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ध्रुव शुक्ल की कविताः प्रार्थना

ध्रुव शुक्ल की कविताः प्रार्थना


प्रभु

दो पक्ष स्पष्ट करो

सविनय अवज्ञा दो

साहस की प्रज्ञा दो


दो प्रतापी दो

एक पुण्यात्मा

एक पापी दो

दोनों को वर दो

सिद्धि दो,स्वर दो

वंश बढ़े दोनों का

दोनों का घर हो


अपनी संतानों में

दोनों की ममता हो

दोनों का राजपाट

दोनों की जनता हो

मंत्र-जाप दोनों का

पुण्य-पाप दोनों का

फूलने दो,फलने दो


मृत्यु सुनिश्चित है दोनों की

दोनों के जीवन को गलने दो

दोनों से प्रेरित हों सबके मन

दोनों से संचालित 

जीवन को ढलने दो

द्वन्द्वों को चलने दो


दोनों के मन में यह हो

दुनिया को रहने दो