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कीचड़, धूल और दुर्गंध से लिप्त इस सड़क पर जरा चलिए संभलकर...

कीचड़, धूल और दुर्गंध से लिप्त इस सड़क पर जरा चलिए संभलकर...

राजकुमार मल

भाटापारा-इस सड़क से निकलिए, लेकिन सावधानी के साथ क्योंकि सामना करना होगा, कीचड़, धूल और दुर्गंध से। जी हां, यह मंडी रोड है, जो इस समय आवाजाही में ऐसी ही परेशानी की वजह बन रही है। लापरवाह कार्यशैली की पहचान वाली नगर पालिका प्रशासन के पास योजना तो ढेर सारी है लेकिन अमल करने वाली इच्छाशक्ति का पूर्ण अभाव है।


प्रदूषण का पर्याय बन चुके कईहा तालाब का सौंदर्यीकरण का काम चालू हो चुका है। योजना अच्छी है लेकिन कार्यशैली को लेकर सवालों का उठना चालू हो चला है। पहला काम, इसमें 58 साल से जमी गाद निकालने का था। शुरुआती दौर में यह काम, जैसी परेशानी में डाल रहा है वह नाराज ही कर रही है क्योंकि इसमें लापरवाही हर दिन, हर पल दिखाई दे रही है। काम करने का तरीका जैसा है, उसके बाद अब मंडी रोड से आवाजाही कम की जाने लगी हैं।

होना था, हो रहा...

शहर के मध्य में होने की वजह से कईहा तालाब से निकाली जा रही गाद पर्यावरण मानक के अनुसार निकाली जानी थी। याने सड़कों में कीचड़ का फैलाव रोकने के उपाय किए जाने थे लेकिन यह सड़क पर ही गिर रही है। सूखने के बाद धूल के रूप में फैल रही है। दुर्गंध रोकने के भी उपाय, मानक के पालन करने पर किए जा सकते थे। इसका ध्यान नहीं रखा गया। धूल के कण, हवा में फैलने से रोकने के लिए पानी का छिड़काव किया जाना था। इससे भी दूरी बनाई जा रही है। डस्ट क्लीनिंग मशीन से सड़क की सफाई नियमित रूप से करने में जैसी लापरवाही दिखाई जा रही है ,वह गुस्सा और निराशा का कारण ही बन रही हैं।

सलाह, आग्रह दरकिनार

अपनी सड़क की हो रही दुर्दशा को ध्यान में रखते हुए मंडी प्रशासन ने पहले ही पालिका से आग्रह किया था कि आवाजाही को ध्यान में रखते हुए कीचड़, धूल और दुर्गंध से बचाव के उपाय के साथ यह काम करें। नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की सलाह भी ऐसी ही है लेकिन पालिका ने ना ध्यान दिया ना ही कोशिश की। लिहाजा परेशानी का सामना कर रहे हैं, इस क्षेत्र के रहवासी और आवाजाही करने वाले राहगीर।

58 बरस बाद पहली बार



बजरंग महाराज। क्षेत्र के प्रमुख नागरिक। जिन्हें इस तालाब से गहरा लगाव है। पहले ही सवाल उठा चुके हैं, इस समस्या की ओर लेकिन 1963 के बाद 2022 में हो रही तालाब की सफाई की कार्यशैली को लेकर, वह भी दूसरों की ही तरह बेहद नाराज हैं, लेकिन उनकी भी नहीं सुनी जा रही। शहर जानना चाहता है कि इस मनमौजी प्रवृत्ति पर कब और कौन लगाम लगाएगा ? फिलहाल तो सवाल के जवाब नहीं मिल रहे।

इस विषय में ठेकेदार से बात करते है और व्यवस्था को जल्द सुधारने की कोशिश की जायेगी.

त्रिलोक सलूजा उपाध्यक्ष नगर पालिका परिषद भाटापारा