breaking news New

कोरोना के मरीजों के लिए नई मुसीबत हो रहा ‘ब्रेन फॉग’

कोरोना के मरीजों के लिए नई मुसीबत हो रहा ‘ब्रेन फॉग’

कानपुर | किदवई नगर के बुजुर्ग को कोरोना हुआ। 20 दिन इलाज से निगेटिव होकर घर आ गए। अब वह बिलकुल बदल गए हैं। आंखें शून्य में देखती हैं। चाय-पानी देने पर चौंक पड़ते हैं। अक्सर नहाकर कपड़े पहनना भी भूल जाते हैं। इसी तरह लाजपत नगर के बैंक अफसर कोरोना संक्रमण में 16 दिन भर्ती रहे। निगेटिव हुए पर तेज सिरदर्द से परेशान थे। दोबारा चार दिन भर्ती रहे। डॉक्टरों ने ब्रेन में सूजन बताई। 15 दिन बाद जब बैंक पहुंचे तो कंप्यूटर से लेकर करेंसी चेस्ट लॉक तक सारे पासवर्ड भूल चुके थे। सब दोबारा रिसेट किए गए। अभी वह कम्प्यूटर के कई फंक्शन भूल रहे हैं। डॉक्टर इसे ‘ब्रेन फॉग’ बता रहे हैं। जिसका इलाज बड़ा जटिल है। कानपुर में ऐसे चार मरीजों का इलाज हो रहा है।

क्लॉटिंग से नसों में नुकसान
मेडिकल कॉलेज के न्यूरोलॉजी हेड प्रो. आलोक वर्मा के मुताबिक कोरोना वायरस नसों में खून के थक्के बना देता है। उससे यह दिक्कत हो सकती है। लम्बे समय तक ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहने वाले मरीजों की ब्रेन की नसें भी कमजोर होने लगती हैं। इससे न्यूरो समस्या पैदा होती है। ‘ब्रेन फाग’ के यह मरीज ज्यादातर बुजुर्ग हैं। कुछ मरीज एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम जैसे लक्षणों वाले भी मिल रहे हैं। जीबी सिंड्रोम से भी पीड़ित दो मरीज  मिले हैं। ब्रेन फॉग के लक्षण आने पर समय से इलाज हो तो महीने दो महीने में इलाज संभव है। फौरन न्यूरोफिजीशियन को दिखाना चाहिए।

क्या है ब्रेन फॉग
यह एक मानसिक बीमारी है, जिसमें व्यक्ति की याददाश्त कमजोर हो जाती है। उसके सोचने, समझने और प्रतिक्रिया देने की प्रक्रिया बहुत धीमी हो जाती है। यह कंप्यूटर के हैंग होने जैसी स्थिति है। कई मामलों में मरीज क्या बोल रहा है, क्या कर रहा है, उसे खुद पता नहीं चलता। शुरुआत में ही इसका इलाज न हो तो यह बीमारी खतरनाक साबित हो सकती है।

मरीजों में यह लक्षण दिखे

    घरवालों को पहचान पाने में मुश्किल
    याददाश्त घटी, कपड़ा पहना भी भूलने लगे
    फोकस कम हुआ, कन्फ्यूजन बढ़ा
    कई बार बताने पर कुछ समझ पाना
    सिर में हलके दर्द की शिकायत

मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ एसके गौतम का कहना है कि जिन मरीजों में ऑक्सीजन की जबरदस्त कमी हुई, जो लम्बे समय तक ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहे, उनमें न्यूरो प्राब्लम आना बहुत संभव है। याददाश्त पर असर पड़ता है। ब्रेन फाग ठीक होने वाली बीमारी है, बस समय ये इलाज जरूरी है।