ढूंढता हूं मैं फुर्सत के पल

ढूंढता हूं मैं फुर्सत के पल

सुजाता साहा 

9-10 के लॉकडाउन में लोग घरों में कैद होकर कोई परेशानी बयां कर रहा है, तो कोई वर्क एट होम... मगर कुछ ऐसे भी हैं जो इन पलों का सदुपयोग कर अपनी छुपी प्रतिभा को निखार रहे हैं.... फुरसत के पल में पेंटिग कर रहे हैं.... ललित चौधरी की कविता फुर्सत के पल के कुछ लाइनों से शुरुआत कर रही हूं-

ढूंढता हूं मैं फुर्सत के पल

दौड़ती-भागती सी जिंदगी

जाने क्यों मची है हलचल

शायद कहीं तो मिल जाए इनका हल

यह जिंदगी तो बीत ही जानी है

आज नहीं तो कल

ढूंढता हूं मैं फुर्सत के पल

 आज तीन लड़कियों का परिचय दूंगी तो लॉक डाउन को लेकर घर के भीतर परेशानी बयां नहीं कर रही हैं वे समय का सदुपयोग करते हुए अपने भीतर छुपी प्रतिभा को कागज पर उकेर रही हैं। 

अवंतिका शर्माः समसामयिक ,धार्मिक, सामाजिक चित्रण

महासमुंद के स्वास्थ्य विभाग में नान मेडिकल असिस्टेंट के पद पर कार्यरत आर के शर्मा की बिटिया अवंतिका शर्मा ड्राइंग के साथ साथ रंगोली बनाने में सिध्दहस्त है। वे लॉकडाउन के दौरान अपनी इसी प्रतिभा को निखार रही हैं। सिम्स बिलासपुर में एमबीबीएस की छात्रा अवंतिका इन दिनों इन्टरशिप की तैयारी कर रही है। व्यस्ततम जीवन से समय निकालकर कभी रंगोली तो कभी पेंटिंग बनाती है। इनके द्वारा बनाए गए पेंटिंग और रंगोली में समसामयिक ,धार्मिक, सामाजिक चित्रण दिखाई देता है।


शगुन का पेंसिल आर्ट

जगदीशपुर सेंट स्टीफन स्कूल में 9 वीं की छात्रा शगुन नंद स्कूलों में छुट्टी होने के कारण ज्यादातर समय ड्राइंग बनाने में बीता रही है।  शगुन की माँ शमिनानंद झगरेनडीह में शिक्षिका एलबी और पिता गुलाबनंद बरनाईदादर में पीटीआई पद पर हैं। शगुन लॉकडाउन के दौरान पेंसिल आर्ट पर कार्य कर रही हैं।