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अमृत मिशन योजना नगर निगम के अधिकारियों के लिए बना कमाई का जरिया - किशुन यदु

अमृत मिशन योजना नगर निगम के अधिकारियों के लिए बना कमाई का जरिया - किशुन यदु

राजनांदगांव, 10 जनवरी। संस्कारधानी में अमृत मिशन योजना को शुरू हुए लगभग 3 वर्ष हो चुके हैं । हर योजना के लिए केंद्र राज्य सरकार के द्वारा लगभग 200 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है लेकिन योजना अभी तक अपने मूल स्वरूप को प्राप्त नहीं कर पाई है । इसके साथ साथ ही साथ इस योजना से पता नहीं क्यों राजनांदगांव की जनता को वर्तमान परिस्थिति में लाभ कम नुकसान ज्यादा हो रहा है। जिसके लिए नगर निगम के अमृत मिशन से जुड़े हुए उच्च अधिकारी जिम्मेदार हैं। नगर निगम नेता प्रतिपक्ष किशुन यदु ने एक बयान जारी करते हुए कहा की अमृत मिशन के कार्यों पर ना तो सतत निगरानी हो रही है और ना ही कार्य की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जा रहा है। 

नगर निगम के अधिकारियों को अपने चेंबर से निकलने की फुर्सत नहीं है पूरे शहर को अमृत मिशन के लिए खोद दिया गया है और जहां नहीं खुदा है यकीन मानिए अगले दो-चार दिन में वहां भी खुदाई कार्य हो जाएगा लेकिन खुदाई करने के बाद महीनों तक ना तो निगम वहां पाइपलाइन डलवा रही है और ना ही खोदी गई सड़कों पर नियमानुसार कांक्रीट या डामरीकरण कार्य किया जा रहा है। इससे साफ जाहिर होता है अमृत मिशन के कार्यों पर नगर निगम के अधिकारी सिर्फ गाढ़ी कमाई करने में जुटे हुए हैं। किशुन ने कहा की जहां कहीं थोड़ा बहुत रिपेयरिंग काम हुआ भी है जनता उसकी क्वालिटी देख सकती हैं। एक सामान्य से ठेकेदार के लिए नियमों की लंबी फेहरिस्त है लेकिन जो लगभग दो अरब रुपए का प्रोजेक्ट चल रहा है उसके लिए नगर निगम के पास शायद कोई नियमावली नहीं है जिसकी वजह से स्थानीय ठेकेदार अपनी मनमानी पर उतारू है । 

किशुन यदु ने आगे बताया नगर निगम आयुक्त, कार्यपालन अभियंता या इंजीनियर पार्षदों या जनता की मांग पर वार्डों में स्थान देखने के लिए बड़ी मुश्किल से समय निकालकर आ तो जाते हैं लेकिन इन अधिकारियों के बोलने के बावजूद अमृत मिशन के ठेकेदार कार्य नहीं करते इसका क्या संकेत है? यदि कोई प्रोजेक्ट 3 साल चल रहा है तो शहर की जनता को कितनी परेशानी हो रही है यह तो शहर में रहने वाले लोग ही जानते हैं । यह सत्य है कि वर्तमान में या अधिकारी ना तो राजनांदगांव में रहते हैं और ना ही राजनांदगांव के हित में चिंता करते हैं यदि राजनांदगांव कि हित की चिंता करते  तो योजना कब से पूर्ण हो चुकी होती । अभी जबकि मूल रूप से मुख्य मार्गों में पाइप लाइन का ही कार्य पूर्ण नहीं हुआ है तो लोगों के घर तक पानी पहुंचने में पता नहीं और कितना वक्त लगेगा और नगर निगम के इन्ही निष्क्रिय अधिकारियों के कारण यह प्रोजेक्ट राजनांदगांव के लोगों को कब समर्पित होगा? 

एक तरफ अधिकारी लोग वाहवाही लूटते हैं कि हमने 80% कार्य पूर्ण कर दिए यह शायद इसलिए याद है  कि इस प्रोजेक्ट का काम फील्ड से ज्यादा फाइल में हुआ होगा? बार बार अधिकारियों द्वारा कार्य को प्रतिशत में बताना मतलब यही दर्शाता है कि उनका हिसाब किताब प्रोजेक्ट के कितने प्रतिशत तक हुआ है और भविष्य में कितने प्रतिशत का होगा?  अधिकारियों के व्यक्तिगत हिसाब किताब के आधार पर प्रोजेक्ट के प्रतिशत का हिसाब किताब तो नहीं है?या कहा जा रहा है  की  अमृत मिशन प्रोजेक्ट  कितना प्रतिशत  पूर्ण हो चुका है राजनांदगांव की जनता को आप प्रतिशत मत बताइए। हमें 80% या 90% कार्य पूर्ण कर दिए यह जनता को नहीं बताकर राजनांदगांव की जनता को यह बताइए कि उसे अमृत मिशन के नल से उसके घर में कब पानी आएगी आएगी भी या नहीं। छत्तीसगढ़ में पूर्व में डॉ रमन सिंह की भाजपा सरकार हो चाहे वर्तमान में भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार हो उनका एक ही उद्देश्य है नगरीय निकाय को टैंकर मुक्त करना लेकिन नगर निगम में इतनी निष्क्रियता है की इस योजना के 3 साल तक कार्य चलने के बावजूद टेंकर मुक्त तो दूर की बात है पाइप लाइन बिछाने के लिए जो सड़कों की खुदाई की गई है उसे ठीक से मरम्मत तक नहीं करवा पाए ।