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ब्रेकिंग : चार की मौत, दो पत्रकारों समेत 60 लोग घायल, मोदी के दौरे का विरोध कर रहे लोगों पर गोलीबारी, कट्टरपंथी इसलामी गुट हिफ़ाजत-ए-इसलाम कर रहा था विरोध प्रदर्शन, भारत और हिन्दु विरोधी संगठन माना जाता है

ब्रेकिंग : चार की मौत, दो पत्रकारों समेत 60 लोग घायल, मोदी के दौरे का विरोध कर रहे लोगों पर गोलीबारी, कट्टरपंथी इसलामी गुट हिफ़ाजत-ए-इसलाम कर रहा था विरोध प्रदर्शन, भारत और हिन्दु विरोधी संगठन माना जाता है

ढाका. भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे के विरोध में हुए प्रदर्शन में चार लोग मारे गए हैं और दर्जनों घायल हो गए हैं। बांग्लादेश के कट्टरपंथी इसलामी गुट हिफ़ाजत-ए- इसलाम बांग्लादेश के कार्यकर्ताओं ने चटगाँव और ढाका में विरोध प्रदर्शन किया और सुरक्षा बलों पर हमला कर दिया। बांग्लादेश के सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने की कोशिश में गोलियाँ चलाईं, जिसमें चार लोगों की मौत हुई है।

इस विरोध प्रदर्शन में वामपंथी सगंठनों के लोग भी शामिल थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नरेंद्र मोदी मुसलिम विरोधी हैं और ऐसे व्यक्ति का बांग्लादेश की स्वतंत्रता के 50 साल पूरे होने के मौके पर वहाँ जाना ग़लत है।  शुक्रवार को दोपहर की नमाज के बाद हिफ़ाजत-ए- इसलाम बांग्लादेश के कार्यकर्ता ढाका के बैतुल मुकर्रम मसजिद पर जमा हुए और नारेबाजी की। बांग्लादेश के सत्तारूढ़ दल आवामी लीग के कार्यकर्ताओं और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई।

बांग्लादेशी अख़बार 'दे डेली स्टार' ने कहा है कि इसमें दो पत्रकारों समेत 60 लोग घायल हो गए। ढाका के अलावा चिटगाँव में भी हिंसा हुई है। चिटगाँव मेडिकल कॉलेज में तैनात एसिस्टेंट सब इंस्पेक्टर मुहम्मद अलाउद्दीन ने हिंसा की पुष्टि करते हुए कहा कि गोलियों की चोट के साथ आठ लोगों को इस अस्पताल में लाया गया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई।

बांग्लादेश पुलिस के एक अफ़सर रफीकुल इसलाम ने 'रॉयटर्स' से कहा कि पुलिस वालों ने पहले आँसू गैस के गोले छोड़ कर भीड़ को तितर बितर करना चाहा। भीड़ ने पुलिस वालों पर हमला कर दिया तो गोलियाँ चलाई गईं।  बांग्लादेशी अखबर 'ढाका ट्रिब्यून' को हिफ़ाजत-ए- इसलाम बांग्लादेश के संगठन सचिव अज़ीज़ुल हक़ ने कहा कि पुलिस ने ढाका के बैतुल मुर्करम मसजिद में उनके कार्यकर्ताओं और नेताओं पर गोलियाँ चलाईं।

क्या है हिफ़ाजत-ए- इसलाम?

हिफ़ाजत-ए- इसलाम कई छोटे-छोटे कट्टरपंथी इसलामी गुटों का शीर्ष संगठन है। इसका मानना है कि बांग्लादेश में इसलामी शरिया से शासन किया जाना चाहिए। बांग्लादेश का चरित्र अभी भी मोटे तौर पर धर्मनिरपेक्ष है, लेकिन इसलामी संगठनों का प्रभाव धीरे-धीर बढ़ रहा है। हिफ़ाजत-ए- इसलाम इस स्थिति का फ़ायदा उठाना चाहता है। हिफ़ाजत-ए- इसलाम राजनीतिक रूप से जमात-ए-इसलामी के साथ रहा है। बांग्लादेश के मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनल पार्टी के साथ जमात-ए-इसलामी रहा है। हिफ़ाजत-ए- इसलाम बांग्लादेश 2013 में चर्चा में आया जब बांग्लादेश के एक ब्लॉगर की हत्या कर दी गई थी और इस संगठन पर अंगुलियाँ उठी थीं।

शरिया की माँग

हिफ़ाजत-ए- इसलाम की 13 सूत्री माँगों में प्रमुख यह है कि बांग्लादेश में ईशनिंदा क़ानून यानी ब्लास्फ़ेमी लॉ लागू किया जाए और इसके तहत पैगंबर की निंदा करने वालों को मौत की सज़ा सुनाने का प्रावधान हो। ईशनिंदा क़ानून बहुत ही विवादास्पद क़ानून है, जो पाकिस्तान में लागू है। पाकिस्तान में इसके दुरुपयोग की ख़बरें आती रही हैं, वहां उसका विरोध भी हुआ है, पर ज़्यादातर पाकिस्तानी इसके पक्ष में हैं। हिफ़ाज़त-ए-इसलाम पर आरोप है कि वह सऊदी अरब से पैसे लेता है और उसी मॉडल के इसलाम को बांग्लादेश भी लागू करना चाहता है। इसे भारत विरोधी और हिन्दू विरोधी संगठन माना जाता है।