II गंदा पेयजल कोरोना से भी खतरनाक, पीलिया से छह मौतें! गिरफ्त में सैकड़ों, जल विभाग के सामने गंदा नाला बड़ी चुनौती,

II गंदा पेयजल कोरोना से भी खतरनाक, पीलिया से छह मौतें! गिरफ्त में सैकड़ों, जल विभाग के सामने गंदा नाला बड़ी चुनौती,

रायपुर. पूरा प्रदेश कोरोना से बचने लड़ाई लड़ रहा है लेकिन राजधनी रायपुर की जनता कोरोना के साथ ही पीलिया जैसी गंभीर बीमारी से भी जूझ रही है लेकिनकोरोना की आड़ में जिम्मेदार बचने में लगे हुए हैं। मोवा, शंकरनगर, रोहिणीपुरम सहित राजधानी के कई इलाकों में मोवा के वार्ड नंबर 10 में एक पीलिया के मरीज होने की जानकारी मिली है। इसके पहले शहर में लॉक डाउन लगने से पहले भी सड्डू इलाके में 15 से ज्यादा पीलिया के मरीज होने की सूचना मिली थी।

उस दौरान एक 40 वर्ष के व्यक्ति की पीलिया से मौत भी हुई थी, जिसके बाद भाजपा पार्षदों ने निगम का घेराव किया था, जिसके बाद कमिश्नर के आदेश पर शहर की कई टंकियों की सफाई भी करवाई गई थी। पुरे राजधानी के सिर्फ एक इलाके की ही बात करें तो पंडरी बस स्टैंड से लेकर दलदल सिवनी सहित विधानसभा इलाके में तकरीबन 5000 से ज्यादा घर हैं जिनके घरों में लगातार गन्दा, बदबूदार कीड़ों वाला पानी आ रहा है। साल के शुरुआत से लेकर मार्च तक में पूरे इलाके में सैकड़ों लोगों के चपेट में आने की लगातार सूचना थी लेकिन मार्च में दो महिलाओं और एक नव विवाहित युवक की मौत हुई थी जिसमें रामनगर इलाके की एक महिला की जुड़वा बच्चों देने के बाद पीलिया की वजह से मौत हुई थी।  

जिसके बाद रायपुर के महापौर एजाज ढेबर पुरे दल बल के साथ इलाके पहुंचे थे। महापौर ने दलदल सिवनी, डबरीपारा, कापा, आमासिवनी इलाके की पाइप लाइन को नालियों से बहार करने का काम शुरू भी कराया था, नालियों में ब्लीचिंग पाउडर छिड़काव साथ ही पाइपों के लूप होल्स को तलाशने का काम भी शुरू गया, जिसमें 22 पाइप लाइन में लीकेज चिन्हित किये गए थे। लेकिन बीच में कोरोना का लॉकडाउन आ गया और जिम्मेदार कोरोना की आड़ में मुंह मोड़कर घरों में बैठ गए। अब तक इलाके में छः से ज्यादा मौते पीलिया से चुकी हैं.

इस विषय में एमआईसी सदस्य और जल विभाग संभाल रहे सतनाम पनाग से बात हुई तो उन्होंने भी कोरोना का रोना रोते हुए असमर्थता बताई। साथ फ़िल्टर प्लांट में पानी की शुद्धता के मानक की भी जानकारी पता करके बताने कहा। इसके साथ ही पनाग ने ये भी कहा कि फ़िल्टर प्लांट में स्टापडेम से जहां से पानी को लिफ्ट करके फ़िल्टर प्लांट भेजा जाता है वहां पर ही शहर की गंदगी समेटे हुए एक नाला भी उसी जगह पर पानी में मिलता है जिसको हटाना बहुत जरूरी है, उस पर काम करवा रहे हैं।

बता दें कि रायपुर नगर निगम में जनता को पानी सप्लाई करने के लिए भटगांव इलाके में दो फ़िल्टर प्लांट स्थापित किये गए हैं। जिनमे से एक 150 लाख लीटर और दूसरा 80 लाख लीटर पानी को प्रतिदिन फ़िल्टर करने की क्षमता वाले प्लांट हैं। इतना पानी फ़िल्टर करने की लागत की अगर बात करें तो एक लीटर पानी को फ़िल्टर करने में 15 से 25 पैसे का खर्च आता है। ऐसे में इतने पानी को एक दिन में ही फ़िल्टर करने में निगम प्रशासन को करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं और इसका आंकड़ा पूरे महीने भर का देखें तो लाखों करोड़ का खर्च होता है, सिर्फ पानी को फ़िल्टर करने में। इसके लावा शहर की जनता तक पानी पहुंचने में भी लाखों रुपये खर्च किये जाते हैं।

कितने बीमार हुए, सही आंकड़ा नही बता सकते : सतनाम पनाग

कोरोना की वजह से सभी लॉक डाउन में फसे हुए हैं, इसलिए वर्त्तमान में सही आकड़े बता पाना अभी संभव नहीं है, लेकिन इस दौरान भी हम स्टाप डेम के पानी में मिलने वाले गंदे नाले को रोकने लगातार व्यवस्था बनाने का काम कर रहे हैं। सतनाम पनाग एमआईसी सदस्य नगर निगम रायपुर

दरअसल पीलिया की वजह से ज्यादातर मौतें उन लोगों की होती हैं जो आदतन नशेड़ी होते हैं. ज्यादा शराब पीने से इनका लीवर पहले से ही डैमेज होता है और पीलिया भी लीबर को अटैक करता है। ऐसे में ज्यादातर मौतें पीलिया होने की वजह से कम बल्कि लीबर डैमेज होने की वजह से ज्यादा होती हैं। हमारी टीम लगातार हुई स्थिति में जल्द ही काबू पा लिया जाएगा।

डॉ विनीत जैन अधीक्षक डॉ भीमराव आंबेडकर अस्पताल