breaking news New

रिश्वत में 'अस्मत' मांग रहा था एसीपी, बदले में मिली अनिवार्य सेवानिवृत्ति, अब शुरू होगी बर्खास्तगी की कार्यवाही, जांच भी चलेगी

रिश्वत में 'अस्मत' मांग रहा था एसीपी, बदले में मिली अनिवार्य सेवानिवृत्ति, अब शुरू होगी बर्खास्तगी की कार्यवाही, जांच भी चलेगी

राजस्थान सरकार ने रिश्वत के रूप में परिवादी महिला से उसकी 'अस्मत' मांगने के आरोपी पुलिस अधिकारी कैलाश बोहरा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है। सरकार अब अधिकारी को बर्खास्त करने की कार्रवाई शुरू करेगी। राज्य के प्रमुख गृह सचिव अभय कुमार ने शनिवार को इसका आदेश जारी किया। इसके अनुसार, लोकहित को देखते हुए बोहरा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है।

आदेश के मुताबिक, प्रशासनिक सुधार विभाग की उच्च स्तरीय स्थाई समिति की सिफारिश पर राजस्थान पुलिस सेवा (आरपीएस) के अधिकारी बोहरा को राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1996 के तहत सेवा से अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है। एक बयान के अनुसार राजस्थान पेंशन नियम 1996 के नियम 53(1) अन्तर्गत 15 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके अथवा 50 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके राजकीय कार्मिक को उसकी अक्षमता के आधार पर लोकहित में अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिये जाने का प्रावधान है। इस प्रावधान में बोहरा को तत्काल अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है।

उल्लेखनीय है कि संविधान के अनुच्छेद 311 में प्रत्येक राजकीय कर्मचारी को सेवा से पृथक करने से पूर्व सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक है। बोहरा के इस प्रकरण को समग्र रूप से देखते हुए सीसीए नियम 19 की कार्रवाई विचाराधीन रखते हुए अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है। अनिवार्य सेवानिवृत्ति के पश्चात सीसीए नियमों में कार्यवाही जारी कर नियमों के तहत बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी। चूंकि बोहरा ने 24 वर्ष 7 माह की सेवा पूरी की है व 52 वर्ष की आयु भी पूरी कर चुके हैं ऐसे में अनिवार्य सेवानिवृत्ति होने के बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू होगी।

उल्लेखनीय है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जयपुर पुलिस आयुक्तालय की महिला अत्याचार अनुसंधान यूनिट में तैनात सहायक पुलिस आयुक्त (पुलिस उप अधीक्षक) कैलाश बोहरा को रिश्वत के रूप में अस्मत मांगने के आरोप में पिछले रविवार को गिरफ्तार किया था। परिवादी महिला ने शिकायत की थी कि उसके द्वारा दर्ज कराए गए बलात्कार सहित तीन प्रकरणों की जांच बोहरा द्वारा की जा रही है।

परिवादी के अनुसार, बोहरा ने उसके पक्ष में कार्रवाई के लिए पैसे मांगे और अन्तत: रिश्वत के रूप में उसकी 'अस्मत' की मांग ली। यह मामला राज्य विधानसभा में भी उठा जहां संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने इस मामले को अत्यंत गंभीर (रेयर आफ द रेयरेस्ट) करार दिया।