breaking news New

स्वास्थ्य अमला निरंकुश प्रशासनिक अधिकारियों का भी भय नहीं, आम जनता त्रस्त, डॉ घर में मस्त

स्वास्थ्य अमला निरंकुश प्रशासनिक अधिकारियों का भी भय नहीं, आम जनता त्रस्त, डॉ घर में मस्त


कोरिया, 13 जून। मनेंद्रगढ़ इन दिनों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मनेंद्रगढ़ के कर्मचारी नर्स एवं डॉ निरंकुश हो चुके हैं मानो प्रशासन का भय खत्म हो गया है। कोरोना कॉल के दौरान मानो इन्हें कार्य ना करने का बहाना सा मिल गया है। आपको बता दें कि रात बिरात किसी तकलीफ को लेकर अगर कोई मरीज और उसके परिजन पहुंचते हैं तो अस्पताल के अमले के द्वारा बेहद अभद्रता एवं टाल मटोल किया जाता है। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग के ऊपर एसमा एक्ट लगा हुआ है। और तीन पाली में ड्यूटी निर्धारित है।

जिलाधीश से भी अत्यधिक वेतन पाने के बाद भी डॉक्टर अपने कर्तव्य के दायित्वों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं।

सोचनीय पहलू यह है कि भगवान के बाद जिन्हें भगवान का दर्जा दिया जाता है।

किसी प्रकार के शारीरिक कष्ट होने पर मरीज एवं परिजन सीधे डॉक्टर के पास इस उम्मीद में आते हैं कि वह उनके प्राणों की रक्षा हो सके। 

मामला मनेंद्रगढ़ के अस्पताल का है जहां ग्राम पंचायत चैनपुर निवासी पूजा शुक्ला पति महेंद्र शुक्ला एवं उनके परिजन प्रसव हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले कर आये।

 जैसा कि शासन के द्वारा भी प्रसव अस्पताल में कराने हेतु प्रेरित किया जाता है लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद वार्ड आया एवम स्टाफ नर्स  के द्वारा अभद्रता की गई वा प्रसव हेतु किसी निजी अस्पताल में ले जाने की बात कही गई। यहाँ तक डॉ रश्मि श्रीवास्तव ने यह कहा कि रात भर यही करने के लिए बैठी हूं क्या और पल्ला झाड़ते हुए मरीज के परिजनों को समझाइश दी गई कि यहां पर सुविधाओं का अभाव है जबकि जानकारी के मुताबिक पूर्ण सुविधा से सुसज्जित अस्पताल है।

बदी मिन्नतों के बाद महिला डॉo स्त्री रोग विशेषज्ञ जी कौर आईं औऱ उन्होंने भी इलाज करने से मना कर दिया और कहा कि यही करने के लिए मैं बैठी हूं क्या। 

भर्ती करने के लिए परिजनों द्वारा दबाव बनाया गया जिस पर डॉक्टरों के द्वारा दवाइयां एवं गलप्स इत्यादि सामग्री बाजार से लाने हेतु एक लम्बा पर्चा पकड़ा दिया गया जबकि शासन के द्वारा सारी सामग्रियां अस्पतालों को उपलब्ध कराई जाती हैं।

जिसके बाद परिजनों के द्वारा  सीएमएच्ओ कोरिया से मोबाइल क्रo 9407684494 से संपर्क साधने की कोशिश की गई लेकिन वे फोन नहीं उठाए। उसके बाद मजबूर परिजनों ने कलेक्टर कोरिया को कॉल कर दिया जिस पर उन्होंने स्थानीय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को जानकारी देने की बात कही। लेकिन वे भी फोन रिसीव नहीं किए और अंत में सविप्रा उपाध्यक्ष गुलाब कमरों के हस्तक्षेप के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया और तहसीलदार, नायब तहसीलदार,बीएमओ त्वरित अस्पताल पहुंचकर मामले को संज्ञान में लिया। स्थिति यह है कि एक मीडिया के परिजनों को इतना परेशान होना पड़ रहा है तो सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम आदमी को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता होगा।