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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -घर में नहीं है खाने को, अम्मा चली पकाने को

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से  -घर में नहीं है खाने को, अम्मा चली पकाने को

-सुभाष मिश्र
देश में 1 अप्रैल से 14 अप्रैल तक टीका उत्सव मनाया जा रहा है। विश्व गुरु के रुप में भारत में कोरोना टीकाकरण की उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर आंकड़ों की बाजीगरी के साथ प्रचारित प्रसारित किया जा रहा है। देश के सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में से एक छत्तीसगढ़ में कोरोना वैक्सीन की उपलब्धता नहीं है। वर्ष 2020 के कोरोना संक्रमण के समय जो रेमेडसिविर इंजेक्शन मरीजों के लिए रामबाण साबित हुआ था, वह बाजार से गायब है और यदि है भी तो वह ब्लैक में बिक रहा है। इस इंजेक्शन को बनाने वाली कंपनियों ने इसका उत्पादन घटा दिया। अब इसकी सामान्य आपूर्ति में कम से कम 15 से 20 दिन लग जायेंगे। देश के किसान पिछले पांच महीने से आंदोलनरत हैं, उन समस्या का सौहाद्र्रपूर्ण हल करने की बजाय पूरे आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश, किसान संगठनों में फूट डालने की कोशिशों का नतीजा भी जब सिफर रहा तो देश के कृषि मंत्री तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण को देखते हुए किसानों से आंदोलन खत्म करने कह रहे हैं। अब उन्हें देश के किसानों के स्वास्थ्य की चिंता सता रही है। असम, केरल, पश्चिम बंगाल, पांडुचुरी, तमिलनाडु के चुनाव प्रचार में कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ाते एकत्र होने वाले लाखों लोगों की सभा को संबोधित करने के बाद जब प्रधानमंत्री को कोरोना संक्रमण की याद आती है, तो वे फिर से बचाव की समझाईश देने लगते हैं। हमारे नेताओं की कथनी-करनी के इस अंतर को देखकर आम जनता भी नियमों की अनदेखी करने से बाज नहीं आती।

