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संपादकीय : आज राष्ट्रीय एकता दिवस : हम कितने एक हैं भला!

संपादकीय : आज राष्ट्रीय एकता दिवस : हम कितने एक हैं भला!

आज देश एकता दिवस मना रहा है. हर साल 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर सारा देश यूनाइट होने का संदेश देता है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में सरदार वल्लभभाई पटेल की दुनिया की सबसे उंची मूर्ति स्टेच्यू आफ यूनिटी' बनाकर दुनिया को संदेश दिया है कि एकता की भारतीय उंचाई को कोई नही छू सकता. इस मामले में हम भारतीयों का कोई सानी नही. आखिर हमारे यहां चार मुख्य धर्मों के लोग निवास करते हैं, हजारों जातियां हैं, सम्प्रदाय हैं, भाषाएं हैं, बोलियां हैं, खान—पान या रहन—सहन के हिसाब से भी हम सब एक हैं. सबकी संस्कृति का सम्मान करते आए हैं और सालों से हमारी यह एकता अक्षुण्ण बनी हुई है. बीच—बीच में कुछ साम्प्रदायिक शक्तियां हमें बिखेरने की कोशिश करती हैं लेकिन उनके मंसूबे कभी सफल नही हो सके और ना हो पाएंगे

समंदर की तरह गहरे इतने आत्मविश्वास के साथ आखिर हम यह बात क्यों कह रहे हैं क्योंकि हमें अपने इतिहासबोध और संस्कृति का ज्ञान है. युद्ध हो या महामारी, दंगें हों या त्यौहार, हम सभी धर्मों के लोग एक साथ रहते हुए प्रत्येक झंझावातों का सामना करते हुए युगों—युगों से साथ चलते आ रहे हैं. ताजातरीन संकट कोरोना महामारी में भी हम सब बुद्धि से, ज्ञान से, विवेक से, एक बने रहे और इस महामारी से लड़ रहे हैं. हां कुछ लोगों को हमने जरूर खो दिया है लेकिन कुल मिलाकर जीत हमारी एकता की ही हुई है. कोरोना महामारी के नये मामलों में तीन महीने में सबसे अधिक गिरावट के संतोषजनक समाचार के तुरंत बाद अनेक राज्यों में संक्रमण का तेजी से बढ़ना चिंताजनक है. यह बढ़त सबसे अधिक दिल्ली, पश्चिम बंगाल, केरल, महाराष्ट्र, छतीसगढ़ और कर्नाटक में दर्ज की गयी है. बीते दिनों दिल्ली में तो अब तक का सर्वाधिक संक्रमण और इससे होनेवाली मौतों का आंकड़ा सामने आया है.

माना जा रहा है कि इसका कारण पूजा के उत्सवों तथा बाजारों में बड़ी संख्या में लोगों का जुटान है. पहले ही केंद्र सरकार और विशेषज्ञों ने इस संबंध में आशंका जताते हुए लोगों से लापरवाही न करने और प्रशासन से मुस्तैद रहने को कहा था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश को सतर्कता और सावधानी बरतने का संदेश दिया था. संक्रमण पर काबू पाने के लिए नयी रणनीतियों पर विचार हो रहा है क्योंकि अभी लंबे समय तक पर्व-त्योहार का सिलसिला जारी रहेगा. चुनाव भी हो रहे हैं.

मौसम भी अब करवट ले रहा है और ठंड में कोविड-19 वायरस के फैलने की आशंका भी अधिक है. हमारे देश, विशेषकर उत्तर और पश्चिमी भारत में वायु प्रदूषण बहुत सालों से एक गंभीर समस्या है. जानकारों का मानना है कि कोरोना से हुई 17 फीसदी मौतों में प्रदूषण का बहुत योगदान हो सकता है. लॉकडाउन हटने के साथ विभिन्न गतिविधियों के चालू होने के साथ-साथ दिल्ली समेत कई इलाकों में हवा में फिर से जहर घुलने लगा है. ठंड के मौसम में अनेक प्राकृतिक और मानवीय कारणों से यह और भी खतरनाक हो जाता है.

चिंता बढ़ने का एक अहम कारण यह भी है कि यूरोप और अमेरिका में एक बार फिर कोरोना ने कहर बरपा किया है. संक्रमणों की संख्या वहां भी अब तक के उच्चतम स्तर को छूती दिख रही है. इससे महामारी की रोकथाम के अब तक की कोशिशों पर सवालिया निशान लग रहा है. फ्रांस, जर्मनी समेत यूरोप के कई हिस्सों में फिर से लॉकडाउन जैसी पाबंदियों को लागू किया जा रहा है. वैसे फ्रांस जिस धर्मांधता और बदले की आग में इन दिनों झुलस रहा है, ऐसे में हमें सतर्क रहने की जरूरत है. इसकी आग में कहीं हम भी ना झुलस जाएं.