंद्र एवं राज्य सरकार की किसान, कृषि व उपभोक्ता विरोधी नीतियों के खिलाफ किसान लामबंद हैं। किसान नेताओं ने कहा कि जगह-जगह इन कानूनों की प्रतियां और सरकार के पुतले भी जलाए गए और कार्पोरेट भगाओ, खेती-किसानी बचाओ, देश बचाओ के नारे लगाए। किसान नेता राजकुमार गुप्ता के नेतृत्व में मिनी माताचौक में दुर्ग-बालोद के किसानों ने चक्काजाम कर प्रदर्शन किया। वहीं जगदलपुर-धमतरी-रायपुर, राजनांदगांव-दुर्ग-रायपुर, बिलासपुर-रायपुर, सरायपाली-महासमुंद-रायपुर, भाटापारा-बलौदाबाजार-रायपुर जैसे प्रमुख मार्गों पर यातायात बाधित किया। रायपुर में दिए गए धरना-प्रदर्शन में द्वारिका साहू, गौतम बंद्योपाध्याय, वीरेंद्र पाण्डेय आदि भी शामिल हुए।

किसान नेता डॉ. संकेत ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार के तीनों कृषि विधेयकों के आने के साथ ही किसानों ने विरोध शुरू कर दिया था। सरकार ने न उनकी आशंकाएं दूर करने के लिए कोई बातचीत की और न हीं शंका समाधान की कोई कोशिश की। ये कानून किसानों के लिए नुकसानदायक हैं। इनके वापस लिए जाने तक आंदोलन जारी रहेगा। 10 नवंबर से खरीदा जाए धान किसान नेताओं ने कहा कि जब कांग्रेस पार्टी विपक्ष में थी, तब एक नवंबर से धान खरीदी की वकालत करती रही। एक-एक दाना धान खरीदने की बात करती रही। अब जब सत्ता में है, तब किसानों के मांगों की ओर ध्यान ही नहीं दे रही है। सरकार ने एक दिसंबर से धान खरीदी की बात की है। इससे किसानों का नुकसान होगा। किसान 10 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की मांग कर रहे हैं।