मिनिस्ट्री आफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर के साथ india is the fastest country to administer 100 milian doses of covid-19 vaccine in 85 day की टैगलाईन के साथ जो आंकड़े जारी किये हैं, वे हमारे देश के बड़बोलेपन को उजागर करता है। 31 मार्च तक वैक्सीनेशन की स्थिति में अमेरिका जिसकी कुल जनसंख्या 33 करोड़ है, वहां कुल वैक्सीनेशन 15 करोड़ 43 लाख लोगों को हुआ, यानि 47.7 प्रतिशत आबादी को वैक्सीन लग गया। अमेरिका में बसाहट का घनत्व हमसे बहुत कम है। क्षेत्रफल की दृष्टि से हमसे कहीं बड़े अमेरिका में 47.7 प्रतिशत वैक्सीनेशन हुआ। कनाडा की कुल जनसंख्या तीन करोड़ 70 लाख है, वहां 57 लाख लोगों को वैक्सीन लग चुकी है, यानि 15.1 प्रतिशत लोगों का टीकाकरण हो चुका है। हमारे देश की आबादी 138 करोड़ है, जिसमें से अब तक 10 करोड़ लोगों को यानि 7.2 प्रतिशत लोगों को टीका लग चुका है। चीन में जो आबादी में हमसे बड़ा है वहां शत प्रतिशत लोगों को टीका लग गया है। दुनिया भर में अब तक कोविड-19 के जितने टीके लगाए गए हैं, उनमे से 44 प्रतिशत खुराक केवल अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन में दी गई है। बहुत से देशों और खासतौर से अफ्रीका में तो अब तक कोविड-19 का टीकाकरण अभियान शुरु नहीं हो सका है। वहीं उत्तरी अमेरिका और यूरोपीय देश अपने यहां टीकाकरण की रफ्तार को लगातार बढ़ा रहे हैं। अमेरिका में हर 100 लोगों पर 27 खुराक तो यूरोप में प्रति 100 लोगों पर 16 खुराक दी जा चुकी है। दुनिया में 67 ऐसे देश हैं, जो अपने यहां कोरोना का टीकाकरण नहीं शुरु कर पाए हैं। इनमें से 58 विकासशील देश हैं, भारत अपने साझेदार देशों को कोविड-19 के टीके उपलब्ध करा रहा है। 31 मार्च तक भारत ने अन्य देशों को कोविड के टीके की 6.4 करोड़ खुराक उपलब्ध कराई है। इसमें से एक करोड़ खुराक दान के रुप में दी गई है।
हमारे देश में पिछले एक साल से कोरोना संक्रमण को लेकर जो तैयारी करनी थी, वो तो हमने नहीं की पर अपनी कथित उपलब्धियों का गाल बजाने से बाज नहीं आये। विज्ञापनो और गोदी मीडिया के जरिये आपदा को भी अवसर बताया गया। हर छोटी बड़ी उपलब्धि को बढ़ाचढ़ा कर पेश करना हमारा राट्रीय चरित्र हो गया है। टीकाकरण की रफ्तार में पीछे रहने वाले हम फिर भी अपने आपको आंकड़ों के चार्ट में सबसे उपर बताते हुए गौरवान्वित हैं। हमारे पास 45 साल से ऊपर के लोगों को लगाने के लिए भले ही सब जगह वैक्सीन नहीं है, फिर भी हम टीका उत्सव मना रहे हैं। एक कहावत है कि-घर में नहीं है खाने को अम्मा चली पकाने को।
देश में मनाए जा रहे टीकाकरण उत्सव की शुरुआत में ऐसे शासकीय, अशासकीय संस्थान जहां 45 साल से अधिक आयु के सौ एम्पलाई काम करते हैं, वहां भी टीकाकरण की सुविधा दी जा रही है। वैक्सीन का टीका लगाने के मामले में अभी महाराष्ट्र सबसे आगे है। उसके बाद राजस्थान, उत्तरप्रदेश की बारी है।

टीकाकरण एक नियमित प्रक्रिया के तहत तेजी से होना चाहिए, जो अभी भी इस बात के लिए उलझा हुआ है कि टीकाकरण की आयु क्या हो। पहले 60 साल से ऊपर वालों को इसके बाद 45 साल के ऊपर वालों को इसमें शामिल किया गया। बहुत सी सरकारें जिसमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है, यह मांग कर रहा है कि 18 साल से ऊपर के लोगों को टीकाकरण का लाभ दिया जाए। कोरोना की दूसरी लहर आने के बाद यह देखा गया है कि इसकी चपेट में बच्चे, जवान, बड़े सभी आ रहे हैं। जो आबादी सबसे अधिक सक्रिय और गतिशील है, उसे जरुरी में कोरोना का टीका लगाना चाहिए।

हमारे देश में इस समय जब कोरोना से संक्रमित होने वालों की संख्या में रिकार्ड मात्रा में इजाफा हो रहा है, कुछ राज्यों में मरने वालों के लिए श्मशान कम पड़ रहे हैं, ऐसे में किसी प्रकार का उत्सव मनाकर टीकाकरण को बढ़ाने का अभियान एक तरह से मजाक और क्रूरता हो। हम कोरोना पीडि़तों का सही ढंग से उपचार कर सके। उन्हें रेमडेसिवर न सही उसकी वैकल्पिक दवाईयों, इंजेक्शन व डॉक्टरों की सलाह से दें। अस्पताल में भर्ती ऐसे लोगों को जिन्हें आक्सीजन की जरुरत है, आक्सीजन उपलब्ध करा सके, अस्पताल में बेड दे सकें, यही बहुत होगा। प्रोपेगेंडा, प्रचार, उत्सवधर्मिता को छोड़कर इस समय जमीनी हकीकत से दो चार होने की जरुरत है।