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ट्रांसपोटर्स ने माल भाड़ा खर्च में जोड़ दिया ढाई रुपया प्रति किलोमीटर रिश्वत का खर्च

ट्रांसपोटर्स ने माल भाड़ा खर्च में जोड़ दिया ढाई रुपया प्रति किलोमीटर रिश्वत का खर्च

इंदौर । प्रदेश में ट्रांसपोर्टर्स ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उस हकीकत से रूबरू कराया है जिससे प्रदेश में बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता है। ऐसा कोई सा विभाग नहीं है जहां बिना लिए दिए काम नहीं होता हो। अब तो ट्रांसपोर्टस अपने इस रिश्वत का खर्च अपने भाड़े में प्रति किलोमीटर के हिसाब से लगा रहे हैं, जो इतिहास में पहली बार दिखाई दे रहा है। वैसे यह खर्च ढाई रुपए प्रति किलोमीटर मध्य प्रदेश के ट्रांसपोटर्स द्वारा ही जोड़ा गया है। इधर ट्रांसपोटर्स ने हर्ष के आंकड़े जारी करते हुए बताया कि डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान ट्रक संचालक अब माल भाड़ा बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।

एसोसिएशन ने सभी को एकजुट करने और एक जैसा किराया लेने के लिए उन्होंने विस्तृत आंकड़ा जारी किया है, जिसमें एक किलोमीटर की दूरी करने वाले 14 पहिया ट्रक की लागत 66 रुपये आ रही है। इसलिए बस लोग एक जैसा किराया लें। इंदौर ट्रक आपरेटर्स एंड ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सीएल मुकाती ने बताया पहले लाकडाउन और फिर डीजल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि से लोगों की कगार ही टूट गई है। जिससे सभी लोग परेशान हैं। हम लोगों ने इस बारे में अपने खर्च का आंकलन कर प्रति किलोमीटर निकाले जाने वाला खर्च निकाला है। इसमें ट्रक की किश्तें भी शामिल है। अब हमने सभी ट्रक आपरेटर साथियों से अनुरोध किया है। कि वे इससे कम किराया न लें। अभी भी कुछ संचालक काम किराए में ही चला रहे हैं।

जिससे उन्हें घाटा हो रहा है। मुकाती ने बताया कि हमने जो खर्च जोड़े हैं, उसमें आरटीओ के बेरियर पर होने वाली वसूली और पुलिस द्वारा की जाने वाली वसूली भी शामिल है। जो करीब ढाई रुपये प्रतिकिलोमीटर हो गई है। अगर यह बंद हो जाए तो हमें लागत ढाई रुपये कम पड़ जाए। इस खर्च में हमने डीजल, टोल टैक्स, मेंटनेंस, बीमा, रोड टैक्स, नेशनल परमिट, टायर खर्च, ड्रायवर-क्लीनर का खर्च, फायनेंस का खर्च भी जोड़ा है। अगर किसी ट्रक मालिक की गाड़ी फाइनेंस नहीं है, तो उसे लागत करीब 55 रुपये आ रही है। मुकाती ने बताया कि हम लोग अभी प्रति किलो 143  रुपये का भाड़ा ले रहे हैं। उसमें भी आते समय अगर गाड़ी में क्षमता से कम माल आ जाता है, तो हमें नुकसान हो जाता है। हमारे कई साथियों ने कंपनियों से अनुबंध कर रखे हैं। वे काफी नुकसान में हैं, वे अभी भी ीजल के भाव 78 रुपये के हिसाब से ही भाड़ा ले रहे हैं, जिससे नुकसान हो रहा है।